बेवफा -६१
प्रो- जिस तरह इलाहाबादी अमरुद की तरह तुम्हारा बदन गदराया हुआ है, उसी तरह तुम्हारी भावनाएं भी गदरा रही है,. मै मादकता के समुन्दर में डूबा ही जा राह हूँ.
सविता- यार के साथ रहोगे तो ऐसे ही मजे उड़ाओगे . तो शाम को अपनी सहेली को बुलाऊ क्या ? डोली नाम है उसका . है भी बिलकुल डोल जैसी ही.
प्रो- उसे बुलाकर क्या करोगी, मै तो तुम्हारे प्रति ही प्रतिबद्ध हूँ.
सविता- उसे एक बार देख तो लों.वह बम का दूसरा नाम है, उसे देखोगे तो रोंगटे खड़े हो जायेंगे . उसका अंग -प्रत्यंग मादकता और सुंदरता का नमूना है. अगर उसके यौवन उभारों को देख लोगे तो बस देखते रह जाओगे.
.उन्हें देखते ही तुम्हारा दबाने का जी चाहेगा. चूमने और यहाँ तक कि चूसने का जी चाहेगा. तुम तो खैर लड़के हो , मेरा भी जी चाहने लगता है .मैंने भी कई बार डोली के यौवन उभारों को सहलाया है, चूमा है.
प्रो- अगर तुम लड़की होकर दूसरी लड़की के यौवन उभारों को को चूमोगी तो तुम्हें क्या मजा मिलेगा ?हाँ, अगर लड़का उनेह्न्द दबाएगा तो बात कुछ और होगी .
सविता- क्या बात करते हो प्यारे प्रोफ़ेसर. उस आनंद को महसूस करके देखिये, कभी अपने पुरुष साथी के गुप्तांग को अपने हाथों में लेकर देखिये, उसे सहलाइये . फिर देखिये क्या आनंद आता है ? लेकिन यह भी ध्यान
रखना कि अपने उसी साथी के गुप्तांग को सहलाना, जिसके साथ तुम्हारे विचार मिलते हों. और ये सब बिलकुल अकेलेपन में करना.
प्रो- क्या बात करती हो ? मैं पुरुष होकर पुरुष साथी के साथ कामक्रीड़ा क्यों करना चाहूँगा ? क्या औरतें मौजूद नहीं हैं ?
सविता- ऐसे तो रोजाना होता ही रहता है लेकिन जब समलेंगिक सम्बन्ध बनाए जाते हैं तो उनका आनंद ही कुछ और आता है. मैं तो भुक्तभोगी हूँ. खुद भोग चुकी हूँ. मौज मस्ती से पीछे नहीं हटती हूँ.
प्रो- तो क्या तुम लेस्बियन हो ?
सविता- नहीं यार. मै पक्की लेस्बियन नहीं हूँ. जब हम दोनों सहेलियां साथ में होती हैं और हमारे आसपास कोई नहीं होता तो ड्रिंक के बाद मस्ती करने की सूझती है. जब कोई मर्द उपलब्ध नहीं होता तो अपना
हाथ जगन्नाथ वाली कहावत आजमा लेते हैं. हमें तो खूब मजा आता है. जब मै उसके यौवन उभारों को चूमती हूँ तो डोली को इतना करंट लगता है कि वह डायरेक्ट मेरी यौवन घाटी का चुम्मा लेती है. ये देखो. ये जो
पार्ट देख रहे हो न, देखो न . तुमने बहुत दिन से इसे देखा भी नहीं है. हाँ, यही है. जब वह इसे चूमती है तो जिस्म से आग सी दहकने लगती है. बदन फटने को बेताब हो जाता है.
प्रो- उसके बाद कैसे मजा वसूलती होंगी , क्योंकि ऐसा करने से तो तुम्हारी काम इच्छाएं भड़क जाती होंगी , और उसके बाद तृप्ति की इच्छा होती होगी ?
सविता- हाँ, तुम ठीक कहते हो. मगर उसके बाद हम जों आनंद उठाते हैं, उसकी कल्पना भी तुम नहीं कर पाओगे. तुम भी इस स्थान परअपनी जीभ फिराकर देखो, उसके बाद महसूस कर पाओगे कि काम सुख का
असली मतलब क्या होता है. सिर्फ ऐसे ही तो मजा नहीं आ जाता कि मै नीचे लेटा , तुम मेरे ऊपर लेट गए और ऊपर नीचे कर लिया . ऐसे पूरा मजा नहीं आ पाता है.
प्रो- इसका मतलब तुम बहुत बड़ी खिलाड़ी हो इस खेल की. मुझे इतना तजुर्बा नहीं है.
सविता- कोई बात नहीं, हमारे साथ रहोगे तो तुम भी उस्ताद बन जाओगे. थोडा झुकिए तो सही , इसे चाटो तो सही.
किरण इस वक्त सूरज को अपनी आपबीती सुना रही थी. वह बता रही थी कि उसे वैश्या व्यवसाय के दौरान कैसे -कैसे लोग मिले और उन्होंने क्या -क्या खास बातें बताई . सूरज ने पूछा -
-तो क्या प्रोफ़ेसर ने सविता के यौवन उभार को चूम लिया ?
किरण- हाँ, तो क्या करता ? जब तुम बिस्तर पर अपने साथी के साथ होते हो तो उसकी सलाह भी माननी पड़ती है. प्रोफ़ेसर ने भी उसके यौवन की गहराइयों में अपनी जीभ प्रवेश करदी .
सूरज- मै भी ऐसे ही करके देखूं क्या ? मेरा भी जी चाहने लगा है. क्या मै इसका स्वाद नहीं चख सकता ?
किरण- हाँ, हाँ क्यों नहीं ? तुम्हारा हक है. तुम चाहो तो मेरे समूचे जिस्म को चाट सकते हो , चूम सकते हो. मेरा पूरा बदन तुम्हारा है.
सूरज- मैं अपना समझता हूँ तभी तो मुझे किसी तरह का ऐतराज नहीं है.
किरण- रुको सूरज, इतनी जल्दबाजी मत करो , इसे चाटने से पहले ठीक तरह से धोअना पडेगा .
सूरज- मुझसे रहा नहीं जाता .
किरण- हाँ, समः सकती हूँ. इतनी सेक्सी बातें सुनने के बाद तो रौंगटे खड़े होना निश्चित है , लेकिन हमें जोश में आकर होश गंवाने से बचना होगा .
सूरज- अब , जब हम सब कुछ गँवा चुके हैं तो आगे किसकीचिंता ? मैं सोचता हूँ कि डोली अगर तुम्हारे टच में है तो उसे मुझसे मिलवाओ. अगर वह कुत्ते के साथ सम्बन्ध बनाना नहीं भूल जाए तो कहना.
Wednesday, February 23, 2011
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