Saturday, June 25, 2011

भाग-५४
सलमा- बात सब ठीक है, मगर मैं आज माफी चाहूंगी . मैं इस अकाम को नहीं कर पाउंगी .
जुनैब- तुम्हें इस बात का भेद बताना पडेगा. मुझे यह बताना होगा कि पहले तुमने हाँ क्यों की और अब ना क्यों कर रही हो.
जब तक इस बात का राज नहीं बताओगी , मैं किसी भी हालत में मानने वाला नहीं हूँ. भले ही मुझे जेल क्यों न जाना पड़े ?
सलमा- बात कुछ ऐसी है जिसे सुनने के बाद तुम मुझसे नफरत करने लगोगे . जितना ज्यादा प्यार कर रहे हो, सुनने के बाद उतनी ही नफरत करने लगोगे. मैं जानती हूँ कि इस तरह की बात सुनने के बाद तुम्हारे अंदर से प्रेम का भूत उतर जाएगा .
जुनैब- ऐसा तो कभी हो ही नहीं सकता. मैंने प्यार किया है कोई मजाक नहीं . चाहे जो हो जाए मैं नहीं बदल सकता , ऐसी कोई भी घटना मुझे विचलित नहीं कर सकती जो तुम्हें परेशान कर रही हो.तुम अपने दिल में किसी तरह का डर मत रखना सलमा- तुम बहुत अच्छी आदमी हो, तुम्हारे पिता भी एक सम्मानित राजनेता हैं. इसलिए मैं नहीं काहह्ती कि मेरी बदनामियों का साया या फिर मेरी काली छाया तुम पर पड़े. तुम मुझसे दूर हो जाओ. अब तक तो मैं स्वार्थ में अंधी हो गयी थी और इसी कारण मैंने तुम्हें अपने अतीत के बारे में कुछ नहीं बताया ,
जुनैब-मुझे कुछ जानने की जरूरत भी नहीं है. मैं तो सिर्फ इतना जानता हूँ , मैं तुम्हें प्रेम करता हूँ और तुम्हारे बिना जी नहीं सकता . एक पल भी नहीं रह सकता . मेरे प्यार में बहुत ताकत है. इस शक्ति को दुनिया की कोई शक्ति परास्त नहीं कर सकती. आंधी आये तूफ़ान आये , किसी में इतनी हिम्मत नहीं है जो मुझे मोहब्बत की राह से हटा सके.
सलमा- अगर किसी दिन तुम्हें ये पता चल जाये कि जिसे तुम प्यार करते हो, जिस पर जां निसार करते हो , जिसे मोहब्बत की देवी मानते हो , उसके साथ अतीत में बलात्कार हो चुका है, वह अपवित्र हो चुकी है तबी तुम्हारा क्या रिएक्शन होगा ?
जुनैब- तो मैं कहूँगा कि ऐसा संभव ही नहीं है . जिसने कहा है, झूठ कहा है, नेरी चाहने वाली के साथ ऐसा नहीं हो सकता .
सलमा- मगर ऐसा हो चुका है. ये जब की कहानी है , जब मैं बहुत छोटी थी. मुझे ठीक से याद भी नहीं है. बस इतना सा ध्यान है कि जब मैं पेड़ के नीचे खेल रही थी तभी एक रिश्ते का मामा मेरे पास आया और मुझे चोकलेट खिलाने का लालच दिया और मैं झांसे में आ गई . मैं तो इतना जानती ही नहीं थी, बस उसके चक्कर में आ गयी , इसका नतीजा ये निकला कि वह मुझे झाडियों में ले गया . उसने मुझे खाने के लिए जो चोकलेट दी उसे खाते ही मुझे चक्कर आने लगे. कई घंटों के बाद घरवालों को मेरा खून से लथपथ जिस्म मिला. बताते हैं कि मेरे बचने की कोई गुंजाइश नहीं थी. डॉक्टर ने किसी तरह से मुझे बचा लिया , उसी दिन से मुझे लड़कों से नफरत हो गयी , प्यार से नफरत हो गयी और इतनी ज्यादा हो गयी कि मैंने फिर कभी किसी लड़के की तरफ नहीं देखा . अब तुम समझे कि मैं क्यों तुम्हारी तरफ देखती भी नहीं थी. यह जानकार अब तुम मुझे ठुकराए बिना नहीं रहोगे , मुझ्स्र नफरत किये बिना नहीं रहोगे.
जुनैब -तुम गलती पर हो. ऐसा कभी नहीं हो सकता. मुझे तुमसे कोई भी जुदा नहीं कर सकता . अगर बचपन में तुम्हारे साथ कोई अनहोनी घटना हो गयी है तो मैं समझता हूँ कि इसमें तुम्हारी कोई कमी नही है. यह सिर्फ एक दुर्घटना है जो किसी के साथ भी हो सकती है. इसमें तुम्हारा कसूर जब होता तब तुम भी इसमें किसी न किसी रूप में इन्वोल्ब होती .
सलमा- मैं तुम्हारे लायक नहीं हूँ. मैं अपवित्र हो चुकी हूँ. मैं बदनसीब हूँ.
जुनैब- जिस्म तो मर जाता है, मिट जाता है. ये मिट्टी का बना है. असली चीज तो प्यार है. प्यार के बिना इंसान जीवित नहीं रह रह सकता. जब तक दुनिया है तब तक प्यार रहेगा .

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