
नई दिल्ली. महिलाओं के खिलाफ रेप जैसे संगीन अपराधों के विरोध में दुनिया भर में तेजी से मशहूर हो रहा स्लटवॉक आंदोलन अब भारत में भी दस्तक दे चुका है। लेकिन भारत में महिलाएं दूसरे देशों की तरह छोटे और तंग कपड़ों में नहीं बल्कि 'सही कपड़ों' में स्लटवॉक करेंगी। दिल्ली में स्लटवॉक की शुरुआत करने वाली दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा उमंग सबरवाल का कहना है कि पहनावे को रेप की वजह बताने का विरोध और पीड़ित की जगह अपराधी पर फोकस करना ही उनके आंदोलन का उद्देश्य है। उमंग ने स्लटवॉक को ‘बेशर्मी मोर्चा’ नाम दिया है।
उमंग का कहना है कि स्लटवॉक के तहत वह कपड़े नहीं उतारेंगी। उनका कहना है, ‘छोटे कपड़े पहनना एक बोल्ड कदम है, लेकिन यह इंतहा नहीं है। मैं अपनी आवाज़ ऐसे अहम मुद्दे के तहत उठा रही हूं। लेकिन लोगों को सिर्फ इस बात से मतलब होता है कि मैंने किस तरह के कपड़े पहन रखे हैं। मैं सलवार कमीज में भी उतनी ही असुरक्षित हूं जितनी छोटे कपड़ों में।’
खुद के छोटे कपड़े पहनकर अपनी बात को वजन देने के सवाल पर उमंग का कहना है, ‘मैं सही तरह से कपड़े पहनूंगी। स्लटवॉक आंदोलन का यह मतलब नहीं है कि लड़कियां मछली पकड़ने वाला जाल (फिशनेट) पहनकर घूमें। हम बड़े मुद्दों की तरफ लोगों का ध्यान खींचना चाहते हैं।’
उमंग के मुताबिक, ‘हम सभी जानते हैं कि दिल्ली महिलाओं के लिए कितनी असुरक्षित है। जब भी महिलाओं के साथ कोई अपराध होता है हम अपराध करने वाले को दोषी ठहराने के बजाय महिला को ही सबक सिखाने लगते हैं। हम उसे बताने लगते हैं कि उसे क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं। हमें बाहर जाने, अपनी मर्जी के मुताबिक कपड़े पहनने, पेशा चुनने और सेक्सुअल पार्टनर की संख्या तय करने का हक है।’ उमंग के मुताबिक दिल्ली में स्लटवॉक जल्द ही एक वेबसाइट लॉन्च करेगा। इसके अलावा नुक्कड़ नाटकों के जरिए भी लोगों में जागरूकता लाई जाएगी।
महिलाओं के साथ रेप होने की स्थिति में उनके कपड़े पहनने के तरीके या उनके किसी खास तरह से दिखने को वजह बताने का विरोध ही स्लटवॉक है। इसमें महिलाएं अपनी मर्जी के मुताबिक कपड़े पहनकर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करती हैं। इसकी शुरुआत इसी साल कनाडा में हुई थी
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