भाग-३१
उसकी फ़िक्र मत करो. तुम्हारी इस आग को मैं बहुत जल्द ठंडा करवा दूंगा. जितनी भी प्यास जिस्म और जिगर में लगी है, उसे शांत करवा दूंगा. तुम्हें आनंद के उस लोक की सिर करवाउंगा जहाँ से लौटकर आने का मन ही नहीं चाहेगा. तुम जब-जब मुंबई आओगे, हमें जरूर याद करोगे
सलमा- ओह, तो आपने उस आदमी की बात मानी कि नहीं मानी ?
जुनैब- नहीं मानने का कोई कारण भी तो नहीं था. वह आदमी अपना आई कार्ड दिखा चुका तह, अपन विजिटिंग कार्ड दे चुका था, उसकी आँखों से भी सच्च्चाई झलक रही थी. किसी भी द्रष्टिकोण से ऐसा नहीं लगता था कि वह झूठ बोल रहा हो, हाँ, उसकी आँखों में जरूर वासना थी, ऐसी वासना जिसे देखते ही काम का ज्वर चढ़ने लगता था. मैं उसके साथ-साथ चल दिया . जब वह अपनी गाड़ी के पास आया तो मैं चौंक गया . उसकी गाड़ी बेहद आलीशान और मंहगी थी. मैंने किसी अखबार में उस गाड़ी के बारे में पढ़ रखा था, उसकी तस्बीर भी देखी थी. अखबार में उस विदेशी गाड़ी की कीमत एक करोड से ज्यादा बताई गयी थी. गाड़ी खुद वही व्यक्ति ड्राइव कर रहा था. उसका नाम विजय चोधरी था. बस कुछ मिनिट की ड्राइविंग के बाद ही हम लोग एक मंहगे कोम्प्लेक्स में प्रवेश कर रहे थे. उसने एक मंहगे और विशाल बंगले के लोन में गाड़ी रोक दी, यह चोंकने की मेरी दूसरी बारी थी. मैं सोच नहीं पा रहा था कि कोई व्यक्ति इतना अमीर भी हो सकता है, अमीर और बड़ा अधिकारी होकर वह ऐसा कार्य भी कर सकता है. घर में अपनी खूबसूरत पत्नी के होते हुए भी अगर कोई मर्द किसी दूसरे मर्द के गुप्त अंग को सहलाना चाहता है, उसे प्यार करना चाहता है या किसी मर्द के साथ प्रेम का खेल खेलने की बात कर सकता है. यह सब उसे काल्पनिक और अजीब लग रहा था. उसकी समझ में नहीं आया कि कोई ऐसा कैसे कर सकता है, सच्चाई तो ये भी है कि वही सब जानने के लिए भी वह चोधरी के साथ आया था. उसके बंगले को कीमती चीजों से सजाया गया था. वह सीधा अपने बेडरूम में आ गया. उसका बेडरूम बहुत सुन्दर था, लेकिन जब वहाँ लगी तस्बीरों पर ध्यान गया तो वह हैरत में रह गया, उसने अपनी दीवारों पर कामुक तस्बीर लगा राखी थी, एक तस्बीर में एक लड़का दूसरे लड़के के खतरनाक अंग को सहला रहा था, दूसरे चित्र में एक लड़का दूसरे लड़के के होठों को चूम रहा था . इसी प्रकार एक चित्र बेहद डेंजर था. उस चित्र में एक मर्द दूसरे मर्द के गुप्त अंग को चूस रहा था. इसे देखकर एक बार के लिए तो जुनैब का जी चाहा कि वह इस जगह को छोड़कर ही भाग जाए क्योंकि उसकी भावनाएं काबू में नहीं थीं, अब वह कामुक हो गया था. इतना ज्यादा उत्तेजक कि अपने बढे हुए अंग को वह अपने हाथों से मसलने का उप्क्रंम करने लगा . तभी एक महिला ने बेडरूम में प्रवेश किया. यह २० और २५ के बीच की महिला था. यानी कि चोधरी की आधी उम्र की थी , उसके चेहरे पर खुशी के भाव थे. वह समझ गया कि विजय चोधरी अपनी जिस पत्नी का जिक्र कर रहा था, वह वही थी. उसका अनुमान भी सही निकला. विजय चोधरी ने उसका परिचय अपनी पत्नी के रूप में कराया . वह हंसमुख महिला थी.
सलमा- अच्छा, उसे देखकर तो तुम्हारी बांछें खिल गयी होंगी, तुम्हारा यह अंग और भी ज्यादा बेकाबू हो गया होगा .
जुनैब- जी नहीं, ऐसा कुछ नहीं हुआ, उलटा यह अंग कमजोर पड़ गया था, क्योंकि उसने अच्घानक कमरे में प्रवेश किया था. स्वभाविक रूप से मेरा मन कहीं बहक चुका था, दिमाग शायद उसीके बारे में सोच रहा था. इसी कारण मैं ठंडा पड़ गया . मैं उससे झिझक रहा था और इस बात को मुझसे ज्यादा वह समझ रही थी. उसने थोड़ी सी दरियादिली दिखाते हुए मुझे अपने गले से लगा लिया. उससे मिलते समय मुझे महसूस हुआ जैसे कि हम दोनों की जोड़ी बिलकुल फिट थी जबकि चोधरी के साथ उसकी जोड़ी ज़रा भी अच्छी नहीं लग रही थी. हमारा परिचय कराने के बाद विजय चोधरी थोड़ी देर के लिए अलग हुआ तो उस महिला ने अपनी बाँहें मेरी तरफ फैलादी , म,अं झिझक रहा था , उस झिझक को दूर करने के लिए बोली-
- अरे देख क्या रहे हो , आओ न. मेरी बांहों में समा जाओ. तुम्हें लगता है कि यह बुड्ढा मेरी तरसती जवानी को भला क्या सुकून दे पायेगा ? तुम मेरी उम्र के हो. मैं और तुम जी भरके प्यार करेंगे , लेकिन उससे पहले तुम्हें चोधरी को थोडा सा सुख देना होगा .
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