भाग-३६
सलमा- सब नहीं, ज्यादा झूठ मत बोलिए. इतना ज्यादा झूठ बोलना भी अच्छी बात नहीं है,. मैं जानती हूँ की सिगरेट पीने से कैंसर हो सकता है, इसके बावजूद भी मैंने सिगरेट पीनी शुरू कर दी थी. इसको कहते हैं की क्या होता है शौक . यह नशा भी ऐसी चीज है जिस पर हावी हुआ , हो ही जाता है. एक बार जिसको नशे की लत लग गयी , फिर वह जल्दी छोड़ नहीं पाता .
जुनैब- हाँ, इस बात को तो मैंने भी महसूस किया है. मैं ऐसे बहुत से लोगों को जानता हूँ जिन्होंने एक बार नशा करना शुरू किया तो वे कभी भूल ही नहीं पाए. शराब और सिगरेट के अलावा ड्रग्स भी ऐसा ही खतरनाक नशा होता है. भले ही आज हम सहाक या मौज के लिए ये सब कर रहे हैं मगर कल ये हमारे लिए जानलेवा हो सकता है.सिगरेट और शराब से गुर्दे खराब हो सकते हैं. कैंसर हो सकता है. यहाँ तक की और भी बहुत सारी बीमारियाँ घर कर सकती हैं. यही बात मैंने एक दिन अपने खास दोस्त को बताई तो जानती हो दोस्त क्या बोलता था ? कहता था की जब कुछ खायेंगे -पियेंगे ही नहीं तो फिर जीकर क्या करेंगे ? यह बात भी महत्वपूर्ण है न .
सलमा- हाँ , बात में दम है. इसका मतलब ये है की जब तक जिंदगी है , जब तक जवानी है तब तक के लिए मौज मस्ती से मुख नहीं मोडना चाहिए. जब भी मका मिले इस जवानी का रस चख लेना चाहिए. ये चीजें लाइफ में बार- बार नहीं आती हैं. एक बार जवानी ढल भी गयी तो दुबारा नहीं आती. सिर्फ यादें रह जाती हैं .
जुनैब- उन्हीं यादों में तो रंग भरना है, उनको और भी ताजा, और हसीं बनाना है, आज की हमारी सुहागरात ऐसी होनी चाहिए , जिसे याद करके हम बुढापे में भी मस्त हो सकें, रंगीन हो सकें. देखो, अब हम थोड़ा सा ध्यान इस फिल्म पर देते हैं. कितनी उत्तेजक और ओपन फिल्म है. अगर हमारी जगह पर कोई दूसरा व्यक्ति होता तो अब तक कब का स्खलित हो चुका होता. इतने गर्म माहौल में भी मैंने अपने आपको संभाल रखा है. मैं और तुम बिलकुल नग्न हैं, आपस में हमारे जिस्म भी रगद रहे हैं, इस सबके बावजूद भी यह देखिये की हम संयमित हैं.
सलमा- हैं नहीं थे. अब तक तो भले ही हमने अपने आपको रोके हुआ था , लेकिन अब मैं बहकने लगी हूँ. मेरा अपने आपसे काबू हटने लगा है. अब मैं बेकाबू होने लगी हूँ. दिल पर सांप से लोट रहे हैं. ये सांप कहीं मेरी जान न निकाल लें. उससे पहले तुम इस बदन की सारी कड़वाहट को निकाल दो. इसमें मीठा रस घोलदो . जब तक यौवन रस नहीं छलकेगा तब तक तब तक उसका स्वाद पता नहीं लगेगा. और जब तक जवानी का भरपूर स्वाद नहीं लेलेते तब तक चैन किसे मिलेगा .
जुनैब - मैं तुम्हारी भावनाओं को समझता हूँ, महसूस करता हूँ, मैं खुद भी तो यही चाहता हूँ, मैं भी इस हुस्न के सागर में डूब जाना चाहता हूँ. इसमें जब तक डूब नहीं जाता तब तक चैन नहीं आएगा . जिस तरह इस फिल्म का हीरो अपनी दोस्त की यौवन घाटी में उतर रहा है, मैं भी उसी तरह उतरना चाहता हूँ.
सलमा - तुम्हें रोकता कौन है, टोकता कौन है ? तुम्हें रोकने -टोकने वाला कोई नहीं है. तुम बिंदास अपने मन की इच्छाओं को पूरा कर सकते हो. मैं तो गुलाम ठहरी. जैसा आदेश करोगे,उसी का हुक्म बजाउंगी.
जुनैब- तुम क्या हो, ये तुम्हें भी नहीं मालूम. मैं तुम पर अपनी जान छिडकता हूँ, तुम्हें अपनी समझता हूँ. आज तो कह दिया है, कल से इस तारह के शब्द हरगिज इस्तेमाल नहीं करना. तुम तो रानी हो मेरे दिल की.
सलमा- और तुम मेरी राजा हो. तुमने मुझे स्पर्श करके मेरे दिल के तारों को झंकृत कर दिया है. अब मैं उस स्टेज पर आ गयी हूँ की तुम्हारे बिना जीने की कल्पना भी नहीं कर सकती. यह महज भावुकता भर नहीं है. बल्कि ऐसी हकीकत है जिसे नकारा नहीं जा सकता . अगर भूल से भी कभी तुम मुझसे दूर हुए तो अपनी सलाम की लाश पाओगे .
जुनैब- छी. छी पावन मिलन की इस बेला में किस तारह की बात करती हो. आज तो प्यार की बातें होनी चाहिए . मोहब्बत की बातें होनी चाहिए . ऐसे मौकों पर भी अगर तुम इस तारह की बेकार की बातें करोगी तो कैसे चलेगा . इस फिल्म से भी तो कुछ सबक लो. देखो किस तरह हीरोइन मजे के साथ प्रेम क्रीडा का सुख भोग रही है.
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