नई दिल्ली. इसी साल मई में पाकिस्तान के ऐबटाबाद में एक अमेरिकी ऑपरेशन में मारे गए कुख्यात आतंकवादी ओसामा बिन लादेन अपनी पहली पत्नी नजवा बिन लादेन को सबसे ज़्यादा पसंद करता था। इसकी वजह थी कि ओसामा की तमाम बीवियों के बीच नजवा ही ऐसी अकेली महिला थी, जिसे लादेन शादी से पहले से ही जानता था और दोनों एक-दूसरे से प्यार करते थे। लादेन को नजवा से तब मोहब्बत हुई जब वह १७ और नजवा १५ साल की थी। लादेन अपनी दूसरी बीवियों से उनकी शादी के दौरान ही मिला था।
यह खुलासा किया है जान सैसन ने। ‘ग्रोइंग अप बिन लादेन: ओसामाज वाइफ एंड सन टेक अस इनसाइड दिअर सेक्रेट वर्ल्ड’ नाम की सैसन की नई किताब ओसामा बिन लादेन की घरेलू ज़िंदगी के कई राज़ सामने लाती है। सैसन ने इस किताब को नजवा और ओमर लादेन के साथ मिलकर लिखा है। नजवा और उमर ने सैसन को दिए गए कई इंटरव्यू में तमाम खुलासे किए।
सैसन का दावा है कि नजवा ओसामा की चचेरी बहन थी, जिसे जीवन भर संघर्ष करना पड़ा खासकर अफगानिस्तान में उसका जीवन बेहद चुनौतीपूर्ण था।
सैसन का कहना है कि नजवा और ओसामा एक-दूसरे से बहुत ज़्यादा प्यार करते थे और पसंद करते थे। नजवा की मां ओसामा से नजवा की शादी के खिलाफ थीं क्योंकि वह नहीं चाहती थीं कि नजवा शादी के बाद सीरिया छोड़कर सऊदी अरब चली जाए।
सैसन का कहना है कि नजवा को सऊदी अरब में जीवन बिताने के लिए कई तरह के समझौते करने पड़े क्योंकि शादी से पहले तक वह सीरिया में काफी आज़ाद ज़िंदगी जीने की आदी थी।
लेखिका सैसन का दावा है कि नजवा को सऊदी अरब में सबसे ज़्यादा किचन में काम करते वक्त और एक मां के तौर पर तालमेल बिठाने में दिक्कत आई।
किताब में कहा गया है कि नजवा को एक बच्चे के बाद दूसरा बच्चा पैदा करने के लिए मजबूर किया जाता था। साथ ही ओसामा ने बिजली के इस्तेमाल, गैस स्टोव जैसी चीजों के इस्तेमाल पर रोक लगा रखी थी। अफगानिस्तान में उसका जीवन और ज़्यादा मुश्किलों भरा हो गया। शादी से पहले नजवा पेंटिंग बनाती थी और घुड़सवारी, टेनिस, साइकिल चलाना उसके पसंदीदा शौक थे। लेकिन ओसामा की पत्नी के तौर पर उसे इन चीजों को छोड़ना पड़ा।
लेखिका का कहना है कि नजवा फोटोग्राफी की भी शौकीन थी। ओसामा नजवा की फोटोग्राफी पर मिलीजुली प्रतिक्रिया देता था। ओसामा कभी नजवा से कहता था कि वह परिवार और बच्चों की तस्वीरें खींच सकती है। वहीं, कई बार वह नजवा को फोटो लेने से मना करता था।
दोनों की शुरुआती ज़िंदगी काफी स्थिर और शांतिपूर्ण थी। लेकिन 1996 में अफगानिस्तान पहुंचने के बाद दोनों की ज़िंदगी में तेजी से बदलाव आए। नजवा के अफगानिस्तान में बिताए दिनों के बाबत सैसन का कहना है कि वह एक पहाड़ी की चोटी पर पत्थर की झोपड़ी में रहती थी। इसके बाद दोनों एक पूर्व रूसी सैन्य बेस में चले गए जहां बिजली भी नहीं थी। लेकिन सैसन का कहना है कि सबसे अहम बात यह थी कि इतना सब होने के बावजूद नजवा चुप रहीं और अपने बच्चों को एक बेहतर माहौल देने की कोशिश करती रहीं।
ओसामा के बेटे ओमर द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर सैसन ने तोराबोरा की पहाड़ियों पर ओसामा के परिवार द्वारा बिताए गए दिनों का ब्योरा किताब में पेश किया है। तोरा बोरा की पहाड़ियों तक जाने वाला रास्ता कच्चा था और ओमर को यकीन नहीं हो रहा था कि उनकी ज़िंदगी उन्हें ऐसी जगह ले आएगी।
सैसन के मुताबिक ओमर के चचेरे भाई-बहन शानदार घरों में रह रहे थे और बेहतरीन स्कूलों में पढ़ रहे थे। वहीं, ओमर को लगता था कि वह बेहद अमीर बिन लादेन का बेटा होकर एक ऐसी जगह पर ज़िंदगी बिता रहा है, जहां कानून नाम की कोई चीज नहीं थी।
छोटे टोयोटा ट्रक में बैठने के बाद उसे सांस लेने में तकलीफ होती थी और उसके चारों ओर अफगानी लड़ाके रहते थे। उनकी झोपड़ी में वॉशरूम तक नहीं था।
सैसन का यह भी दावा है कि ओसामा का गंभीर रहना और ज्यादातर वक्त खामोशी ओढ़े रहने का अंदाज उसकी पत्नियों को बहुत भाता था। इसके अलावा ओसामा अपनी पत्नियों के नजदीक किसी को भी फटकने नहीं देता था। लादेन की बीवियां पर्दे में रहती थीं।
सैसन इससे पहले दो विवादास्पद किताबें लिख चुकी हैं। इनके नाम हैं-‘प्रिसेंज, अ ट्राईलॉजी ऑन द लाइव्स ऑफ वुमन इन द रॉयल होम्स ऑफ सऊदी अरब’ और ‘रेप ऑफ कुवैत’। इन दोनों किताबों के लिए सैसन को जान से मारने की धमकी मिल चुकी है
Wednesday, June 22, 2011
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