बेवफा खँडहर - 38
सकिरण- अच्छा ठीक है, जब कभी इच्छा होगी तो तुम्हारे साथ ही जाउंगी, तब तो मुझे किसीकी दहशत नहीं होनी चाहिए , आखिर तुम जों मेरे साथ रहोगे .
सूरज का दिमाग भन्ना चुका था. उसकी कोई ज्ञान्द्रीय उसे फिर से यह आभास करा रही थी की उसके साथ या तो कुछ गलत होने वाला है या फिर हो चूका है. मगर उसने अपने सिर को एक तारफ झटक दिया
और प्यार के समुन्दर में गोते लगाना लगा, वे दोनों अब चरम अवस्था में पहुँचने वाले थे. सूरज पूरी ताकत का इस्तेमाल कर रहा था ताकि वह उसे सम्पूर्ण सुख
डे सके, उसने सुन रखा था की औरतें ऐसे समय जोर -जोर के प्रहार पसंद करती हैं इसलिए वह जोर -जोर से प्रहार करने लगा. किरण भी खामोश होकर रतिक्रिया का सुख ले रही थी, उसके मुख से अजीब तरह की
आवाजें निकल रही थी. उससे माहौल और भी ज्यादा उत्तेजक होने लगा .इतना ज्यादा उत्तेजक की सूरज काफी देर तक उसके सीने की गोलाइयों को सहलाता रहा , किरण ने अपनी आंखें मूँद लीं . वह चाहती थी की
सूरज इसी तरह से उसे मसलता रहे, उसके होठों का रस चूसता रहे. सूरज ने उसकी ये हसरत जल्दी ही पूरी भी करदी. वह उसके पंखुड़ी जैसे होठों को ऐसे चूसता था जैसे की कोई रेगिस्तान के तपती दोपहरी में
प्यास से व्याकुल पथिक पानी मिल जाने पर उस पर टूट पड़ता हो. किरण उसकी उत्तेजना को महसूस कर रही थी, उसकी कामशक्ति को सलाम कर रही थी. उसने महसूस किया की अब तक अगर सूरज की जगह पर
कोई दूसरा मर्द रहा होता तो कबका हथियार डाल चु़का होता , लेकिन सूरज बिंदास था. उसका खास अंग भी बहादुरों की तरह मोर्चे पर मुस्तैदी के साथ डटा हुआ था. सूरज को और भी ज्यादा उकसाने के इरादे से वह तारीफ़ करते
हुए सूरज से कहने लगी-
-तुम कमाल हो, बेमिसाल हो सूरज. तुम आम इंसान जैसे नहीं हो. अगर तुम्हारे स्थान पर कोई दूसरा होता तो कब का फिनिश हो चूका होता, मगर तुम्हारे साथ ऐसा कुछ नहीं है.
सूरज- मैन तो एक जर्रा भर हूँ, मैन तारीफ़ के काबिल नहीं हूँ.
किरण- ऐसा कहकर मेरा दिल क्यों दुखाते हो. तुम साक्षात कामदेव हो. तुम मुझ जैसी औरत को भी सम्पूर्ण सुख और संतुष्टि डे सकती हो. यह बहुत बड़ी बात है वरना आजकल हो ये रहा है की मर्दों का ध्यान सिर्फ जुल्फों
पर होता है, अपने शरीर की मजबूती पर वे ध्यान ही नहीं दे पाते. जानते हो इसका नतीजा क्या होता ?
सूरज- क्या होता होता है ?
किरण- नतीजा ये होता की ऐसे पुरुष बिस्तर से बाहर तो बड़े मर्द बने फिरते हैं, ऐसा दर्शाते हैं जैसे की औरत को मिलते ही घोलकर पी जायेंगे . और जब बिस्तर पर आते हैं, जंग का एलान होता है तो थोड़ी सी देर
में ही धुप में दौड़ते कुत्ते की तरह कांपने लगते हैं.
सूरज- तो सामने वाली औरत कुछ नहीं कहती होगी ?
किरण- कहती होगी ? की करती भी है. मैन तो अपने ऐसे नामर्द ग्राहक को सीधा लात मारकर बाहर भगा दिया करती थी.
सूरज- इसका मतलब आज मैन बच गया , वरना मुझे भी लात मिलने वाली थी.
किरण- नहीं यार, तुम तो जान हो अपनी , अपने जीने का मकसद हो भला तुम्हें लात कैसे मार सकती हूँ. मै तो गुलाम हो गयी हूँ तुम्हारी.
सूरज- ये क्या कह रही हो मेरी जान. तुम तो दिल हो , मेरी धडकन हो. खून बनकर रग रग में समा चुकी हो.
किरण- सच कह रहे हो सूरज ?
सूरज- हाँ, किरण , यह मेरा क्षणिक प्रेम नहीं है. इसमें वासना भी नहीं है बल्कि यह तो मेरा अमर प्यार है.
किरण- इस प्यार के बदले अगर मै हजार जन्मों तक अपनी जान भी कुर्बान करती रहूँ तो भी एहसान नहीं चूका सकती .
सूरज- एक बार प्यार से मुस्करा दो , यकीन मानो मैन खुद ही उलटा कर्जदार हो जाउंगा, इतनी तासीर है इस प्यारी सी मुस्कान में .
किरण- तुम्हारी बातें दिल से निकली हुई और सटीक लगती हैं, कहीं से भी बनावट नजर नहीं आती.
सूरज- और आप भी तो दिल की गहराइयों से कहती हो.
किरण - ये प्यार कभी कम तो नहीं होने दोगे ?
सूरज - मैंने दिल से मोहबब्त की है, चाहे जों हो जाए मगर दगा नहीं नहीं दूंगा, और हाँ, एक बात और ... मै कुछ भी बर्दाश्त कर सकता हूँ लेकिन प्यार में बेवफाई बर्दाश्त नहीं कर पाउँगा, इसका ध्यान रखना .
Monday, January 31, 2011
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment