बेवफा - 56
सूरज- ये हुनर कहाँ से सीख लिया ?
किरण- बस , तुम जैसे दीवानों ने सिखा दिया . तुम जैसे मस्ताने भी कम शौक़ीन नहीं होते हैं ?
सूरज- खैर, हमारी बातें छोडिये, हम तो रात भर करते रहेंगे. बाद में भी कर लेंगे. उस प्रिंस और अभिप्रिय की दास्ताँ सुनाओ. बाद में क्या हुआ ?
किरण- प्रिंस के साथ मै बातचीत भी कर रही थी और उसके खास अंग को सहलाती भी जा रही थी. इससे वह कामोत्तेजित हो गया.तुम मेरे अपने हो , इसलिए तुम कुछ छिपाऊंगी नहीं , जिस तरह से मेरे साथ हादसे पेश
आये हैं, मै उसी तरह से बयां करूंगी. मै ऐसी नहीं हूँ कि अपनी छवि सुधारने के लिए झूठ का सहारा नहीं लूंगी .
सूरज- यही खासियत तो आपको अन्य लोगों से अलग करती हैं. यही अदाएं तो तुमको औरों से अलग और खास बनाती हैं. जितनी मदमस्त तुम्हारी जवानी हैं, उतनी ही प्यारी बातें हैं और उतनी ही अच्छी आदतें हैं.
किरण- शुक्रिया. मैंने प्रिंस के खास अंग को सहला-सहलाकर गर्म कर दिया था. उसका अंग सख्त होकर बड़ा हो गया, अब इतना बड़ा भी नहीं जितना कि तुम्हारा यह महा अंग है. इसके जैसा मदमस्त अंग तो किसी
दूसरे का हो ही नहीं सकता. यह दावा तो मै आँख बंद करके भी कर सकती हूँ.
सूरज- तुमने तो अब तक सकड़ों लोगों के साथ सुहागरात मनाई है, अच्छी तरह से लोगों के गुप्त अंगों को देखा है. ये कैसे हो सकता है , उनमे से मेरी टक्कर का किसी और का हो ही नहीं ?
किरण- इसे चूमने , सहलाने और प्यार करने को जी चाहता है. इसे हमेशा के लिए अपनी आँखों में बसाने को जी चाहता है. इसे देखते ही मै बेहद रोमांटिक हो जाती हूँ, मेरा रोम-रोम कांपने लगता है. कामोत्तेजना की तीव्रता
मुझे मदहोश बना देती है , और मेरे मन का मोर बावला होकर नाचने लगता है.
सूरह- आह, ये शब्द नहीं अंगारे हैं और इन्होने मेरे जिस्म को झुलसा दिया है. मै बेचानियों की हद को पार करने लगा हूँ.
किरण- अपने वादों को मत भूल जाना, ध्यान रखना कि तुमने एक रात में साथ बार सेक्स का आनंद देने का वादा किया है. मुझे तो तुम पर पक्का भरोसा है मगर शराब जितनी मस्ती देने वाली होती है उतनी ही खराब भी होती
है. इसे पीकर ऐसा न हो जाए कि अपना इरादा ही भूल जाओ.
सूरज- जिस शराब को हम पी रहे हैं, यह तुम्हारे हुस्न के नशा के सामने कुछ भी नहीं है,. तुम्हारी शराबी निगाहों के जाम पीपीकर मै धन्य हो रहा हूँ, जिसे पी रहे हैं यह तो नकली शराब है. असली तो मेरे सामने है.
और जब असली शराब ही मुझे दिग्भ्रमित नहीं कर सकती तो असली क्या मायने रखती है ?
किरण- बड़ा सटीक जवाब दिया है. दिल खुश हो गया. आनंद के सागर में हिंडोले मारने लगा. अब देर न करो, मेरे ऊपर छा जाओ. तुम्हारे कलेजे में जों अंगारे दहक रहे हैं, उस आग को भू बुझा दो और मेरे तन -मन की प्यास को बुझाकर
मुझे भी हमेशा के लिए तृप्त करदो, यह वादा तो मै कर ही चुकी हूँ कि तुम्हारे साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने के बाद मै अब इस तन को किसी पराये मर्द को स्पर्श भी नहीं करने दूंगी.
सूरज- मेरा भी तुमसे वादा रहा, मैं भी तुम्हारे सिवाय किसी दूसरी लड़की के साथ कभी सेक्स नहीं करूँगा, भले ही इसके लिए मुझे कुछ भी क्यों न करना पड़े, अगर कोई लड़की मेरे सामने नग्न भी होकर आती है तब भी
मैं उसे बुरी निगाह से नहीं देखूंगा. जब भी मेरा दिल चाहेगा, जब भी मेरी कामवासना भड़केगी, तभी मै तुम्हारे पास आ जाया करूँगा.
किरण- सूरज, सच बात तो ये भी है कि हर कोई औरत तुम्हारी प्यास को बुझा भी नहीं पायेगी. क्योंकि तुम बलवान ही इतने हो. जों महिला तुम्हारे साथ बिस्तर पर जंग लड़ेगी वह भी उतनी ही कामुक और शक्तिवान
होनी चाहिए. जों कि बहुत कम मिलती हैं. मेरे कहने का मतलब है कि मुझसे मजा लेने के बाद तुम्हें कोई दूसरी लड़की इतना मजा दे ही नहीं सकती . भले ही ट्राई करके देख लेना.
सूरज- इतने बड़े दावे का कारण ?
किरण- क्योंकि तुम्हें चरम सुख तक पहुँचने के लिए समय चाहिए, और इतने समय तक तो कोई मर ही मिटेगी. कोई भी औरत इतना वक्त नहीं दे पायेगी.
सूरज- मुझे क्या तुमने वहशी समझा है ?
किरण- क्या अपनी बेड पार्टनर को समस्त सुख देने वाले को वहशी कहा जाता है ?
सूरज- जिस तरह की व्याख्या कर रही हो, उससे तो ऐसा ही लगता है.
किरण- जी नहीं, उसे कामदेव कहते हैं, तुम सचमुच कामदेव कहलाने लायक हो.
सूरज- जिस प्रिंस के बारे में बात कर रही हो, क्या वह प्रिंस भी कामशक्ति के मामले में मेरे जैसा नहीं था ?
Friday, February 18, 2011
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