भाग-४३
तुम इसके साथ जिस्मानी सम्बन्ध नहीं बनाना चाहती तो मैं जिद नहीं करता, दवाब नहीं डालता, आग्रह भी नहीं करता. तुम्हें ध्यान होगा मैंने पहले ही ये स्पष्ट कर दिया था की अगर सभी पक्षों को कोई ऐतराज न हो तो ये सम्बन्ध बनाए जा सकते हैं. किसी को नाराज करके या दवाब में लेकर नहीं.
सलमा- इसका मतलब वह लड़की भी बहुत अच्छी थी. एक नपुंस क की पत्नी होकर भी अगर वह इस तरह की भावना दिकाह सकती है तो इसे लाजवाब ही कहा जायेगा न . मैंने तो कभी ऐसी लड़की के बारे में सुना नहीं था. हाँ , फिल्मों में सुना अवश्य था . मैं भी उस लड़की से मिलना चाहूंगी . मुझे हार्दिक खुशी होगी . मैंने कभी इस तरह की बात किसीके मुख से नहीं सुनी. वह लेडी तो दर्शनीय है, वन्दनीय है. मैं मिलना चाहूंगी उससे . और बेचारी अगर अभी तक प्यासी हो. तुम्हारे मिलन के लिए तरस रही हो तो उसकी यह तड़प भी ठीक कर देना , उसको भी थोडा सा सुख डे देना. यह शरीर तो मिट्टी का है और आखिर में इसे मिट्टी में ही मिल जाना है. तब क्यों न हजम इसका सही उपयोग करें. अगर इससे उस अभागी विनीता को सुख -संतुष्टि मिलती है तो तुम्हारा क्या घिसता है ? तुम्हें क्या परेशानी होती है. किअरो न बिंदास. विनीता भी राजी , उसका पति विजय चोधरी भी राजी , इधर मैं भी राजी तब ऐतराज किसको है ? सब कुछ तो फिट है न .
जुनैब- मुझे सब समझ में आता है, तुम लोग ऐसी होती हो की इम्तिहान लेने भर के लिए तो कुछ भी बोलोगी मगर जब सच का सामना होगा तो पीछे हट जाओगी .
सलमा- रहने भी दो, क्या रखा है इन बातों में ? असलियत आज भी यही है स्त्री ही आखिर में क्षमा करती है. वही सब्र करती है. वही अपने मन को मारती है, जैसा उस समय विनीता ने किया. वह तुम्हारे साथ अगर नग्न थी और तुम्हें किस कर रही थी, अपने नग्न बदन को तुम्हारे नग्न बदन से रगड रही थी तो सिर्फ इसलिए क्योंकि वह अपने पति को चाहती थी, उससे बेपनाह मोहब्बत करती थी, उसकी इज्जत का भी उसने ख्याल किया, उसे शर्मिन्दा होने से बचाया. जबकि वह कामोत्तेजना की आग में जल रही थी. अगर चाहती तो तुरंत अपने जिस्म की गर्मी को शांत कर सकती थी. मगर वह जानती थी की उसके पति को मर्दों के अंग को चूमना -सहलाना , उससे खिलवाड करना अच्छा लगता है इसलिए उसने पहले अपने पति को ही खुश किया और जब उसकी बारी आई तो वह त्याग कर बैठी. तुमने भी मजा लियी जैसा भी लिया. विजय चोधरी ने भी अपने मन के अरमान निकाल लिए . अब बचा कौन? सिर्फ अकेली विनीता . अब आगे बताओ तो मैं टिप्पणी करूंगी . आगे क्या हुआ ? तुमने उसे साथ सेक्स किया या नहीं ? तुम्हारे बताने के आधार पर ही मैं कोई राय बना पाउंगी .
जुनैब- बहुत उतावली हो रही हो. जब प्यार किया है तो भरोसा भी करो,. दिल दिया है तो थोड़ा सा समय भियो दो. ये दोनों भी चाहिए. तभी प्यार का असली मजा ले पाओगी .
सलमा- तुम्हारे साथ इश्क करके तो मैं फंस गयी हूँ ऐसा लगता है. प्यार का नाम लेकर कुछ न कुछ डिमांड करते ही रहते हो. अगर कोई डिमांड पूरी नहीं हुई तो आरोपों की बौछार कर देते हो .चलिए मैं आराम से सुनती हूँ. मुझे भी सुहागरात की कोई जल्दी है, तुम भी पूरी तरह निश्चिन्त दिखाई देते हो . हम लोग बाद में मजा लेंगे , पहले दुनिआदारी ने कैसे मजे लिए और कौन किस तरह के रिलेशन में आनंद उतहा रहा है, उसकी जानकारी ले लें, इससे हमें भी सम्बन्ध बनाने में आसानी होगी , हमें भी मजा मिलेगा .
जुनैब- ठीक है, बताता हूँ. उस वक्त वहाँ का माहौल काफी भावुक हो चुका था. विनीता के साथ -साथ उसका पति भी लज्जित सा, टूटा सा नजर आ रहा था. तब वहाँ के गंभीर माहौल को मैंने संभाला . मैं बोला-
- अरे जाने भी दो. जो हुआ सो हुआ. किसी ने किसी का धन तो नहीं चुरा लिया, गला तो नहीं काट दिया, किसी ने कोई ऐसा काम नहीं किया जिससे देश द्रोह की बू आती हो. यह अपनी -अपनी खुशी की बात है, मेरी तो ऐसी कोई इच्छा नहीं है की मुझे कुछ करना ही है. मैं तो सीधा लड़का हूँ. आप लोगों को मेरी उपस्थिति ने खुशी दिलाई इसके लिए खुश हूँ. मैं होटल चलता हूँ. घर जाने से पहले कोशिश करूँगा आप लोगों से मिलने की.
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