भाग-४८
विनीता- मैं तुम्हारे लिए अपनी तो क्या सारे जमाने की नजरों से भी गिर सकती हूँ. अगर कहो तो आसमान से पाताल में छलांग लगा सकती हूँ और तुम,... क्या तुम मेरे लिए अपने कुछ सिद्धांतों को पल भर के लिए, सिर्फ कुछ पल के लिए नजरअंदाज नहीं कर सकते. अगर मैं ये कहूँ कि अपने सिद्धांतों को छोड़ दो, उन्हें भूल जाओ तब तो अलग बात है. मैं तो बस कुछ पल नजरअंदाज करने की बात कर रही हूँ. तुम नहीं जानते , उन कुछ पलों में ही किसी बदनसीब की तकदीर बदल जायेगी , जिसे तुम सिद्धांतों का मामला समझ रहे हो वह किसी की जिंदगी और मौत का मामला है जुनैब. और किसी गरीब की जिंदगी से खिलवाड करना अच्छी बात नहीं है. आज मैं तुम्हारे सामने गिडगिडा रही हूँ. अपने प्यार की थोड़ी सी भीख मांग रही हूँ, हो सकता है कल ऐसा दिन आये जब तुमज किसी लड़की के सामने अपने प्रेम का प्रस्ताव रखोगे, रोओगे , गिड गिडाओगे मगर वह लड़की आपके ऑफर को ठुकरा सकती है, तुम्हारे दिल को इससे ठेस लड़ सकती है. तुम्हारे स्वाभिमान को तकलीफ पहुँच सकती है. सोचिये उस समय तुम पर क्या बीतेगी, रातें रो-रो गुजरेंगी , दिन यादों में गुजरेंगे . तन्हाई की आग तुम्हें जलाकर राख कर देगी, तुम्हारे अरमान जल जायेंगे , तुम्हारे जज्बात दफ़न हो जायेंगे . काश / ऐसा कभी न हो और अगर ऐसी नौबत आये भी तो तुम्हारी जगह पर मुझे वो सब तकलीफें हो जाएँ मगर सोचो कितना बुरा होता ये इश्क का रोग . और इससे क्या -क्या हो सकता है.जिसे इश्क का रोग नहीं लगा हो वो इसकी गंभीरता को नहीं समझ पायेगा. किसीने कहा भी तो है- ' जाके पाँव न फटी बिवाई , वो क्या जाने पीर पराई '. मैं तुम्हें ताना नहीं मारती. बल्कि अपने बारे में बताना चाह रही हूँ. यही सब होता है पया में. और इकतरफा प्यार तो और भी ज्यादा खतरनाक होता है. जैसा मुझे हो गया है तुमसे. तुम्हें कुछ फर्क भी नहीं पड़ा और मैं इश्क के समुन्दर में बहुत गहराई तक डूब चुकी हूँ. अब क्या होगा, कैसे होगा ? कुछ पता नहीं है. हो सकता है मैंने कोई तल्ख़ बात कह दी हो, जज्बात में बहकर अक्सर इंसान ऐसी हरकत कर देता है, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, मेरे दिल में तुम्हारे लिए बेंतिहाँ प्यार-मोहब्बत है. जूनून है. इसलिए मैं चाहती हूँ कि मुझे क्षमा कर देना. उम्र में तुम मुझसे छोटे ही होंगे , तब भी निवेदन कर रही हूँ. क्योंकि मैंने तुम्हें मोहब्बत के मसीहा के तौर पर देखा है. तुम्हारा सम्मान करती हूँ, तुमसे प्यार करती हूँ, ये बात मैंने कहनी है , सो कह चुकी हूँ अब फैसला आपके हाथ में हैं, चाहे जो सजा दो या फिर ... या फिर मुझे प्यार की गंगा में नहलाकर पवित्र कर डालो, मुझे प्यार चाहिए, जायदाद और धन दौलत स्थाई नहीं होती, आती है जाती है और जल्द ही उसका अस्तित्व समाप्त भी हो जाता है मगर प्यार सदा अमर रहता है, उसकी खुशबु हवाओं में तैरती रहती है. मोहब्बत को कोई मिटा नहीं सकता . कोई उसे झुका नहीं सकता.
जुनैब- मैं तुम्हारे पवित्र प्यार को समझता हूँ, और नतमस्तक होकर उसका अभिवादन करता हूँ. मैं समझता हूँ कि सौभाग्य से ही किसीको सच्चा प्यार नसीब हो सकता है . यूँ तो दुनिया में बहुत सी चीजें ऐसी हैं जिन पर दुनिया कायम है मगर मोहबब्त के महत्त्व को किसी भी तरह से कम नहीं किया जा सकता . मोहब्बत अमर है और सदा अमर रहेगी .मैं समजह सकता हूँ, जब किसी के प्यार का प्रस्ताव ठुकराया जाता है तो बड़ी तकलीफ होती है, तड़प होती है बड़ा दर्द होता है. लगता है जैसे उसके दिल का चमन उजाड गया, उसकी दुनिया सूनी हो गयी . तन्हाइयां उसे जीने नहीं देती. काले नाग की तरह डसती रहती हैं.
विनीता- जब सब कुछ जानते हो और प्यार के पुजारी होने का दम भी भरते हो तो एक अबला का हाथ थाम क्यों नहीं लेते. अपने प्यार के सागर से मेरे उजड़े हुए चमन को हरा -भरा क्यों नहीं कर देते. देखते नहीं , मेरा युँवं कितना बेचैन है. मन में कितनी चिंगारियां उठ रही हैं. जिस्म कितना सुलग रहा है. आँखें कितनी प्यासी-प्यासी हैं. सब कुछ देख और जानने के बाद भी सोच में डूबे हो. तुम्हारी खामोशी मेरी जान ले सकती है.
No comments:
Post a Comment