बेवफा -६२
किरण- रुको सूरज, इतनी जल्दबाजी मत करो , इसे चाटने से पहले ठीक तरह से धोअना पडेगा .
सूरज- मुझसे रहा नहीं जाता .
किरण- हाँ, समः सकती हूँ. इतनी सेक्सी बातें सुनने के बाद तो रौंगटे खड़े होना निश्चित है , लेकिन हमें जोश में आकर होश गंवाने से बचना होगा .
सूरज- अब , जब हम सब कुछ गँवा चुके हैं तो आगे किसकीचिंता ? मैं सोचता हूँ कि डोली अगर तुम्हारे टच में है तो उसे मुझसे मिलवाओ. अगर वह कुत्ते के साथ सम्बन्ध बनाना नहीं भूल जाए तो कहना.
चाहे डोली कितनी भी हवस की पुजारिन हो, उसे कितना भी सेक्स पसंद हो , अगर मेरे साथ दो दिन रही और दो रातें सो गयी तो इतना ध्यान रखो कि उसे छका डालूँगा. मेरे साथ सम्बन्ध बनाने के बाद
वह जानवरों के साथ अंदरूनी सम्बन्ध बनाने की उसकी आदत हमेशा -हमेशा केलिए छूट जायेगी . मेरे ख़याल से संतुष्टि गुप्तांग के साइज से नहीं , बल्कि मन के सटीक मिलन से होती है. अगर मन में संतुष्टि
रहे तभी तन को संतुष्टि महसूस होती है.
किरण- और तुम तो तन और मन दोनों ही के बादशाह हो. तुमने तो मेरी काया को भी स्वर्ण बना डाला है. अब प्रोफ़ेसर का अध्याय खत्म करूं या आगे बढूँ, मुझे तो सविता और डोली के बारे में उसीने बतलाया
था. उसीने कहा था कि वह सविता को दिलो जान से चाहता था लेकिन सविता को किसीसे प्रेम नहीं था, वह तो अपने तन की भूख को शांत करने के लिए ही सहारा लिया करती थी, उसने अपनी वासना को
शांत करने के लिए ही प्रोफ़ेसर के साथ प्यार का ड्रामा किया और जब तक वह कुंवारी रही तब तक अपनी कामाग्नि को प्रोफ़ेसर से ही भी शांत करवाती रही , इसके बाद उसने दूसरी जगह पर विवाह कर लिया .
वह खुद तो सामान्य अवस्था में थे, मगर सविता बहुत बड़े व्यवसाई की लड़की थी.
सूरज- हाँ, ये तो तुम पहले भी जिक्र कर चुकी हो. मगर सविता के ताल्लुक ऐसी लड़कियों से थे जों अपने शरीर की प्यास बुझाने की खातिर कुत्तों का सहारा लिया करती थी , यह मेरे लिए हैरत वाली खबर
है. मैंने इस तारह की बात कभी नहीं सुनी.
किरण- कमाल है. यह कोई खास बात नहीं है. सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि वर्ल्ड के लगभग सभी देखों में ऐसे लोग मिल जायेंगे जों जानवरों के साथ शारीरिक समबन्ध बनाते हैं. मैंने एक दिन कहीं समाचार
पढ़ा था , उसमे भैंस, बकरी आदि के साथ सेक्स करने वालों की संख्या बताई गयी थी.
सूरज- कैसे करते होंगे वे लोग ? और उनको मजा भी कैसे आता होगा ?
किरण- ऐसी हरकत वही लोग करते हैं जों बेहद कामोत्तेजित होते हैं और पल भर में ही जों आवेश में आ जाते हैं. वे अपनी क्षणिक प्यास बुझाने के लिए ऐसी हरकत करते रहते हैं.
सूरज- समाज में शादी जैसी संस्था शायद तभी निर्माण हुई होगी, क्योंकि आदिकाल में लोग सेक्स के लिए लड़ पड़ते होंगे, जानवरों के साथ भी ज्यादा समबन्ध बांटे होंगे . हो सकता है
इसी झगडे को रोकने के लिए समझदार लोगों ने शादी करने का विचार किया होगा .
किरण- हाँ, सूरज . बिलकुल सही कहते हो. और हाँ, प्रोफ़ेसर अब मिलेगा नहीं. उसका कोई कोंटेक्ट नंबर मेरे पास नहीं है. वह दो या तीन बार ही मेरे साथ रात गुजारने आया हुआ था. ज्यादा डिटेल मेरे
पास नहीं है. इसलिए उस लड़की का यानि सविता और डोली का ढूँढना मुश्किल हो जाएगा . वैसे अगर वे मिलीं तो मुझे तुरंत पहचान जायेंगी.
सूरज- तो क्या वे आपके साथ भी मौज मस्ती कर चुकी हैं ?
किरण- जी हाँ, बिलकुल सही पहचाना. मैंने सविता को उस वक्त प्रोफ़ेसर के कहने पर फोन किया था. वह जिद कर राह था कि मै उसका दर्द उसकी बेवफा प्रेमिका तक पहुंचाऊं .
सूरज- अच्छा. फिर क्या हुआ ? बातें हुईं ?
किरण- हाँ, वह ससुराल जाकर भी संतुष्ट नहीं थी. उसकी आदत जों बिगड चुकी थी. इसी कारण वह गैर मर्दों के साथ गुलछर्रे उडाया करती थी.
सूरज- जब उसे गैरों के साथ सम्बन्ध रखना ही था तो प्रोफेसर क्या बुरा था, उसके साथ भी रति क्रेडा का आनंद उठाती रहती .
किरण- सविता ने समझाया था उसे, वह कहती भी थी कि उसका पति उसे बिस्तर पर बिलकुल भी संतुष्ट नहीं कर पाता. वह रोजाना उसे अपनी जिस्म सौंपने के लिए तैयार है , मगर प्रोफ़ेसर
ही इसके लिए तैयार नहीं था. उसका कहना था कि वह किसीकी शादीशुदा जिंदगी में जहर नहीं घोलना चाहता .
सूरज- धात्तेरे की. ये भी कोई बात हुई. इतना ही बड़ा धर्मात्मा बनना था तो उसके साथ सेक्स समबन्ध ही क्यों बनाए ?
Thursday, February 24, 2011
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