भाग-४२
मेरी सहमति हासिल करने के लिए अगर आप मुझे जुनैब या अन्य किसी गैर मर्द की बांहों में डालना चाहते हैं तो ये गलत है. ऐसा मत कीजिये प्लीज.मैं आपके प्रति वफादार रहकर भी आपके इस काम में आपका साथ दे सकती हूँ. अगर मैं जीवन भर भी किसी मर्द के साथ जिस्मानी ताल्लुक नहीं बनाऊं , तो भी ज़िंदा रह सकती हूँ. जीने के लिए यही सब कुछ तो नहीं होता. इससे आगे भी दुनिया है. इससे आगे और भी बहुत से काम हैं. मैं आपकी पत्नीव्रता बनकर भी जिंदगी काट सकती हूँ. सिर्फ आपका चेहरा देखने भर से ही मुझे अपार सुख मिल जाता है. कम से कम मेरे सर पर छत तो है. आपका साया तो है, मैं कुंवारी तो नहीं हूँ, विधवा तो नहीं हूँ.मेरे सामने तुम रहते हो. सब कुछ मिल जाता है. अगर अकेला सेक्स नहीं होता तो क्या फर्क पड़ता है. सिर्फ सेक्स से ही तो दुनिया नहीं चलती. उसके लिए और भी बहु७त कुछ की जरूरत होती है. प्यार की जरूरत, सहारे की जरूरत और आर्थिक अजरूरत सबसे अहम होती है. क्योंकि पेट में अगर अनाज जाता है तो उसके लिए दौलत की जरूरत होती है . दौलत सब कुछ न सही मगर बहुत कुछ होती है. इससे तो कोई इनकार नहीं कर सकता. ये भी सच है की मेरे परिजनों ने आपसे इसीलिए मेरी शादी की है, ताकि मुझे कभी भूखी न रहनी पड़े. मैंने बचपन से भूख -प्यास को देखा है, सहा है. शायद परिजन नहीं चाहते थे की यह भूख -प्यास जीवन भर काली छाया बनकर मेरा पीछा करे. मगर यह भी उतना ही सत्य है की मैं आपका पूरा आदर करती हूँ, सम्मान करती हूँ, प्रेम करती हूँ. चाहने लगी हूँ.आप चाहे जो करें , मुझे उसका कोई ऐतराज नहीं है,. मैं जानती हूँ एक न एक दिन आप जरूर संभल जायेंगे , सब कुछ जान जायेंगे . गलत और सही तो आप अब भी जानते ही हैं मगर उस चीज को मान नहीं रहे हैं. आप भी मर्द हैं उसके बावजूद आप दूसरे मर्दों में क्यों इंटरेस्ट लेते हैं, उनके साथ में शारीरिक सम्बन्ध क्यों बनाना चाहते हैं, इसका मुझे कोई ज्ञान नहीं है. अगर आप कोशिश करें तो मैं आपको भी अच्छा खासा मजा दे सकती हूँ. आपकी हर इच्छा पूरी कर सकती हूँ. मैं आपका हर तरह से सहयोग करने के लिए तैयार हूँ. आप यदि ये सोचते हैं मैं तभी आपका साथ दूंगी जब आप मुझे दूसरों के पहलू गर्म करने की इजाजत देंगे .
विजय चोधरी- तुम बहुत अच्छी हो विनीता. मैं इतना तो जानता था की भारतीय नारी दुनिया भर की महिलाओं के लिए आदर्श होती है मगर वो इतनी ऊंची, इतनी न्महान भी हो सकती है यह मैंने आज प्रत्यक्ष अनुभव किया है. मैंने सति सावित्री के बारे में सूना था जो मौत की आगोश में से भी अपने पति को बचा लाती है मगर नर्क के गर्त से अपने पति को बचाने वाली नारी के बारे में मैंने आज सुना है, देखा है.
विनीता- इतनी तारीफ़ भी मत करो की मैं शर्मिन्दा हो जाऊं. कहाँ सति सावित्री जैसी महान त्यागशील नारी और कहाँ मैं एक आम महिला. मैं तो उसनके पैरों की धुल के बराबर भी नहीं हूँ. ये तो आपका बडप्पन है जो मुझ गरीब के साथ रिश्ता जोड़ा वरना हम आपके बराबर के थोड़े ही हैं. आप ठहरे क्लास वन ऑफीसर और मैं कर्ज से दबे एक ऐसे गरीब परिवार की लड़की जहां दहेज के अभाव में चार लडकियां कुंवारी घर में बैठी थी. अगर आप आर्थिक सहयोग न करते तो ब्वे आज भी इसी तरह कुवारी बैठी रहती.
विजय- ये मेरा एहसान नहीं था आपके परिवार पर बल्कि ये तो मेरा कर्तव्य था .लोग न जाने कितना तप करते हैं, दान -पुन्य करते हैं अगर मिअने थोड़ा सा सहयोग कर दिया तो कौन सा बड़ा काम कर दिया . मैं शुक्रिया अदा करता हूँ जो मेरे बारे में इतने पवित्र विचार रखती हो. मैं जुनैब का भी आभारी हूँ जो इसने साथ दिया . अगर तुम इसके साथ जिस्मानी सम्बन्ध नहीं बनाना चाहती तो मैं जिद नहीं करता, दवाब नहीं डालता, आग्रह भी नहीं करता. तुम्हें ध्यान होगा मैंने पहले ही ये स्पष्ट कर दिया था की अगर सभी पक्षों को कोई ऐतराज न हो तो ये सम्बन्ध बनाए जा सकते हैं. किसी को नाराज करके या दवाब में लेकर नहीं.
सलमा- इसका मतलब वह लड़की भी बहुत अच्छी थी. एक नपुंशक की पत्नी होकर भी अगर वह इस तरह की भावना दिकाह सकती है तो इसे लाजवाब ही कहा जायेगा न . मैंने तो कभी ऐसी लड़की के बारे में सुना नहीं था.
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