Monday, February 21, 2011

बेवफा - 58
किरण- ओह, ये तो उसने ठीक नहीं किया. उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था.
प्रो- क्या कहूँ , मैं उसके सामने बहुत रोया, गिडगिडाया मगर वह नहीं पिघली. उसका दिल पत्थर का हो चुका था. उसने मेरी एक न मानी , बाद में पता चला कि उसे दौलत की हवस थी. अपनी जिस्मानी प्यास
बुझाने के लिए उसने मेरे से दोस्ती की थी , और जब उसका स्थाई इंतजाम हो गया तो उसने मुझे ठुकरा दिया.
किरण- तो क्या तुम उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बना चुके थे ?
प्रो- हाँ, कई बार. मैंने बहुत मना किया था, जब वह नहीं मानी तो मैंने उसकी ख्वाहिश पूरी करदी, उसको जिस्मानी सुख दिया. जिस तरह वह चाहती थी , मेरे जिस्म का इस्तेमाल करती थी.उसका जब भी जी चाहा
तभी वह जिस्मानी सुख प्राप्त करती थी. मेरी इच्छा न होते हुए भी मुझे उसके बदन की प्यास बुझानी पड़ती थी. वह इतनी ज्यादा भूखी थी कि अक्सर दिन में भी मेरे कमरे में आ धमकती थी. मै उस समय कमरे
में अकेला ही रहा करता था. वह सुबह -सुबह ही मेरे पास आ गयी . मैंने होटल से उसके और अपने लिए नाश्ता मंगाया , फिर पूछा -
- आज सुबह -सुबह कहाँ बिजली गिराने का इरादा है ? बड़ी खूबसूरत लग रही हो. फोन किया होता , मैं ही चला आता .बड़ा गहरा मेकअप किया हुआ है. वाव हाथों पर मेंहदी भी भी है.
प्रेमिका- रात भर चैन से सो नहीं पाई. रात तुम सिर्फ दो बार ही सेक्स कर पाए थे, अगर एक बार और कर लेते तो मजे से नींद आ जाती, सुबह हुई तो याद आ गई. बड़ा मन कर रहा है प्रोफ़ेसर . चलो न एक बार
काम सुख के समुन्दर में गोते लगा लेते हैं, आपका मूड भी बन जाएगा और मुझे भी तसल्ली हो जायेगी . क्या करूं, तुमसे नजर ही नहीं हटती . दिन को भी तुम और रात को भी तुम ही तुम नजर आती हो.
प्रो- लेकिन , इतनी सुबह ? अभी मजा आएगा ? अभी तो मैंने मुंह भी नहीं धोया .
प्रेमिका- शेर कभी मुंह भी धोते हैं क्या ? चलो , कपडे उतारो और मौज मस्ती के मूड में आ जाओ . चेहरे पर क्या मुर्दाई छाई है ? इसे उतार फेंको मेरी जान.
इसके बाद वह मुझसे लिपट गयी , मेरे होठों को चूमने लगी. मैंने उसकी गोलाइयों को दबाना शुरू कर दिया. एक उंगली उसके यौवंद्वार में भी डाल दी , वह कराहने लगी . उसकी गर्म साँसें जोर-जोर से चल रही थी.
वह कामोत्तेजक आवाजें निकाल रही थी. कुछ देर में मेरा नाग भी फन उठाकर फुँकारने लगा. मुझे करंट सा लगा तो मैंने उसके यौवन द्वार में एक साथ कई उँगलियाँ घुसादी और आगे पीछे करने लगा , वह बोली-
- तुम्हारे मुन्ना को इस्तेमाल करो न, उँगलियों से उतना मजा नहीं आता.
प्रो- तुम्हारा पेट नहीं भरता मेरी जान, अगर तुम्हारी शादी हो गयी तब क्या करोगी ? तुम्हारा पति इतना सेक्सी नहीं मिला तो ?
प्रेमिका- तुम क्या मर जाओगे ? पति बिलकुल नामर्द तो होगा नहीं, कुछ न कुछ ताकत तो वह भी रखता ही होगा. जितना कर पायेगा, उतना ठीक है. रही -सही कसर तुमसे पूरी कर लिया करूंगी .
प्रो- अच्छा, तब क्या इतना आसान होगा मुझसे मिलना ?
प्रेमिका- आसान तो अब भी नहीं है. अब भी तो कितनी मुश्किल से आना पड़ता है. घरवालों को मुझ पर कुछ शक हो गया है, मेरे पीछे जासूस लगा रखे हैं. घर की नौकरानियां ताक-झाँक करती रहती हैं.
प्रो- किसी दिन पकडे गए तो क्या होगा ? यह मेरा छोटा सा कमरा है, अगर वे लोग खोजते-खोजते यहाँ तक आ गए तो कहीं छिप भी नहीं पाओगे . यहाँ तो कोई छिपने का भी जुगाड नहीं है.
प्रेमिका- अभी इतनी हिम्मत किसीमे नहीं है. और अगर बात यहाँ तक पहुच भी गयी तो सीना तानकर कह दूंगी कि मै अपने प्रोफ़ेसर बाबू से प्रेम करती हूँ और जीवन भर इन्हींके साथ रहूंगी .
प्रो- अच्छा जी, अब ये कह रही हो , उस वक्त नहीं कह पाओगी .
प्रेमिका- कौन रोकेगा मुझे कहने के लिए ? मै जमाने से नहीं डरती ?
प्रो- मै ठहरा सामान्य सा प्रोफ़ेसर, तुम्हारा खानदान अरबपति है, वे लोग मुझे बर्दाश्त कर लेगे ?
प्रेमिका- क्यों नहीं करेंगे ? भले ही दौलत में तुम्हारी हैसियत उतनी नहीं है, मगर तुम्हारी सेक्स करने की पावर भी तो अदभुत है. इसे तो मै ही जानती हूँ/.
प्रो- अब तुम मजाक कर रही हो.
प्रेमिका- जी नहीं, अब मै प्रेम कर रही हूँ, मुझे मजा आ रहा है और शायद इसीलिए मस्ती सूझ रही है.
प्रो- जिस दिन तुम्हें मुझसे ज्यादा कामशक्ति वाला व्यक्ति मिल जाएगा, मुझे भूल जाओगी और उसीकी बांहों में समा जाओगी.
प्रेमिका- ऐसा नहीं होगा यार. तुमसे तो अभी बहुत मजा लेना बाकी है.

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