Wednesday, February 2, 2011

बेवफा खंडहर वाली , भाग-40
किरण- यही की जान कीमती होती है, इसे जाने के बाद कुछ नहीं बचता, उससे जुड़े हुए लोग फिर से नई जिंदगी शुरू कर देते हैं. नए साथ मिलते हैं, नए उद्देश्य बन जाते हैं और नई राह यहाँ तक की नई
मंजिलों का जन्म हो जाता है. इसलिए कभी भी किसीके लिए जान देने की बात मत करना.
सूरज- अच्छा ठीक है, तुम जैसा कहोगी मै वैसा ही करूँगा . आदेश करो. तुम्हें शायद ये बात बहुत बुरी लगी है ?
किरण- नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है. असल में तुम्हें एहसास नहीं है की किसीके के लिए बिना जिस्म के जीना कितना मुश्किल होता है.
सूरज- बिना जिस्म के जीना ? ये आपने क्या कह दिया ? ये कैसे शब्द इस्तेमाल कर लिए ? भला ऐसा कहीं होता है क्या ?
किरण- तुम नहीं समझ पाओगे.
सूरज- समझाने की कोशिश करोगी तो क्यों नहीं ? मेरा तो यही सोचना है की आपने मुझे फिर से डराना शुरू कर दिया है . ऐसा नहीं चलता यार . या तो ठीक से प्रणय क्रीडा की ही बात करो या फिर अच्छी तरह से
डरा ही लों. रामगोपाल वर्मा की तरह एक ही फिल्म में होरर और रोमांस का तडका मत लगाओ .
किरण- इतनी जल्दी दहशत में आ गए , अभी अभी तो कहते थे थे की जनाब के दादा बहुत बड़े सयाने थे , की जादू टोना के माहिर थे, की जनाब ने पूरा इंद्रजाल ही पढ़ लिया है और अब देखो सिर्फ रूह की बात चली
तो हवा खुश्क हो गयी, मैन तो आपको यह बताना चाह रही थी की असली मोहब्बत जिस्म से ही ज्यादा ताल्लुक रखती है , यह अलग बात है की लोग ऐसा मानने के लिए तैयार नहीं होते. अपनी बात को बड़ी करने के लिए
, अपने आपको बड़ा दिखाने के लिए वे ऐसा दिखाने की कोशिश करते हैं जैसे की वे बड़े त्यागी हैं. और बड़प्पन की आड़ में वे अनैतिक कार्यों को अंजाम देते हैं.
सूरज- थोड़ा सा डिटेल में बताओगे तब समझ पाउँगा. कुछ आपबीती सुनाइये इससे जुडी हुई.
किरण- क्या बताऊ और क्या छिपाऊ ? जीवन में रोजाना ऐसे कार्य होते रहते हैं. मेरे पास तो लोगों का आना-जाना लगा ही रहता था. तुम तो जानते ही हो की एक पेशेवर औरत की दिनचर्या क्या होती है ?
सूरज- बस इसी बात को बार- बार मत दोहराओ , ऐसा करती हो तो दिल पर चोट सी लगती है. इस शब्द से मुझे नफरत सी हो गयी है.
किरण- जों सचह है, उसे स्वीकार करना सीखो सूरज. सच्चाई जितनी कड़वी होती है उतनी ही पवित्र होती है.
सूरज- अच्छा ठीक है , यह भाषण छोडिये और कहानी के बारे में सुनाइये , जों अभी सुनाने जा रही थीं .
किरण- अच्छा , राहुल के बारे में बात कर रहे हो. उसका नाम राहुल ही तो था . राहुल अमीर बाप का अय्यास युवक था. वह जों ठान लेता, उसे पूरा करके ही रहता था. उसने यदि किसीको पाने की जिद कर ली तो
दुनिया की कोई ताकत उसे ऐसा करने से नहीं रोक सकती थी. वह मेरे पास एक बार आया था. उसने मेरी मुंहमांगी रकम दी. और फिर पूरी रात सिर्फ अपनी कहानी ही सुनाता रहा. मेरे कहने पर पर भी उसने मेरे साथ
जिस्मानी रिश्ता नहीं बनाया. अगर कोई दूसरा होता तो इस मौके को किसी भी कीमत पर नहीं छोडता .
सूरज- वाव, इसका मतलब दुनिया में इस तरह के लोग भी रहते हैं. क्या कहानी सुनाई उसने ?
किरण- उसने बताया की उसे अपनी बड़ी साली बहुत अच्छी लगती थी, उसकी पत्नी वैसे तो बहुत सुन्दर थी, गुणवान थी, लेकिन बड़ी साली पर वह बुरी तरह से फ़िदा था. वह उसे हासिल करने के लिए नई-नई तरकीब ढूँढता
रहता था. लेकिन दुर्भाग्य से उसकी हर स्कीम फेल हो जाया करती थी. इत्तेफाक से उसकी पत्नी की बड़ी बहन रीता के पति का सड़क दुर्घटना में इंतकाल हो गया. रीता का पति बहुत धनवा न था. अरबों की जमीं जायदाद थी,
अब तो राहुल के मन में यह बात घर कर गयी की अगर उसने रीता को अपने प्रेम के जाल में उलझा लिया तो वह उसके यौवन के रस को तो चखेगा ही , साथ ही वह उसकी दौलत को भी हथिया सकता है.
सूरज- तो इसका मतलब ये कहो न की राहुल अपनी बड़ी साली से कम और दौलत से ज्यादा मोहब्बत कर रहा था.
किरण- हाँ, ऐसा ही कुछ था. राहुल कहता की वह रीता को चाहता है क्योंकि वह बहुत दौलतमंद है और उसकी दौलत को भी पसंद करता है क्योंकि वह दौलत रीता की है . कुल मिलाकर वह रीता और उसकी अरबों की जायदाद
, उन दोनों से ही लगाव रखता था.
सूरज- अच्छा ... बढ़िया है. यह कौन सा दर्शन हुआ भाई ? बात कुछ समझ में नहीं आई.
किरण- आगे सुनाऊ या फिर बात को यहीं खत्म करू ?
सूरज - आगे बढ़ने के लिए ही तो मै कब से मक्खन लगा रहा हूँ.

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