भाग-३२
मुझसे ज्यादा वह समझ रही थी. उसने थोड़ी सी दरियादिली दिखाते हुए मुझे अपने गले से लगा लिया. उससे मिलते समय मुझे महसूस हुआ जैसे कि हम दोनों की जोड़ी बिलकुल फिट थी जबकि चोधरी के साथ उसकी जोड़ी ज़रा भी अच्छी नहीं लग रही थी. हमारा परिचय कराने के बाद विजय चोधरी थोड़ी देर के लिए अलग हुआ तो उस महिला ने अपनी बाँहें मेरी तरफ फैलादी , मैं झिझक रहा था , उस झिझक को दूर करने के लिए वह बोली-
- अरे देख क्या रहे हो , आओ न. मेरी बांहों में समा जाओ. तुम्हें लगता है कि यह बुड्ढा मेरी तरसती जवानी को भला क्या सुकून दे पायेगा ? तुम मेरी उम्र के हो. मैं और तुम जी भरके प्यार करेंगे , लेकिन उससे पहले तुम्हें चोधरी को थोडा सा सुख देना होगा . अगर चोधरी साहब खुश तो समझो कि हम भी खुश , उसके बाद तुम मेरे साथ जो भी करोगे , उसे कोई ऐतराज नहीं होगा। दरअसल , वह दयालु व्यक्ति है, सीधा है, ईएमान्दार है । कभी किसीको तकलीफ नहीं देता। यहाँ तक कि अगर कोई चींटी भी उसके क़दमों के नीचे आ जाए तो वह विचलित हो जाता है। मगर उसको एक ही आदत गलत लग गयी है। वो ये कि तुम जैसे चिकने लड़कों को देखकर वह बेकाबू हो जाता है। उन लड़कों के साथ प्यार करने के लिए विचलित हो जाता है। वह इतना ज्यादा भावुक है कि अगर उसको मन पसंद लड़का नहीं मिला तो वह रोने लगता है। जब उसने तुम्हें देखा तो उसने मुझे एक मैसेज किया था। शायद तुमने उसके सामने लड़कियों में दिलचस्पी दिखाई थी, इसलिए उसने लिखा है कि मैं तुम्हारे साथ सम्बन्ध बनाने के लिए राजी हो जाऊं, मुझे भी कोई फर्क नहीं पड़ता है। इससे पहले मेरी तो शादी कहीं भी नहीं हुई थी मगर मेरे पति यानी विजय चोधरी दो शादियाँ कर चुके हैं। विचारों में भिन्नता होने के कारण वे दोनों ही इनसे तलाक ले चुकी हैं।, मगर मैं एडजस्ट कर लिया है। मैं कभी भी इनसे तलाक लेने वाली नहीं हूँ। मैं इन्हें खूब प्यार दूंगी और खूब ऐश करूंगी ।
जुनैब- आप तो इन्हें खूब प्यार कर सकती हैं मगर उसके बदले कक्या आपको कुछ नहीं चाहिए ?
- चाहिए न , उसके लिए तुम जैसे कितने ही मौजूहै। मेरे पति न मुझसे यह बात साफ़ कर दी है कि मैं उसके सामने भी मनपसंद मर्द के साथ अन्तरंग सम्बन्ध बना सकती हूँ। हांलाकि अभी तक ऐसा कभी हुआ नहीं है। मगर अब होने वाला है। मेरी सुहागरात आअज तुम्हारे साथ होगी , वो भी मेरे ही पति के साथ। मेरे पति न ही यह रास्ता निकाला है, जबसे मेरी शादी हुयी है, तब से लेकर आज तक मैंने कभी भी असली सुख नहीं भोगा। मेरा जिस्म तड़प रहा है। अरमान सुलग रहे हैं। आज मेरी ये सब इच्छाएं पूरी होने जा रही हैं।
-मगर ऐसा हो कैसे सकता है ?कोई इंसान अपनी पत्नी को किसी दुसरे की बांहों में कैसे देख सकता है। यहाँ तक कि उसे किसी गैर मर्द के साथ रति क्रिया करते कैसे देख सकता है। यह बात मैंने न तो कभी सुनी है और न देखी है। हाँ ये अलग बात है कि फिल्मों में ऐसी बातें अक्सर आती-जाती रहती हैं। अच्छा , पॉइंट पर आइये । क्या आपका पति आपको बिस्तर पर संतुष्ट नहीं कर सकता ?
- सच तो वही है जो तुम सोच रहे हो। उसने मुझसे भी पहले ही कह दिया था कि वे मुझे शारीरिक रूप से संतुष्ट नहीं कर सकते। इसके बावजूद अगर मैंने इनके साथ शादी की है तो इसका कारण ये है कि मैं बहुत गरीब घर से हूँ। इतना तो मैं भी जानती हूँ कि सबको पूरा जहाँ नहीं मिलता । किसीको जमीं तो किसीको आसमान नहीं मिलता। पहले नाभि से ऊपर भूख रहती थी अब नाभि के नीचे की भूख सताती है।
जुनैब- नाभि के नीचे की भूख को शांत करने के लिए तो हजारों लाखों मिल जायेंगे मगर पेट की भूख को शांत करना ही मुश्किल है।
- ठीक कह्ते हो । हमारे परिवार न भी बड़े कठिन दिन निकाले हैं। हमारी शादी को हुए एक हफ्ता हुआ है मगर अभी तक हम दोनों के बीच पति-पत्नी जैसे सम्बन्ध नहीं बन पाए हैं। तुम आये तो आस बंधी है, क्या तुम मेरी सहायता करोगे या मैं ऐसे ही तरसती रहूंगी । एक -एक बूँद की आस में रोटी रहूंगी ।
जुनैब- मैं अभी बच्चा हूँ, मैंने तो कभी भी ये सब काम नहीं किये। मैं जानता कि मैं तुम्हारी इस सम्बन्ध में क्या और कैसे मदद कर सकता हूँ। मुझे लगता है, आप लोगों न गलत आदमी को चुन लिया है। कहीं ऐसा तो नहीं कि मैं आखिर में तुम्हारे किसी काम के लायक ही न रहूँ ?
- विजय चोधरी का तो पता नहीं मगर जहां तक मेरा सवाल है , मैं जान ही गयी हूँ कि तुम ही मेरे सपनों के राजा हो,। जब से मैंने जवानी की दहलीज पर कदम रखा है, तभी से मैंने तुम्हारे जैसे लड़के की आरजू की थी। तुम्हारे जैसे लड़के के सपने ही दिन रात देखा करती थी। तुम राजा - महाराजा लगते हो। तुम्हारी सूरत में जबरदस्त आकर्षण है।
Saturday, June 4, 2011
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