Tuesday, June 7, 2011

भाग-३५
सलमा- सच में तुम बहुत चालू हो. मैं तो पहले यही जानती थी कि तुम बड़े सीधे सादे हो. मगर अब समझ में आ रहा है, पूरे राजनीतिक व्यक्ति लगते हो, अनुभवी भी हो है न यही बात . तभी तो ऐसे सवाल कर रहे हो.
जुनैब- अब सीधे -सीधे सच पर आओ, जब मैंने सहेली वाली चोरी पकड़ ली है तो इस तरह की बात करते हो .अब बोलो न कितनी सहेलियों के साथ तुमने कितने गुलछर्रे उडाये हैं ?
सलमा- सब कुछ जानकार ही दम लोगे . हाँ जी, नेता के बेटे हो तो नेतागीरी तो खून में रहेगी ही .मुझसे किउच न कुछ निकलवाकर ही दम लोगे. जब तक चैन से नहीं बैठोगे . टीवी रिपोर्टर की तरह कुछ न कुछ जानकार ही मानोगे .चलो बताती हूँ, तुम्हारे कलेजे पर भी थोड़ी सी ठंडक पड़ जायेगी . मेरे साथ में तीन लड़कियां ज्यादा खेलती थीं, ये कोई एक साल पहले की बात है. जब हम तीनों सहेली घूमने गयीं तो शाम के समय रेशमा नाम की लड़की ने अचानक सिगरेट सुल्गाली और उसमे सुट्टा मारते हुए बोली -
- आज हम तीनों इसका स्वाद लेंगी, फिल्मों में जिस तरह हीरोइन सुट्टे पर सुट्टा लगाकर मौज लेती हैं , उसी तरह हमें भी आनंद लेना है, हममें से जो कोई सुट्टा नहीं मारेगी समझ लो वही हमारी दोस्त नहीं है है. उसीसे बातचीत बंद कर दी जायेगी . इसलिए इनकार करने से पहले ये जरूर सोच लेना कि दोस्ती चाहिए तो सिगरेट पीनी होगी .
जुनैब- अरे ये क्या दादागीरी हुयी ? हो सकता है रेशमा को सिगरेट पीने की आदत होगी और वह सोचती होगी कि तुम लोगों के सामने पीयेगी तो तुम यह राज किसी न किसी पर उजागर जरूर कर दोगी . और तुम भी उसका साथ देती तो तुम किसीको बताने वाली नहीं थीं, इसीलिए उन्होंने कहा होगा और शौक -शौक में तुम लोगों ने भी मान लिया होगा .
सलमा- बिलकुल यही हुआ. तुम तो ठहरे अंतर्यामी, सब कुछ जान लेते हो. हाँ, सच तो यही है. ऐसा ही हुआ था. हम सब मान गए. हमने कहाँ सोचा था कि ऐसा कुछ हो जाएगा . हमारे दिमाग में तो यही सब था कि इससे कुछ नहीं होगा. थोड़ी देर तक तो धुंए ने परेशान किया मगर फिर सब कुछ ठीक हो गया. यानि कि मैंने सुट्टे पर सुट्टे मारने शुरू कर दिए. मुझे पहले तो सिगरेट की गंध तक भी नहीं सुहाती थी लेकिन जब एक बार यह सिलसिला शुरू हुआ तो हमें भी अच्छा लगने लगा . मगर अगला दिन अलग था. रेशमा हम सबसे बड़ी थी और उसीने एक ऐसा कार्य कर दिया जिससे कि हम सबके तो रोंगटे ही खड़े हो गए.
जुनैब- भला ऐसा भी क्या था जिसने ये सब कर दिया . ऐसा कौन सा हाल खराब कर दिया ?
सलमा- मैंने देखा कि अपने घर पर रेशमा एक लड़की के गालों को चूम रही थी. वह द्रश्य देखकर मैं उसके कमरे के पास खड़ी हो गयी, मैं उसको खिडकी से झाँक रही थी. ववाह जल्दबाजी में खिडकी को ठीक तरह से बंद करना भूल गयी थी. दूसरी लड़की सिगरेट का सुट्टा मारती थी और फिर धुएं को इस तरह से रेशमा के मुंह में धकेलती थी जैसे कि पम्प से हवा भर रही हो.
जुनैब- अच्छा , इसका मतलब तुमने भी खूब मजे लिए हैं. कम नहीं हो तुम भी. तुम भी कमाल की चीज हो. तुमने सारी चीजें ठीक तरह से देख ली हैं. सब मौज करली हैं.
सलमा- सब नहीं, ज्यादा झूठ मत बोलिए. इतना ज्यादा झूठ बोलना भी अच्छी बात नहीं है,. मैं जानती हूँ की सिगरेट पीने से कैंसर हो सकता है, इसके बावजूद भी मैंने सिगरेट पीनी शुरू कर दी थी. इसको कहते हैं की क्या होता है शौक . यह नशा भी ऐसी चीज है जिस पर हावी हुआ , हो ही जाता है. एक बार जिसको नशे की लत लग गयी , फिर वह जल्दी छोड़ नहीं पाता .
जुनैब- हाँ, इस बात को तो मैंने भी महसूस किया है. मैं ऐसे बहुत से लोगों को जानता हूँ जिन्होंने एक बार नशा करना शुरू किया तो वे कभी भूल ही नहीं पाए. शराब और सिगरेट के अलावा ड्रग्स भी ऐसा ही खतरनाक नशा होता है. भले ही आज हम सहाक या मौज के लिए ये सब कर रहे हैं मगर कल ये हमारे लिए जानलेवा हो सकता है.

No comments: