भाग-३७
अगर बहुत जरूरत पड़ी और उसके बिना काम ही नहीं चला तो अलग बात है. मैंने एक फिल्म देखि थी, जिसमे इससे सम्बंधित गीत था- मिलने की तुम कोशिश करना वादा कभी न करना, वादा तो टूट जाता है. और मैं मिलने की कोशिश करने लगता हूँ. तुमसे मिलने की कोशिश की तब जाकर मेहनत सफल हुई न. अगर हाथ-पाँव नहीं मारता.
सलमा- अब इस अश्लील फिल्म को बंद कर दीजिए वरना मेरा जिस्म ही फट जाएगा . बड़ा कहीं हो रहा है इसे सहन करना. ये तो ऐसे -ऐसे द्रश्य हैं कि कलेजा मुंह को आने लगता है. काम वासना के झोंके बदन को फूंकने लगते हैं.ऐसा लगता है है जैसे मैं हवा में उड़ रही हूँ और कुछ पलों के बाद ही मैं ब्रम्हांड में विलीन हो जाउंगी . मेरे जिस्म के परखच्चे उड़ जायेंगे . मैं जी नहीं पाउंगी. यह प्यास इतनी बड़ी और घातक होगी मैं इसका अंदाजा भी नहीं लगा सकती थी. अब जाकर यह इल्म हुआ है की इश्क का खेल बड़ा खतरनाक होती है, दिल की लगी बहुत बुरी होती है. इसीलिए कहने वाले ये कहते आये हैं की इस्क से हमेशा दूर रहना चाहिए . मगर कोई कैसे इससे द्फूर रहे इसका फार्मूला कही नहीं बताया जाता. मैं तो कहती हूँ की जिस तरह डॉक्टर, इंजीनियर वगैरह बन्ने के लिए पढाई होती है वैसी मोहब्बत के रोग से बचने की पढाई भी होनी चाहिए . जब भी प्यार करे तो उसे पता तो रहे की यह है क्या बला ?
जुनैब- ये तुमने अच्छा सुझाव दिया है. और प्यार से बचने के लिए ही क्यों , फिर तो ऐसा कोर्स भी होना चाहिये की सफल प्यार कैसे करें, अपने आशिक या महबूब से मोहब्बत कैसे करें ? आगे चलकर हम भी इस सब्जेक्ट में सोच सकते हैं. बहुत बढ़िया आइडिया दिया है. अब मैंने जाना कि तुम कितने विद्वान हो और ये भी कि तुम पर मेरा दिल क्यों आया ?
सलमा- दिल क्यों आया इसका सही जवाब तो आपके दिल में ही कैद है. आप ही बता सकते हैं. पता नहीं सिर्फ मेरी चढती जवानी ही आपकी आँखों में चुभ रही थी या फिर और कोई दूसरा कारण है ? चलो जो हो. जीत आपकी ही हुई. अब मैं आपके आगोश में हूँ. देखो , तुम्हारे सीने से मेरा सीना भिड़ा हुआ है, इसके बावजूद आग की लपटें निकलती ही जा रही हैं. ऐसा लगता है जैसे कि यह आग मुझे जलाकर ही दम लेगी .
जुनैब- यह इश्क की आग है, इससे डरने की जरूरत नहीं है. इसमें जितनी लपटें उठेंगी, तुम्हें प्रत्यक्ष में उतना ही सुख मिलेगा, उतना ही आनंद आएगा . यह आनंद हम दोनों बहुत जल्द महसूस करने वाले हैं, तुमने अश्लील फ़ि८ल्म तो बंद करवा दी है मगर जिस तरह से उस फिल्म का नायक मौज ले रहा था, इश्क कर रहा था . ठीक उसी तरह हम दोनों भी मौज मस्ती करेंगे . मगर उन की तरह असुरक्षित सेक्स करने का हमारा कोई इरादा नहीं है. हम लोग पढ़े -लिखे , सुलझे हुए और समझदार नागरिक हैं. आम आदमी की अपेक्षा हमसे ज्यादा जागरूकता की उम्मीद की जाती है. इसलिए हम ये कहते हैं कि शारीरिक सम्बन्ध बनाने से पहले हम लोग पूरा इत्मीनान बरतेंगे और ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे अब या बाद में हम लोगों को कोई तकलीफ आये.
सलमा- हाँ, इससे मैं सहमत हूँ. हम लोगो को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे दोनों परिवारों की इज्जत को ख़तरा होता हो. या जिससे दोनों परिवारों की इज्जत दांव पर लगती हो.
जुनैब- हाँ ठीक है. मैंने कंडोम मंगा लिया है. अब मैं इसका इस्तेमाल करूँगा. देखो,. मुझे ज्यादा कुछ अनुभव नहीं है, इसलिए आगे का जो भी काम है वो हम दोनों को ही मिल जुलकर करना है.
सलमा- अब जाने भी दो. अभी-अभी बता रहे थे कि विजय चोधरी और उसकी पत्नी दोनों के साथ खूब गुलछर्रे उड़ा चुके हो. जान बोऊझ्कर अब भोले बने हुए हो.
जुनैब- अरे यार , सच बताने का यही तो नुक्सान होता है. लड़कियां तो वैसे ही शकी होती हैं, ऊपर से अगर कोई किसी दुर्घटना के अबरे में सच्ची बात बताता है तो नुक्सान हो जाता है. बदले में ऐसे अतने मिलते हैं.
सलमा- अच्छा सोरी बाबा, नाराज मत होना
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