लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आम आदमी ही नहीं मीडिया भी सुरक्षित नहीं है। सीएमओ हत्याकांड और डॉ. सचान की मौत की खबर का पर्दाफाश करने वाले आईबीएन7 संवाददाता शलभमणि त्रिपाठी पर पुलिस अधिकारी ने हमला किया और हजरतगंज ऑफिस से उठा ले गए। जहां लड़की के साथ जोड़कर केस में घसीटने की कोशिश की गई।
आईबीएन7 के पत्रकार पर हमले को लेकर देशभर में निंदा हो रही है। देश की तमाम पार्टियां इसे यूपी सरकार की तानाशाही बता रही है। चाहे कांग्रेस, हो या बीजेपी सभी ने मीडिया पर हमले की निंदा की है। वहीं मायावती ने सूबे में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बैठक की और इस बैठक में अपने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मीडिया के साथ बदसलूकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मीडिया के साथ बदसलूकी करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
शलभ के मुताबिक पुलिस ने उनके साथ मारपीट और गालीगलौच की। वहीं, रिपोर्ट मनोज राजन त्रिपाठी को पुलिस ने अपराधियों की तरह दौड़ाया। वो अपने आप को बचाने में कामयाब रहे और मौके पर मीडिया कर्मियों को जमा करने में सफल रहे। जिसके बाद पत्रकारों के दबाव में पुलिस अधिकारियों को शलभ को छोड़ना पड़ा। ये अधिकारी हैं हजरतगंज थाने के सीओ अनूप कुमार और एएसपी बी पी अशोक।
दूसरी तरफ लखनऊ में मीडिया पर हुए इस हमले के खिलाफ पत्रकार बीती रात सड़क पर उतर आए। पत्रकारों ने मुख्यमंत्री निवास के आगे प्रदर्शन किया जिसके बाद दबाव में आकर यूपी सरकार ने दोषी अधिकारियों को सस्पेंड कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।
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