Thursday, February 17, 2011

बेवफा - 55
उसका पासपोर्ट तक जब्त कर लिया गया था. बड़ी मुश्किल से वह यहाँ आ पाई.
प्रिंस- सब जगह सब लोग एक तरह के नहीं होते, मै भरोसा दिलाता हूँ, तुम्हारे साथ किसी तरह की गद्दारी नहीं की जायेगी.
किरण- वहां पहुंचकर मेरे साथ ऐश करने वालों की संख्या तो नहीं बढ़ेगी ?
प्रिंस -हरगिज नहीं. भले ही रत को मौज मस्ती करने की संख्या बढ़ आजाये मगर मेरे सिवाय और कोई तुम्हें हाथ नहीं लगायेगा. तुम्हें दूसरा कोई घरेलू काम भी नहीं करना होगा. मै तुमको रानी बनाकर
रखूंगा, और ऐसे -वैसे नहीं बल्कि बाकायदा निकाह करके ले जाउंगा. ताकि तुम्हारे मन में भी किसी तरह की कोई हीन भावना न रहे और मैं भी इत्मीनान के साथ तुमसे जी भरके मोहब्बत कर सकूं.
किरण- इससे पहले भी तो आपकी रानियाँ होंगी, फिर उनका क्या होगा ? क्या आप उन्हें तलाक दे देंगे ?
प्रिंस- तलाक देने की क्या जरूरत है, हमारे क़ानून के मुताबिक़ हम ७ निकाह तो कानूनी रूप से भी कर सकते हैं. किसीको कोई दिक्कत नहीं होगी.
किरण- जहां तक क़ानून का सवाल है तो उसकी भूमिका अदालत से शुरू होती है, उससे कई गुना ज्यादा मामले ऐसे होते हैं जों कोर्ट तक पहुँचते ही नहीं और पहुँच भी गए तो अंत में भी इंसान की
इच्छा को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाया जाता है. भले किसी क़ानून में ७ निकाह वाजिब हो सकते हैं , मगर किसी भी इंसान की पत्नी यह हरगिज नहीं चाहेगी कि कोई उसके प्यार को आपस में बांटे.
प्रिंस- ये सब पुरानी बातें हैं, आजकल मॉडर्न जमाना है. इतना कोई ध्यान नहीं देता . सब लोग अपने लिए कोई न कोई राह निकाल लेते हैं. महिला को क्या दिक्कत है, भले ही हम १० निकाह करें ,
उन्हें अपने खर्चे पानी से ताल्लुक रखना चाहिए .
किरण- खर्चे पानी के सिवाय क्या हमारी लाइफ में और कुछ नहीं होता है ? क्या महिलाओं की कुछ भावनाएं, कुछ जज्बात नहीं होते ? क्या उनका अपना कोई अस्तित्व नहीं होता ?
प्रिंस- इसमें उन्हें कोई असुविधा नहीं होती. तुम इसलिए चिंता करती हो क्योंकि तुम्हें इसका ज्ञान नहीं है, वैसे प्रत्यक्ष में इसका अपना कोई महत्त्व नहीं है.
किरण- अगर मै दुबई में कोई काम नहीं करूंगी तो मेरा टाइम पास कैसे होगा ? जीने के लिए कुछ तो चाहिए. सिर्फ मौज मस्ती से ही तो कुछ नहीं हो जाता.
प्रिंस- मेरे शो रूम हैं, एक दो नहीं बहुत सारे हैं. अगर चाहो तो वहां पर बैठ सकती हो. मैंने अपनी खुद की एअर लाइन की मंजूरी के लिए भी आवेदन किया है अगर हो गया तो तुम मेरी उस कंपनी को भी
संभाल सकती हो, तुम एअर होस्टेस हो, तुम्हें इस मामले की पूरी नोलेज भी है.
प्किरण- क्या अभिप्रिय को यह पसंद आएगा ? क्या वह इसका विरोध नहीं करेगा ?
प्रिंस- क्यों ? उसे क्या पडी है ? उसकी जों अपेक्षा है, उतना मै उसको एकमुश्त भुगतान कर दूंगा. लेकिन इसके बाद फिर मै तुम्हें किसी दूसरे मर्द एक साथ सम्बन्ध नहीं बनाने दूंगा .
किरण- मुझे डर लग रहा है. कहीं कुछ गडबड न हो जाए . ऐसा न हो कि आपस में ही मनमुटाव हो जाए . अभीप्रिय को बुरा नहीं लगना चाहिए . शायद वह मुझे प्यार करता है .
सूरज- अच्छा, तुमने यह बात उस अरब शेख प्रिंस को भी बत्लादी . फिर क्या हुआ ?
किरण- वह जोर-जोर से ऐसे हंसा जैसे कोई पागल हंस रहा हो. उसकी हंसी थम ही नहीं रही थी. मुझे तो चांदनी पहले ही बता चुकी थी कि संबहलकर रहना है. इसलिए मै जों भी बात करती थी , ऐसी करती
थी जों अभिप्रिय तक पहुँच भी जाएँ तो उसे अच्छी लगें. मै अभिप्रिय पर इमोशनल वार करना चाहती थी.
सूरज= अच्छा, तुम तो उसके साथ शराब पी रही थीं, क्या तब भी तुम अच्छी तारह से सब कुछ सोच सकती थीं ?
किरण- हाँ, हाँ क्यों नहीं ? क्या मै अब ठीक तरह से नहीं सोच रही हूँ, जबकि तुम्हारे साथ जमकर शराब का आनंद भी उठा रही हूँ. मुझे पीने की आदत तो नहीं थी लेकिन हाँ, कभी कभार यार दोषों के साथ
पैग मार लिया करती थी, दोस्तों की हठ पर धुना भी उड़ा लिया करती थी. वैसे कितना भी पिऊ.लेकिन होश बराबर रहता है.
सूरज- ये हुनर कहाँ से सीख लिया ?
किरण- बस , तुम जैसे दीवानों ने सिखा दिया . तुम जैसे मस्ताने भी कम शौक़ीन नहीं होते हैं ?
सूरज- खैर, हमारी बातें छोडिये, हम तो रात भर करते रहेंगे. बाद में भी कर लेंगे. उस प्रिंस और अभिप्रिय की दास्ताँ सुनाओ. बाद में क्या हुआ ?
किरण- प्रिंस के साथ मै बातचीत भी कर रही थी और उसके कहास अंग को सहलाती भी जा रही थी. इससे वह कामोत्तेजित हो गया.

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