Thursday, June 2, 2011

भाग-३०
जुनैब- हाँ, बाबा . मैंने उससे कहा की वह इस काम को किसी दुसरे व्यक्ति के साथ क्यों नहीं कर लेता ? उसका ड्राईवर भी तो है, उसको कुछ अतिरिक्त पेमेंट देकर वह उसके गुप्त अंग को थोड़ी देर के लिए इस्तेमाल कर सकता था .
सलमा- बड़े होशियार हो, तब वह क्या बोला ?
जुनैब- वह मेरी तरफ बड़ी आस और प्यास भरी नजरों से देख रहा था. बोला-
- मेरा दिल तुम पर आ गया है. तुम जो मांगोगे दूँगा, बस प्यार करने की इजाजत दे दो, सिर्फ एक बार ....कभी एहसान नहीं मानूंगा . हम लोग अपने निकट के लोगों को ये सब नहीं बता सकते न , वरना वे बाद में मुझे ब्लेकमेल कर सकते हैं. देखो दिल लगी की बात होती है, मुझे तुम भले लगे इसलिए कुछ भी कीमत चुकाने के लिए तैयार हूँ. मैं तुम्हें बता ही चुका हूँ कि इनकम टेक्स डिपार्टमेंट का अधिकारी हूँ. समाज का सम्मानित व्यक्ति हूँ, मुझे तुमसे किसी तरह की कोई हानि नहीं हो सकती . मुझे तुम जैसे चिकने लड़के बहुत पसंद आते हैं, जिनकी दाढी -मूंछ ठीक से नहीं निकले होते. उनका वह खास स्थान पर चकाचक साफ़ होता है, जिससे प्यार करने में आसानी होती है.
जुनैब- मेरे शरीर के किसी भी हिस्से पर अभी तक बाल नहीं है. मैं बिलकुल साफ हूँ. लेकिन एक मर्द अगर किसी लड़के को प्यार करे तो ये अच्छा नहीं लगता . बड़ा अजीब सा लगता है. मैं इसलिए इनकार कर रहा हूँ.
-अगर तुम चाहो तो मेरे घर पर चलकर ये सब बात कर सकते हो. हम दोनों एक दूसरे के विचार शेयर कर सकते हैं, वैसे इतना ध्यान रखिये कि मैं तुम्हारी भावनाओं का पूरा ख़याल रखूंगा , तुम्हारे मान -सम्मान का भी ध्यान रखूंगा. और रही इसकी बात कि तुम्हें लड़की अच्छी लगती है तो उसका भी इंतजाम हो जाएगा . तुम्हें अगर मौज मस्ती करनी है तो मेरी बीवी के साथ कर सकते हो. मुझे कोई ऐतराज नहीं होगा. उसको भी कोई ओब्जेक्शन नहीं . अगर तुम मेरे साथ प्यार का खेल खेलते हो तो साथ में हम अपनी बीवी को भी शामिल कर लेंगे , जब तुम्हें और मुझे उत्तेजक अवस्था में देखेगी तो वह भी कामोत्तेजक हो जायेगी और वासना के दरिया में गोते लगाने लगेगी, उसी समय पर तुम हाथ साफ़ कर लेना. समझ रहे हो न. अगर मैं उससे कहूँ कि तुम जुनिअब के साथ शारीरिक सम्बन्ध बना लो तो उसे ऐतराज नहीं होगा. वह जवान है, हेंडसम है, बिलकुल तुम्हारी टक्कर की है, उसे देखकर तुम भी खुश हो जाओगे . तुम्हारी भी लार टपकने लगेगी . तुम भी उसे देखते ही मोहित हो जाओगे और उस पर हावी होना चाहोगे , उसका फिगर इतना जबरदस्त है कि तुम उसके यौवन उभारों को सहलाना चाहोगे, उन्हें चूमना चाहोगे, उन्हें बार-बार और हर बार दबाना चाहोगे, उसकी काली, घनी जुल्फों में हाथ डालकर कंघी करना चाहोगे, उसके सुर्ख रसीले होठों का रसपान करना चाहोगे.
जुनैब- मैं समझ गया, आपने उनकी इतनी तारीफ कर दी है कि अभी से मेरे रौंगटे खड़े हो चुके हैं, देखो न मेरा यह संवेदनशील अंग भी फडफडाने लगा है, मैं बेचैन होने लगा हूँ, कहीं मैं किसी मुश्किल में तो नहीं फंसने जा रहा . सूना है कि यह माया नगरी है, यहाँ के लोगों पर जल्दी भरोसा नहीं किया जा सकता .
- सब सुनी-सुनाई बातें हैं, इनसे क्या होता है. हकीकत तो ये है कि यहाँ के लोग बड़े जिंदादिल और अपने तरीके से जिंदगी जीने वाले होते हैं,. यहाँ के लोग कभी किसीके साथ दगा नहीं करते बल्कि कुछ लेने के बदले देने में विशवास करते हैं,
जुनैब- ठीक है, मैं आप पर भरोसा करता हूँ. आपके साथ चलने के लिए तैयार हूँ,. तुमने इतना कुछ कह दिया है कि मैं अगले सात दिनों तक भी इश्क की आग में जलता रहूंगा .
- उसकी फ़िक्र मत करो. तुम्हारी इस आग को मैं बहुत जल्द ठंडा करवा दूंगा. जितनी भी प्यास जिस्म और जिगर में लगी है, उसे शांत करवा दूंगा. तुम्हें आनंद के उस लोक की सिर करवाउंगा जहाँ से लौटकर आने का मन ही नहीं चाहेगा. तुम जब-जब मुंबई आओगे, हमें जरूर याद करोगे .
सलमा- ओह, तो आपने उस अआद्मी की बात मानी कि नहीं मानी ?
जुनैब- नहीं मानने का कोई कारण भी तो नहीं था. वह आदमी अपना आई कार्ड दिखा चुका तह, अपन विजिटिंग कार्ड दे चुका था, उसकी आँखों से भी सच्च्चाई झलक रही थी. किसी भी द्रष्टिकोण से ऐसा नहीं लगता था कि वह झूठ बोल रहा हो, हाँ, उसकी आँखों में जरूर वासना थी, ऐसी वासना जिसे देखते ही काम का ज्वर चढ़ने लगता था.

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