Saturday, February 19, 2011

भाग -57
किरण- क्योंकि तुम्हें चरम सुख तक पहुँचने के लिए समय चाहिए, और इतने समय तक तो कोई मर ही मिटेगी. कोई भी औरत इतना वक्त नहीं दे पायेगी.
सूरज- मुझे क्या तुमने वहशी समझा है ?
किरण- क्या अपनी बेड पार्टनर को समस्त सुख देने वाले को वहशी कहा जाता है ?
सूरज- जिस तरह की व्याख्या कर रही हो, उससे तो ऐसा ही लगता है.
किरण- जी नहीं, उसे कामदेव कहते हैं, तुम सचमुच कामदेव कहलाने लायक हो.
सूरज- जिस प्रिंस के बारे में बात कर रही हो, क्या वह प्रिंस भी कामशक्ति के मामले में मेरे जैसा नहीं था ? वह तो बड़ा आदमी था, अरब था,सुना है वे लोग कामशक्ति बढाने के नए-नए तरीके अपनाते रहते हैं। यहाँ तक कि हमेशा कम उम्र की लड़कियों के साथ ही सेक्स सम्बन्ध बनाते हैं, इस बात में कितनी सच्चाई है ?
किरण- तुने सही सुना है, वे कामशक्ति के मामले में बड़े जागरूक होते हैं, खाते -पीते भी अच्छा हैं और कीमती भस्मों का प्रयोग भी करते हैं। यही वजह है कि वे लोग सेक्सी भी बहुत ज्यादा ही होते हैं। लेकिन इसके बावजूद तुम्हारे जैसा मैंने कोई शेख नहीं देखा, सच कहती हूँ। ये कोई मक्खन लगाने वाली बात नहीं है।
सूरज- इतनी ज्यादा तारीफ़ करोगी तो नुक्सान ये होगा कि मैं घमंडी भी हो सकता हूँ। अगर चाहती हो कि मई हमेशा नम्र ही बना रहूँ तो इसके लिए ये जरूरी है कि तुम मुझे मेरी खासियतों के बारे में नहीं बल्कि कमजोरियों के बारे में बताओ। समझ रही हो ने ?
किरण- तुम बहुत प्यारे हो और प्यार करने का तुम्हें पूरा हक़ है। सच पूछो तो तुम इसी लायक हो। तूम्हारी जो सेक्स करने की शक्ति है, ये असीमित है।, मुझे जितना मजा तुम्हारे साथ आ रहा है उतना किसीके साथ नहीं आया। अरब के जो लोग यहाँ पर सेक्स करने के इरादे से आते हैं, वे हवाश तो खूब करते हैं मगर औरत को पूरी तरह से सुख संतुष्टि नहीं दे पाते। राज की एक बात बताती हूँ। देखो, अगर खुद सुखी रहना है तो यह काम कोई ज्यादा मुश्किल नहीं है। स्वार्थी लोग ये काम बखूबी कर सकते हैं मगर अपने साथ वालों को खुश रखने के बाद खुश रहना बहुत बड़ी बात है। तुम जो करते हो वह कोई नहीं कर सकता। तुम ऐसा प्यार करते हो जिससे कि खुद तो खुश रहते ही हो साथ ही मुझे भी सम्पूर्ण संतुष्टि भी देते हो। बस , यही बात है जो तुमको सबसे जुदा करतीहै।
सूरज- मैं ठहरा गरीब आदमी। मैं भला बड़े लोगों का मुकाबला कैसे कर सकता हूँ।, हाँ, अगर उम साथ देती हो तो आगे से मैं ऐसे काम करने की कोशिश करूंगा जिनसे सभी लोगों को फायदा हो सके । यानी कि मेरे साथ -साथ तुम भी खुश अह सको। क्या इस समय तुम असली सुख यानी परामई सुख को भोगने के लिए तैयार हो ?
किरण- बिलकुल, क्यों नहीं ? मैं तो बेताब हूँ, तुम क्या जानो ,मैं यह जानकार कितनी खुश हूँ कि तुम भी अब बोलने लगे हो। मोहब्बत के इस खेल में असली मजा तभी मिल पाटा है जब दोनों साथी बराबर सक्रीय रहते हैं। इससे पहले तो ऐसा लगता था जैसे कि मई तुम्हारे साथ बलात्कार कर रही हूँ।
सूरज- तुम्हारी जवानी का रस भी चखता रहूंगा और कहोगी तो अभिप्रिय और चांदनी वाला किस्सा भी सुनता रहंगा । तुम जिस्म बेचने वाले गिरोह के चंगुल में कितने दिनों तक रहीं और वहां से किस तरह से निकल पाई ? मैं यह जान्ने के लिए बड़ा बेताब हूँ।
किरण- मैंने प्रिंस नामक शेख को अपनी अदाओं के जाल में उलझा लिया था, उसे खुश रखने के लिए मैंने हर संभव प्रयास भी किये। बहुत तकलीफें उठाई । यहाँ तक कि उसने मेरे साथ अप्राकृतिक कुकरम भी किया , मई बता नहीं सकती , उस समय जो पीड़ा हूई थी। मगर उस नरक से निकलने के लिए उसका साथ देना जरूरी था। चांदनी मेरे हर तरह से मदद कर रही थी। जब वह मेरे साथ सम्बन्ध बनाता था तो चांदनी वहीं पर उपस्थित रहती थी और उस शेख की भावनाओं को भड़का दिया करती थीम जिसमें कारण वह जल्दी ही चरम सुख तक पहुँच जाता था और मुझे कम तकलीफ होती थी। एक बार उसने मुझे पूछा -
- मेरे बाद तुम किसीगैर मर्द के साथ सम्बन्ध मत बनाना , जो चाहोगी इनाम दूंगा ।
किरण- लेकिन आप तो मुझे अपने साथ ले जाने की बात कर रहे हो ।
प्रिंस- अगर वहां नहीं पहुँच पाओ तब भी नहीं। उसका एक कारण है।
किरण- बोलो न, ऐसा भला क्या कारण हो सकता है ? जब आप मुझे अपने साथ नहीं ले जा सकते तो आपको क्या मतलब होना चाहिए, मैं कुछ भी करूं , कहीं भी जाऊं।
प्रिंस- नहीं यार, बात ऐसी है कि तुम पर हमारा दिल आ गया है। पहली बात तो हर तरह से कोशिश की जायेगी कि तुम्हें अपने साथ ले चलूँ , और अगर नहीं भी ले जा पाया तो मेरा दिल भी तुम्हारे साथ रात गुजारने की इच्छा व्यक्त करेगा , इसलिए कहता हूँ मेरे लिए रिजर्व रहना। मुंह माँगी फीस दूंगा।

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