बेवफा - 58
सूरज- मुझे क्या तुमने वहशी समझा है ?
किरण- क्या अपनी बेड पार्टनर को समस्त सुख देने वाले को वहशी कहा जाता है ?
सूरज- जिस तरह की व्याख्या कर रही हो, उससे तो ऐसा ही लगता है.
किरण- जी नहीं, उसे कामदेव कहते हैं, तुम सचमुच कामदेव कहलाने लायक हो.
सूरज- जिस प्रिंस के बारे में बात कर रही हो, क्या वह प्रिंस भी कामशक्ति के मामले में मेरे जैसा नहीं था ? क्या वह तुम्हारी अतृप्त इच्छाओं को तृप्त करने में सक्षम नहीं था ?
किरण- उसका विशेष अंग तो गज़ब का था, तुम्हारे जैसा लंबा और सख्त तो फिर भी नहीं था , मगर वह उतनी काम क्षमता वाला नहीं था. बहुत जल्दी उसका खास अंग नरम हो जाया करता था. उस समय
तो मै नई थी, लेकिन फिर भी मैंने महसूस किया कि वह मेरी काम वासना की पूरी तरह से पूर्ती नहीं कर पाता था. संतुष्ट होने के बाद वह फिर से शराब के नशे में डूब जाया करता था. मुझे ज्यादा पीने की
आदत नहीं थी , लेकिन उस दिन उसने मुझे भी खूब पिलाई. जब मैं उत्तेजित होती तो वह ठंडा हो चुका होता था,
सूरज- जिसके विशेष अंग की लम्बाई कम होती है, क्या वे अपनी महिला पार्टनर को बेड पर संतुष्ट नहीं कर पाते ?आपने इस मामले में कुछ प्रत्यक्ष अनुभव किया है क्या ?
किरण- अच्छा, मेरे अनुभव जानना चाहते हो ? अगर ऐसी बात है तो मै जरूर बताउंगी . एक दिन एक प्रोफ़ेसर ने मुझे रात भर के लिए बुक किया. उनकी उम्र ४५ से ऊपर थी, दिखने में हट्टे-कट्टे थे,. मगर उनका
खास हथियार अपेक्षाकृत छोटा था. शायद इसीलिए वे हीन भावना के शिकार थे , यहाँ तक कि उन्होंने विवाह भी नहीं किया था. काफी देर तक वे झिझकते रहे. जब पैग पर पैग चलते रहे तब जाकर उनकी भय खुली
. थोड़ी देर तक प्यार मोहब्बत की बातें करते रहे. अपनी शादी नहीं करने के फैसले के बारे में बाताते रहे. कुछ लड़कियों की बेवफाई की चर्चा भी की . बोले-
- सबकी बात तो मैं नहीं कर सकता, लेकिन ज्यादातर के मामले में मेरी राय यही है कि ये वफ़ा करके बेवफाई जरूर करती हैं. मुझे तो इनसे नफरत जैसी हो गयी है.
किरण- मैं भी तो औरत हूँ. अगर सभी से नफरत है तो मेरे यहाँ पर मोहब्बत तलाशने कैसे आ गए ?
प्रो- तुम्हारी गिनती सबमे थोड़े ही होती है, तुम तो बड़ी खास हो, सबसे स्पेशल. तुम तो बेचैन दिल का करार हो. हुस्न की देवी हो. तुम्हारी पनाह में दिल को सुकून मिलता है. तुमसे बहारें हैं, खुशियाँ हैं. सब कुछ हैं.
तुम हो तो रंगीनियाँ हैं और अगर तुम नहीं हो उजाला भी अँधेरे की तरह लगता है. तुम किरण नहीं समूचा चाँद हो. तुम जैसे चांद को मै बेवफा कैसे कह सकता हूँ. मैंने सुना है कि तुम अपने हर ग्राहक का खास ख़याल
रखती हो और महीने में सिर्फ एक कस्टमर को ही हेंडल करती हो ?
किरण- हो सकता है ये सब सुनी सुनाई बातें गलत भी हों. इसलिए उसी बात पर भरोसा करो जों देखी हुई हो, भोगी हुई. आज रात मेरे साथ बिताइए, उसके बाद अपनी कोई राय जाहिर कीजिये .
प्रो- लिफाफा देखकर ही मजमून समझ में आ जाता है . तुम्हारी बातें मन को मोहने वाली हैं, तुम्हारी आँखों से मदिरा के प्याले छलक रहे हैं. इस अमृत रस की वर्षा देखकर शक की कोई गुंजाइश ही नहीं बचती .
किरण- दिखने में जितने भोले हो , उतने ही रंगीन नजर आते हो प्रोफ़ेसर . क्या कोलेज में कोई फुलझड़ी नहीं मिली जों हम लोगों का सहारा लेना पद रहा है.
प्रो- लड़कियां तो बहुत हैं मगर तुम जैसी हसीना कहाँ मिलेगी ? तुम्हारी एक मुस्कान से ही दिल के जख्मों पर मरहम लग जाता है.
किरण- आप भी कुछ कम खूबसूरत नहीं है, जवां मर्द हैं, आप पर भी न जाने कितनी ही जान छिडकती होंगी ?
प्रो- एक थी जिसने पहले तो मुझसे प्यार करने का दावा किया, मेरे मन को लूट लिया और मुझे भी प्यार का पाठ सिकह दिया. पहले मै प्यार के इस चक्कर में पढ़ना नहीं चाहता था लेकिन वह नहीं मानी . उसने
मुझे प्यार करने के लिए मजबूर किया . और जब मै भी प्यार का रोगी बन गया तो उसने मोहब्बत की कसमों को भूलते हुए एक अमीर व्यक्ति से शादी करली.
किरण- ओह, ये तो उसने ठीक नहीं किया. उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था.
प्रो- क्या कहूँ , मैं उसके सामने बहुत रोया, गिडगिडाया मगर वह नहीं पिघली. उसका दिल पत्थर का हो चुका था. उसने मेरी एक न मानी , बाद में पता चला कि उसे दौलत की हवस थी. अपनी जिस्मानी प्यास
बुझाने के लिए उसने मेरे से दोस्ती की थी , और जब उसका स्थाई इंतजाम हो गया तो उसने मुझे ठुकरा दिया.
किरण- तो क्या तुम उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बना चुके थे ?
प्रो- हाँ, कई बार. मैंने बहुत मना किया था, जब वह नहीं मानी तो मैंने उसकी ख्वाहिश पूरी करदी, उसको जिस्मानी सुख दिया. जिस तरह वह चाहती थी , मेरे जिस्म का इस्तेमाल करती थी.
Sunday, February 20, 2011
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