Sunday, August 21, 2011

अन्ना को सेना से नहीं निकाला गया"

नई दिल्ली। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे सामाजसेवी अन्ना हजारे पर केंद्र सरकार के भ्रष्टाचार के आरोपों से उन्हें बड़ी राहत मिली है। सूचना के अधिकार के आधार पर मिली जानकारी के आधार पर अन्ना को सेना में रहते कोई सजा नहीं दी गई और न ही उन्हें पद से निकाला गया था।

आरटीआई के आधार पर सेना के दक्षिण एएससी रिकॉर्ड से मिली जानकारी में यह बताया गया है कि अन्ना को कभी सेना से निकाला नहीं गया। 12 सालों की सेवा के बाद उन्हें सम्मान के साथ सेवानिवृत्त किया गया था। ले. कर्नल अरूण कुमार द्वारा दी गई सूचना में बताया गया है कि 14 अप्रेल, 1963 को अन्ना सेना में शामिल हुए थे। महाराष्ट्र के औरंगाबाद में उन्होंने अपना प्रशिक्षण पूरा किया। 16 नवंबर, 1963 को उन्हें बतौर सैनिक गिरफ्तार किया गया। सेवा छोड़ने के समय वे एक सिपाही के पद पर थे। सेवा काल के दौरान उन्हें कोई सजा नहीं दी गई थी। कार्यकाल के दौरान उन्हें पांच पदक मिले थे।

गौरतलब है कि आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष चंद्र अग्रवाल की याचिका के बाद तीन अगस्त को दी गई इस सूचना में यह जानकारी दी गई है। हालांकि अग्रवाल को इस बात से आpर्य है कि केंद्रीय सूचना आयोग के अधिकारी से उनकी बात की जानकारी तिवाड़ी को कैसे हुई। वे मामले की जांच करवाएंगे। उल्लेखनीय है कि तिवाड़ी ने अन्ना पर आरोप लगाया था कि अन्ना पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा था कि उन्हें भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का कोई अधिकार नहीं है।

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