Thursday, June 23, 2011

भाग-५२

जाने ऐसा क्या कर दिया है मुझ पर , मैं अब दीवानी से भी ज्यादा दीवानी हो गयी हूँ. एहसास से भी ज्यादा एहसास करने लगी हूँ, दिल में इस तरह के खयालात उभरते हैं जैसे कि मैं इस दुनिया की नहीं बल्कि किसी दूसरी दुनिया की हो गयी हूँ. कभी लगता है जैसे कि हवा में उड़ रही हूँ. और अचानक किसी ने मुझे आकाश से नीचे गिरा दिया गया है. कभी लगता है जैसे मैं कोई सपना देख रही हूँ . सपने में तुम हो , मैं हूँ. हम दोनों की प्यारी सी एल दुनिया है और हम लोग मिलने ही वाले हैं कि फिर आँख खुल जाते हैं और सब कुछ खत्म हो जाता है. ना जाने क्यों ये सब मेरे साथ ही क्यों हो रहा है ? ये सपना या हकीकत है ? कम से कम इतना तो बताओ , मुझे ये सब क्यों हो रहा है . आखिर ये ऐसा जूनून मेरे सिर पाकर कैसे सवार हो गया ? मुझे इतना बतादो तभी मैं तुम्हारे बिना रात भर जी पाउंगी , वरना कल का सूरज देखना मेरे नसीब में नहीं होगा.

सलमा- वाह. ऐसी भी दीवानी है दुनिया में. मैंने कभी सोचा भी नहीं कि लोग इस तरह के भी हो सकते हैं . इस मामले में तुम खुशनसीब हो जुनैब. और एक मैं हूँ. मैंने तो तुम्हारे प्यार को समझन में भी इतना समय लगा दिया . इसीको कहते हैं चिराग तले अन्धेरा . बेचारी विनीता की विनती को तुमने स्वीकार किया या नहीं ? कहीं वह ऐसे ही तो नहीं तडपती रही ?

जुनैब- मैं क्या कहता ? मैं तो मजबूर था, उलझा हुआ . मैंने अगर ना की होती टॉप वह सचमुच अआत्म्हात्या कर लेती और हाँ करती तो उसी वक्त मेरे साथ बलात्कार कर डालती. और पहली बार ऐसा होता कि किसी लड़की ने एक लड़की कि इज्जत लूट्ली है.

सलमा- हा हा हा ... क्या बात करते हो जुनैब. बात बनाना ती कोई तुमसे सीखे, इस मामले में तुम गज़ब के माहिर हो. लगता है तुम ऐसे लोगों के साथ में रहरहकर मोहब्बत का हर रंग सीख गए हो. अब समजह में आया कि असली बात क्या है ? तभी तुम इतनी आसानी से प्यार का इजहार कर देते हो. अगर इन बातों को तुम्हारी जगह पर कोई दूसरा कहता तो मुझे लगता कि वह बनावटी बातें कर रहा है. मगर तुम्हारे मामले में इसका नहीं है. तुम सबसे जुदा हो, सबसे कहास हो और तुम्हारी हर बात में जादू छिपा होता है. उसू जादू से मुझे वश में कर लिया है.और उस विनीता पर भी कुछ इसी तरह का जादू किया होगा . ये विद्या तुमने कहाँ से सीखी है ?

जुनैब- इतना बड़ा जादूगर भी नहीं हूँ जितनी कि तुम तारीफ़ कर रही हो. मुझे क्लागता है जादू तो हर जगह मुझ ०पर किया जाता है, मैं ठहरा बातों का भूखा , अदाओं का भूखा. जलवों का भूखा . और इस सबमे तो तुम लोगों की महारत हासिल होती ही है. न जाने कब मेरे दिल को छीन लेती हो पता ही नहीं चलता. तुमने तो कमाल ही कर दिया था, जिस वक्त मैंने तुम्हें देखा तभी तुमने मुझे सैदाई बना डाला था. मैं ओपन ऊपर से नियंत्रण खो चुका था . तुम्हें देखकर लगा जैसे मुझे कोई सदियों पहले बिछडा साथी मिल गया है. मैं तुम्हें पाने के लिए तरस गया था. तुमने कितने नखरे दिखाए हैं तब जाकर मुझे मिल पाई हो. अभी भी तुम्हारा ड्रामा खत्म ही नहीं हो रहा है. जब भी सुहागरात मानने का टाइम आता है तभी मुझे बातों में लगा देते हो . कभी कहती हो ये कहानी सुनाओ , कभी वो कहानी सुनाओ .

सलमा- अच्छा जी, हामारा ही जूता , हामारा ही इस्र. मैंने कहाँ रोका है, मैं तो आपकी खिदमत में हूँ जो चाहो सो करो. मैंने कब ऐतराज जताया है. तुम मालिक हो. जो चाहो करो.

जुनैब- तो इतनी दूर क्यों हो ? अब तो अगर बाल भर का फर्क हो तब भी मुझे सदियों जैसा फर्क दिखने लगता है. मैं चाहता हूँ कि तुम्हें अपने सीने में बसा लूं, तुम्हें अपना बना लूं.

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