Thursday, February 10, 2011

बेवफा खंडहर - 50
किरण- कोई दिशा तो मिले, दुनिया ने एक दस्तूर बना लिया है, मुझे बताओ कि अगर किसी की शादी होती है तो क्या वाह उसके साथ सुहागरात नहीं मनाएगा ?क्या वह जीवन भर सिर्फ प्यार
करके ही विवाह के रिश्ते तो कायम रख सकता है, किसी एक जोड़े का उदाहरण तो बताओ .
सूरज- हाँ, यह संभव नहीं दीखता .
किरण- फिर तुम किस पाक मोहब्बत की दुहाई देते हो ? समाज ने सिस्टम ही ऐसा बना दिया है.
सूरज- तो क्या यह भी सीमित दायरे में रहने का परिणाम है. ?सोचता हूँ कि यह न जाने कैसा रहस्य है. हम कौन सी दुनिया से आते हैं और न जाने कौन सी दुनिया में चले जाते हैं. सब कुछ सपना जैसा
लगता है. सुबह अगर आँख खुल जाए तो बेहतर वरना सोते ही रह जाते हैं. ये जीवन -मरण न जाने क्या है ?
किरण- इसके बारे में शाश्त्रों में भी बहुत कुछ लिखा गया है ,लेकिन सब कुछ अधूरा ही है.
सूरज- आपको इसके बारे में इतना कुछ कैसे पता है ? क्या तुम इस सब्जेक्ट में कुछ ज्यादा ही रूचि लेती हो ? क्या तुमने भी इससे जुडी किताबें पढ़ी हुई हैं ? महसूस तो होता है कि तुम्हे इस बारे में
बहुत कुछ ज्ञान है. मै डिस्कस करना चाहता हूँ , कुछ समझना चाहता हूँ. हांलाकि यह मेरा कभी भी विषय नहीं रहा है. मै तो फ़िल्मी गीत पढ़ने में मजा लेता रहा हूँ.
किरण- यह प्यार का मौसम है, प्यार करने से मन तो क्या रूह भी प्रफुल्लित हो जाती है , इसीलिए जीवन में जब कभी भी ऐसे पल नसीब हों ,उन्हें खोना नहीं चाहिए . यहाँ पर हम दोनों के सिवाय
कोई और नहीं है. क्यों न हम लोग इस प्यार के रस को लूट लें, फिर से एकाकार हो जाएँ. जब हम दोनों की महकती हुई साँसे आपस में टकराती हैं तो स्वर्ग जैसा आनंद मिलता है, ऐसी अनुभूति होती है
जैसे कि हम इस जहां के सबसे खुशनसीब हैं. ऐसा एहसास होता है जैसे हमने इस संसार को जीत लिया है.
सूरज- पहले कभी मैं इतना कामुक नहीं होता था. ऐसा नहीं है कि मै कोई साधू था या नामर्द था. उत्तेजना मुझे भी महसूस होती थी लेकिन मैंने किसी महिला के साथ कभी संसर्ग नहीं किया . मैंने कभी
भी इस नजर से किसीको देखा नहीं, शायद ऐसा इसलिए भी हुआ होगा क्योंकि मुझे ऐसा अवसर ही नहीं मिल पाया. मैंने कोशिश तो बहुत की थी.
किरण- शायद इसीलिए तुम अपनी कामशक्ति का अंदाजा नहीं लगा पाए. तुम बहुत कामुक हो, ताकतवर हो. जी चाहता है कि दिन रात तुम्हारी सेवा करूं, तुमसे लिपटी राहू, प्रेम करती रहूँ और तुम्हारे
बदन से लिपटकर ही फना हो जाऊं .
सूरज- मोहब्बत पर अक्सर लोग फना होने की बात क्यों करते हैं, ये बात मेरी समझ में कभी नहीं आई . मोहब्बत में जीने की बात की जानी चाहिए. आखिर तुमने ही तो कहा है कि जीवन प्यार करने के लिए
है , तुम्हारी इन होठों की पंखुड़ियों को चूमना बड़ा सुहाना लगता है. तुम्हारी जीभ का रस चखना बड़ा अच्छा लगता है. इतने कम समय में तुमने मुझे जों प्यार दिया है, उसे मै कभी नहीं भुला पाउँगा . मुझे तुम्हारी
हर बात मंजूर है, तुम जों भी कहोगी, तुम तो खैर मुझे राजा बनाकर अपने पास रखना चाहती हो मगर मैं गुलाम बनकर भी जीने के लिए राजी हूँ.
किरण- ऐसा न कहो मेरे राजा, तुम तो मेरे सरताज हो, बिन तुम्हारे मेरा क्या क्या है ? तुमने मुझे जों तृप्ति दी है, उस सुख का अनुमान तुम नहीं लगा सकते. यह सुख अमर है.
सूरज- मैंने कुछ खास नहीं किया. जों कुछ किया , वह तुम्हारी दें है, तुमने मेरे मन में प्यार के बीज अंकुरित किये थे, वे अल्प समय में ही पल्लवित और पुष्पित हो गए हैं. मैं उनकी सुगंध से सारे जहां को महका हुआ
महसूस कर रहा हूँ.
किरण- मैं इस प्यार को सहेजकर रखूंगी, कभी भी भुला नहीं पाउंगी . तुम मेरी नजर से देखोगी तो जान पोगी कि तुमने मुझ पर कितना उपकार किया है. अगर आज की रात ठीक सात बार तुम मुझे संतुष्ट कर सकते हो
तो मैं तुम्हें असली मर्द समझूंगी . क्या ऐसा कर पाओगे ?
सूरज- हाँ, हाँ क्यों नहीं ? तुममे हिम्मत होनी चाहिए , मै तो बड़ा पार कर दूंगा . सात बार छोडिये . आठ बार की गारंटी है. आठ बार तक मै प्रणय क्रीडा कर सकता हूँ.
किरण- तब तो मेरा उद्धार ही हो जाएगा. फिर मै कभी नहीं तरसुंगी . हमेशा -हमेशा के लिए तृप्त हो जाउंगी . मेरा यकीन मानो.
सूरज- एक रात में ही आखिर ऐसा क्या हो जाएगा ? एक रात में तो कोई भी तृप्त नहीं हो सकता.ये तुम क्या बोलती रहती हो ?
किरण- इस रहस्य को तुम नहीं समझ पाओगे , यह राज ही ऐसा होता है. जिसे किसीको बताया नहीं जा सकता . लेकिन एक न एक दिन तुम इसे जरूर जान जाओगे. यह मेरा पक्का वादा है.
सूरज-अब तक तो सिर्फ यहाँ का माहोल ही रहस्यमयी लगता था मगर अब तो मुझे तुम भी रहस्मयी लगने लगी हो. हो सकता है कि यह बात बुरी लगे लेकिन सच तो यही है.
किरण- बिलकुल, तुम्हारी बात अपनी जगह सही है, लेकिन मै सिर्फ एक बात कहना चाहूंगी , भरोसा करो तो ?
सूरज- कहके तो देखिये, हर बात मानूंगा . तुम्हारी कोई बात गिरा ही नहीं सकता .
किरण- मैं कभी भी तुम्हारे साथ गद्दारी नहीं कर सकती , हमेशा ही वफ़ा करूंगी . जीवन भर तुम्हारे साथ प्त्रेम करती रहूंगी .
सूरज- मुझे कैसे भरोसा हो , यह तो बताओ .

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