Tuesday, June 28, 2011

मानसूनी मौसम खुशियों के अलावा कुछ बीमारियों को भी अपने साथ लाता है, लेकिन कुछ सजगताएं बरतकर आप इन रोगों की रोकथाम कर सकते हैं.. पर कैसे?

गैस्ट्रोइनटेराइटिस

बरसात में गैस्ट्रोइनटेराइटिस के मामले काफी ज्यादा बढ़ जाते हैं। ऐसा क्यों? डॉ. सुनीता पटेल के अनुसार, प्रदूषित खाद्य पदार्र्थो को खाने से और अस्वच्छ पानी पीने से गैस्ट्रोइनटेराइटिस की शिकायतें बढ़ जाती हैं। बच्चों के इस मर्ज के संक्रमण से ग्रस्त होने की आशंकाएं ज्यादा होती हैं।

लक्षण

इस मर्ज के लक्षण डायरिया और कोलाइटिस से काफी मिलते हैं। गैस्ट्रोइनटेराइटिस के कई मामलों में बड़ी आंत में सूजन भी आ जाती है। मरीज को दस्त और उल्टियां होती हैं। पेट में रह-रहकर दर्द होता है।

रोकथाम

गैस्ट्रोइनटेराइटिस की रोकथाम, इसके इलाज और उपचार के बाद स्वास्थ्य लाभ इन तीनों ही स्थितियों में स्वच्छता का विशेष महत्व है। खाद्य पदार्र्थो व पेयों को स्वच्छ रूप में ग्रहण करें। घर और आसपास के माहौल को साफ-सुथरा रखें। कोई भी खाद्य पदार्थ खाने से पहले साबुन से हाथ धोना आपकी सेहत के हित में है।

ध्यान दें

अगर कोई शख्स गैस्ट्रोइनटेराइटिस से ग्रस्त है, तो उसे पर्याप्त मात्रा में पानी ग्रहण करना चाहिए, क्योंकि दस्त व उल्टियों से मरीज के शरीर से काफी मात्रा में पानी निकल जाता है।

इलाज

गैस्ट्रोइनटेराइटिस की कई दवाएं उपलब्ध हैं, जिन्हें डॉक्टर के परामर्श से ही लेना चाहिए।

पीलिया/ हेपेटाइटिस ए

हर साल मानसून में यह बीमारी पूरी तेजी के साथ अपना फन उठाती है। डॉक्टर अभिषेक भार्गव के अनुसार, इस मौसम में होने वाली अनेक बीमारियों की तरह पीलिया/ हेपेटाइटिस भी दूषित पानी पीने से फैलता है। यह मर्ज प्रदूषित पानी या तरल पदार्थ के जरिये व्यक्ति को अपनी गिरफ्त में लेता है। यह बीमारी सामान्यत: हेपेटाइटिस ए के वायरस द्वारा फैलती है। साफ-सफाई के अभाव में इसका प्रसार तेजी से होता है। अक्सर यह बीमारी मक्खियों द्वारा खाद्य पदार्र्थो पर बैठने से उत्पन्न होती है। मक्खियों द्वारा संक्रमित खाद्य पदार्र्थो को खाने से यह मर्ज तेजी से फैलता है।

लक्षण

* लगभग समस्त शरीर पर पीलापन नजर आने लगता है।

* मरीज को तेज बुखार के साथ सिरदर्द की शिकायत संभव है।

* भूख लगना खत्म हो जाता है।

रोकथाम

* परिवार के सदस्यों को हेपेटाइटिस ए की वैक्सीन लगवाएं।

* घर को स्वच्छ रखें और मक्खियों को पनपने न दें।

* जहां तक संभव हो, घर से बाहर का कोई खाद्य पदार्थ न खाएं और न ही पेय पदार्थ लें।

* ऐसा आहार ग्रहण करें, जिसमें प्रोटीन कम हो, लेकिन कैलोरीज उच्च मात्रा में हो।

बेहतर है बचाव

न्यूट्रीशनिस्ट माधुरी रुइया कहती हैं कि रोगग्रस्त होने से बचना एक समझदारी भरा कदम है। कुछ सजगताओं पर अमल कर आप मानसून के मौसम में होने वाली कई बीमारियों से बच सकते हैं

