लखनऊ। उत्तर प्रदेश की प्रमुख नदियों में लगातार जलस्तर बढ़ने से कम से कम 11 जिले बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। बाढ़ की वजह से अब तक करीब दो लाख लोग प्रभावित हुए हैं जबकि दो हजार हेक्टेयर से अधिक फसल बर्बाद हो चुकी है। राज्य में घाघरा, शारदा, सरयू, गंगा और यमुना के साथ-साथ रामगंगा, मालन, कोसी, मोहानी व कर्णाली जैसी छोटी नदियां भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। बाढ़ग्रस्त इलाकों में हालात से निपटने के लिए सरकार ने केंद्र से राष्ट्रीय आपदा राहत की मांग की है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के बाराबंकी, गोंडा, बहराइच, फैजाबाद, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, बलिया में घाघरा, शारदा, सरयू, गंगा और राप्ती के उफान पर आने से 200 से ज्यादा तटवर्ती गांव प्रभावित हुए हैं। गोंडा जिले के आपदा अधिकारी मोहम्मद गफ्फार हुमायूं ने शुक्रवार को बताया कि गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 94 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है। जलस्तर में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।
हुमांयू ने कहा कि जिले में बाढ़ से करीब 50 हजार आबादी प्रभावित हुई है। जो गांव पूरी तरह से बाढ़ के पानी से घिर गए हैं, वहां के लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। प्रांतीय सशस्त्र बल (पीएसी) की जवानों को इस काम में लगाया गया है। बहराइच, बाराबंकी, सीतापुर, लखीमपुर खीरी और फैजाबाद जिलों में प्रशासन की तरफ से प्रभावित लोगों को राहत मुहैया कराई जा रही है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के फरु खाबाद, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर और पीलीभीत में गंगा, रामगंगा और कोसी के उफान पर आने से करीब 75 तटवर्ती गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। मुरादाबाद में दिल्ली-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग बाढ़ के पानी में डूबने से पिछले चार दिन से इस पर यातायात ठप्प पड़ा है।
मुरादाबाद के अपर जिलाधिकारी (वित्त) आर.एस मौर्या ने शुक्रवार को बताया कि जिले में कोसी और रामगंगा से 35 गांव प्रभावित हुए हैं। प्रभावित इलाकों में जिला प्रशासन के अधिकारियों को गश्त करने के निर्दश दिए गए हैं।
उधर मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान ज्यादातर हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना व्यक्त की है।
दूसरी तरफ हरिद्वार के लक्षर बांध के टूटने से मुजफ्फरनगर के 40 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। जलमग्न हुए गांवों से लाखों लोगों का पलायन शुरू हो गया है। अभी तक जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ पीड़ितों के लिए कोई भी राहत सामग्री नहीं पहुंचाई गई है। किसानों की मेहनत पर गंगा का कहर इस तरह टूटा कि किसानों को साल भर की फसल और मवेशियों से हाथ धोना पड़ा।
दरअसल, पिछले तीन दिनों से हो रही लगातार बारिश से गंगा का जलस्तर बढ़ गया जिसके चलते हरिद्वार के लक्षर में बना बांध पानी अधिक होने से टूट गया और इसी पानी ने मुजफ्फरनगर के खादर में बसे कई गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। गंगा का पानी इस रफ्तार से आया कि कुछ ही घंटों में चालीस से अधिक गांव और कई हजार बीघा जमीन समुद्र जैसी दिखने लगी।
किसानों ने जलस्तर बढ़ता देख आनन-फानन में गांव से पलायन शुरू कर दिया। किसानों के मकान और मवेशी को गंगा ने अपनी चपेट में ले लिया है। बाढ़ पीड़ित किसानों का कहना है कि अभी तक जिला प्रशासन ने अभी तक न तो कोई राहत सामग्री भेजी है और न ही पानी बढ़ने की कोई चेतावनी ग्रामीणों को दी गई है।
मुजफ्फरनगर जिला प्रशासन के एसडीएम गौरव वर्मा ने बताया की हरिद्वार में लक्षर के पास किसी बांध के टूटने से बाढ़ की स्थिति बनी है और अब वहां से पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। अचानक आई इस बाढ़ से जिले के 40 से अधिक गांव प्रभावित हुए हैं जिन्हें राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।
उन्होंने बताया कि बाढ़ पीड़ितों के लिए पांच बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकलने के लिए पीएसी की फ्लड कम्पनी को बुलाया गया है जो रामराज में ठहरी हुई है। मोटर बोट और बचाव दल शुक्रवार से बाढ़ पीड़ित इलाकों का दौरा करेंगे और गांव में फंसे लोगों को निकालेंगे। बाढ़ पीड़ितों के लिए डॉक्टर की टीमें बनाकर गांव-गांव भेजी जा रही है।
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