भाग-४०
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खैर, मैं तुम्हें बता रहा था की विजय चोधरी जब अपने उस... अंग को सख्त नहीं कर पाया टॉप उसने अपनी पत्नी की तरफ बड़ी उम्मीद भरी निगाहों से देखा, मानो वे आँखें उससे गुहार कर रही हों, मनुहार कर रही हो. याचना के भाव थे उस द्रष्टि में. विनीता तुरंत सतर्क हो गयी . उसने मुझे बांहों में पकड़कर अपने ऊपर पलंग पर गिरा लिया . मेरा खास ... अंग उसकी जाँघों से रगडकर गर्मी पैदा कर रहा था. मगर मैंने महसूस किया की वह मेरे अंग से बच रही थी. उसे अपने आप से अलग कर रही थी क्योंकि वह अपने पति की मदद करना चाहती थी, खुद कम चांस ले रही थी और अपने पति को ज्यादा अवसर दे रही थी. हमारे देश की नारियों को इसीलिए तो महान कहा गया है , चाहे वो किसी भी हालत में रहें, कितनी भी विपरीत परिस्थितियों में क्यों न रहें लेकिन हर हाल में अपने पति को ही तवज्जो देती हैं. विनीता भी अपना फर्ज पूरा कर रही थी. वह जानती थी कि मैं नया लड़का हूँ और तुरंत उस पर हावी हकर ठंडा हियो सकता हूँ, उस स्थिति में उसका पति तो प्यासा का प्यासा ही रहा जाता न , इसीलिए उसने मुझे उस कहास स्थान से अपने ऊपर से हटा दिया था और वहाँ पर विजय चोधरी एडजस्ट हो गया था. वह मेरे... अंग को बड़े ही प्यार और हसरत भरे अंदाज में निहार रहा था. वह बिलकुल दीवानों जैसी हालत में था और चाहता था कि मैं उसे सहयोग करू. और मैंने वही किया भी. मैं उसके लिए समर्पित हो गया था. और वह उस खास अंग को चूम रहा था , किसी मनचले बच्चे की तरह अपने प्रिय खिलौने से खेल रहा था. मैंने भी उसे खेलने दिया . जब वह गर्म हो गया तो उत्तेजना के कारण उसका संवेदनशील अंग भी थोड़ा सा सख्त होने लगा. अब बारी थी विनीता की. विनीता ने उसको अपने हाथों से सहयोग करना शुरू कर दिया . कुछ ही देर में वह चारों खाने चित्त हो गया. तब जाकर हम सभी ने राहत की सांस ली. विजय चोधरी खुश दिखाई दे रहा था. संतुष्ट होने के बाद बोला-
- बहुत दिनों के बाद तुम दोनों ने मुझे सम्पूर्ण संतुष्टि दी है. आज मैं बहुत खुश हूँ. मैं जानता हूँ कि मैं विनीता को बिस्तर पर वो सुख संतुश्तु नहीं प्रदान कर पाता जिसकी इस उम्र में जरूरत होती है. मगर मैं अपने किसी भी कार्य या वचन से विनीता को कभी दुःख नहीं दूंगा. जुनैब अच्छा लड़का है . तुम्हारी उम्र का भी है. यह भी बिलकुल फ्रेश है और तुम भी अभी तक कुंवारी हो, अनछुई कली हो. अगर जुनैब तुम्हें कलीसे फूल बना सके और समय समय पर तुम्हारे यौवन के गुलशन की खुशबु सूंघता रहे , मतवाले भँवरे की तरह गुनगुनाता , घूमता रहे तो मुझे कोई ऐतराज नहीं है, बल्कि मैं तो खुश हो जाउंगा . और इसके बदले जुनैब जो भी चाहता है, मैं हर वो चाहत पूरी करने के लिए तैयार हूँ. यह खुशियों का सौदा है. किसी पर किसी तरह की कोई जबरदस्ती नहीं है. मैं अपनी खुशी से अपनी पत्नी को यह आजादी दे रहा हूँ कि वह जुनैब के साथ अपनी जिस्मानी जरूरतों को पूरा कर सकती है और जुनैब अगर चाहे तो खुशी -खुशी इस अपोरच्युनिटी का लाभ उठा सकता है. अगर इसके लिए किसीको कोई भी कीमत चाहिए तो उसे चुकाने का काम मेरा है. क्योंकि इस सबमे सबसे कमजोर कड़ी मैं ही हूँ. मेरे ही कारण तुम सबको ये तकलीफें उठानी पड़ रही हैं.
विनीता- आप ऐसा क्यों सोचते हैं ? अगर आप चाहते हैं कि आप किसी लड़के के साथ ओपन आपको ज्यादा कम्फर्टेबल महसूस करते हैं तो इसमें मुझे कोई आपत्ति नहीं है. सिर्फ मेरी सहमति हासिल करने के लिए अगर आप मुझे जुनैब या अन्य किसी गैर मर्द की बांहों में डालना चाहते हैं तो ये गलत है. ऐसा मत कीजिये प्लीज.मैं आपके प्रति वफादार रहकर भी आपके इस काम में आपका साथ दे सकती हूँ. अगर मैं जीवन भर भी किसी मर्द के साथ जिस्मानी ताल्लुक नहीं बनाऊं , तो भी ज़िंदा रह सकती हूँ. जीने के लिए यही सब कुछ तो नहीं होता. इससे आगे भी दुनिया है. इससे आगे और भि८ बहुत से काम हैं. मैं आपकी पत्नीव्रता बनकर भी जिंदगी काट सकती हूँ. सिर्फ आपका चेहरा देखने भर से ही मुझे अपार सुख मिल जाता है. कम से कम मेरे सर पर छत तो है. आपका साया तो है, मैं कुंवारी तो नहीं हूँ, विधवा तो नहीं हूँ.
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