* सब्जियों को जीवाणुओं से मुक्त करने के लिए उन्हें 1:10 में क्रमश: सिरका और पानी के घोल में 10 मिनट तक के लिए भिगो दें। यानी सिरका का अनुपात 1 और पानी का 10 रहेगा। फूलगोभी और ब्रोकोली जैसी सब्जियों पर नमक छिड़कें।

* शेष बच रहे खाद्य पदार्र्थो को शीघ्र ही फ्रिज में रख दें।

* पानी को उबालकर और फिर ठंडा कर पिएं। उबले हुए पानी से ही किसी वस्तु को धोएं।

* खाद्य पदार्र्थो और रसोई की वस्तुओं को ढककर रखें ताकि घरलू मक्खियां उन पर न बैठ सकें।


मलेरिया..

मानसून का मौसम जहां लू और सूर्य की झुलसाने वाली गर्मी से राहत दिलाता है, वहींयह मच्छरों से पैदा होने वाले रोगों को भी बड़े पैमाने पर फैलाता है। मच्छरों से पैदा होने वाले प्रमुख रोगों में मलेरिया, चिकेनगुनिया और डेंगू बुखार को शामिल किया जाता है। बीते साल उत्तर भारत में मच्छरों द्वारा पैदा होने वाली इन बीमारियों ने कुहराम मचा दिया था। इसलिए मलेरिया के संक्रमण से बचने के बारे में जानकारी रखना जरूरी है।

कारण

मादा एनाफिलीस मच्छर के काटने से उसकी लार (सैलाइवा) के जरिये मलेरिया का जीवाणु व्यक्ति के रक्त में पहुंच जाता है।

लक्षण

* तेज बुखार

* ठंड लगना और कपकपाहट होना

* सिरदर्द व बदनदर्द

* कुछ गंभीर मामलों में पीड़ित को जॉन्डिस, बेहोशी, और गुर्र्दो से संबंधित समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं।

रोकथाम

इलाज से बेहतर रोकथाम की प्रक्रिया है। मच्छरों के काटने से बचने के लिए पूरी बांह वाली शर्ट और फुल पैंट पहनें यानी वस्त्रों से पूरे बदन को ढककर रखें। रात में सोते समय मच्छरदानी और मच्छर दूर करने वाली क्रीम्स का प्रयोग करें। घर के अंदर व बाहर पानी का जमाव न होने दें। इसी तरह सरकार व प्रशासन को भी मच्छर बहुल इलाकों में फॉगिंग करानी चाहिए और ठहरे हुए पानी और गंदगी को दूर करने का प्रयास करना चाहिए।

इलाज

रोग के लक्षणों के प्रकट होते ही शीघ्र ही डॉक्टर से संपर्क करें। अतीत में आम तौर पर मलेरिया में जो दवाएं दी जाती रही हैं, उनका प्रभाव मादा एनाफिलीज के प्रतिरोध (रेजिस्टेंट) के कारण अब असरकारक नहींरहा। इसलिए अब डॉक्टर मलेरिया के इलाज में नवीनतम कारगर दवाओं का प्रयोग कर रहे हैं। मलेरिया का पता लगाने के लिए रक्त परीक्षण कराया जाता है। कभी -कभी एक बार परीक्षण कराने से मलेरिया के परजीवी(पैरासाइट) का पता नहीं चलता। इसलिए किन्हीं मामलों में मलेरिया है या नहीं, इस बात का संदेह दूर करने के लिए कम से कम तीन बार रक्त परीक्षण कराना पड़ सकता है। वहीं तेज बुखार को दूर करने के लिए डॉक्टर द्वारा बतायी गयी पैरासीटामॉल का प्रयोग करें और पर्याप्त मात्रा में पानी व तरल पदार्थ ग्रहण करें।

[डॉ. सुशीला कटारिया]

सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन मेदांत-दि मेडिसिटी,

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