Sunday, June 12, 2011

भाग-३९
अच्छा -खासा मजा आ चुका था. मैं अब अपने आपको आगे की कार्रवाई के लिए मानसिक रूप से तैयार कर चुका था. बाथरूम से जब हम निकले तो मैंने सिर्फ एक तौलिया लपेट रखी थी. विनीता बेहद झीनी नाइटी में थी मैं यह देखकर दंग रह गया कि सामने बिलकुल नग्न अवस्था में विजय चोधरी खडा था. वह अपने मुरझाए हुए अंग को एक्टिव करने की कोशिश कर रहा था. मेरा नाजुक अंग तो भीमकाय रूप धारण कर चुका था. विनीता ने मौके का फायदा उठाकर मेरी तौलिया शरीर से अलग कर दी. अब मेरा अंग दहाड़ने लगा. विनीता मुझसे लिपट गयी. तभी वह आया और प्यार से उस पर हाथ फिराने लगा. उसका सहलाना पहले तो मुझे अजीब लगा मगर जब विनीता ने अपने होठ मेरे दहकते हुए होठों से सटाए तो मैं भी उत्तेजक हो गया. मेरे दिमाग में घंटियाँ सी बज रही थीं, जिस तरह से अचानक तूफ़ान आता है, सब पेड़ - पौधे उलटने -पलटने लगते हैं. लोगों की आवाज सुनाई नहीं देती , ठीक उसी तरह का नजारा वहाँ पर उपस्थित था. मेरे सोचने -विचारने की शक्ति क्षीण हो चुकी थी. मैं वासना के उस तूफ़ान में उलझकर रह गया. न सोच पाता तह, न समझ पाता था. विजय चोधरी अपनी फुल मस्ती में था,. उसकी पत्नी मेरे होठों का दीर्घ चुम्बन ले रही थी, इसका उसे कोई मलाल नहीं था. विनीता भी खुश थी. जब से उसने विजय चोधरी के साथ मजबूरी वश ब्याह रचाया था तभी से लेकर अभी तक उसका कुंवारापन भी नहीं उतर पाया था, वह सुहागरात मनाने की तो छोडिये वहाँ पर उस तरह की कल्पना भी नहीं कर पाई थी, इसलिए जब उसे मेरे जैसे नौजवान का होठों का दीर्घ चुम्बन लेने का अवसर मिला तो वह भी जल बिन तडपती मछली की तरह मुझ पट टूट पडी. मेरा खास अंग अब आपे से बाहर होने लगा. काले नाग की तरह फुँकारने लगा. विजय चोधरी ने आहिस्ता -आहिस्ता उसे पुच्काना शुरू कर दिया . और फिर उसके होठ उसकी तरफ बढ़ने लगे. जब मुझे यह एहसास हुआ की उसके होठों का गीलापन मेरे खास अंग तक पहुँच चुका है तो काम वासना का ज्वालामुखी फटने के लिए बेताब होने लगा . मैंने जैसा कभी सपने में भी नहीं सोचा था, वैसा मेरे सामने प्रत्यक्ष रूप से हो रहा था. मैं उस स्थिति को सहन करने की दशा में नहीं था. मगर क्या करता, उस दम्पति ने मुझे बुरे तरह से जकड रखा था. उसकी पत्नी मेरे होठों को चूस रही थी और उसका पति मेरे उस .... खास .... अंग को. ...
सलमा- इस ... खास अंग में इतना मजा आता है क्या ? देखती हूँ की फिल्म के अंदर भी इसी तरह के सीन भरे पड़े थे.
जुनैब- कुछ न कुछ खास तो होगा ही .... इस ... खास... अंग में . मैंने देखा की विजय चोधरी बावला हुआ जा रहा तह. वह अपने मुख से अजीब तरह की आवाजें निकाल रहा था और मैं सिर्फ सी सी कर सकता था. ... उसके बाद विनीता ने अपने पति के उस ... खास ... अंग पर हाथ फिराना शुरू कर दिया . काफी कोशिश करने के बड भी उसका अंग मुरझाया हुआ था. मैंने देखा की विनीता बड़ी मशक्कत से उसके अंग को सहला रही थी. और विजय भी पूरी ताकत के साथ उसे मजबूत करने की दिशा में कार्यरत था. मगर उन दोनों की मेहनत बेकार जा रही थियो.
सलमा- तो क्या वह बिलकुल नामर्द ही था. उसे किसीने सांडहा ऑइल इस्तेमाल करने की सलाह क्यों नहीं दी. उसकी नस -नस में शक्ति का संचार होने लगता और वह भी अपनी पत्नी को गैरों की बांहों में सौंपने के गुनाह बच सकता था. मैंने तो कई अखबारों में इस बारे में पढ़ा है.सांडहा ऑइल का इस्तेमाल नामर्द से नामर्द को भी फौलाद का बना देता है. जीवन को खुशहाल बना देता है.
जुनैब- हाँ , मैंने भी सुना है ये शारीरिक कमजोरी का अचूक और रामबाण इलाज है. मगर इंसान को उतनी समझ भी तो होनी चाहिए . अगर खुद नहीं जानता तो डॉक्टर की सलाह लेनी चाहियें, अखबार या मैग्जीन देखकर भी इसका अनुसरण किया जा सकता है. खैर, मैं तुम्हें बता रहा था की विजय चोधरी जब अपने उस... अंग को सख्त नहीं कर पाया टॉप उसने अपनी पत्नी की तरफ बड़ी उम्मीद भरी निगाहों से देखा, मानो वे आँखें उससे गुहार कर रही हों, मनुहार कर रही हो. याचना के भाव थे उस द्रष्टि में. विनीता तुरंत सतर्क हो गयी . उसने मुझे बांहों में पकड़कर अपने ऊपर पलंग पर गिरा लिया . मेरा खास ... अंग उसकी जाँघों से रगडकर गर्मी पैदा कर रहा था.

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