
नई दिल्ली. बीते जून में रामलीला मैदान में स्वामी रामदेव और उनके समर्थकों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के दौरान जख्मी हुई राजबाला ने सोमवार को जीबी पंत अस्पताल में दम तोड़ दिया है। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को उनकी मौत के लिए जिम्मेदार बताया है। राजबाला को सिर और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगी थी। उनके शव का पोस्टमार्टम हो गया है।
परिजनों ने राजबाला का शव अस्पताल से ले जाने से इनकार कर दिया है। शव अब भी जी बी पंत अस्पताल के शवगृह में पड़ा हुआ है। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों की राजबाला के परिजनों से किसी बात को लेकर कहासुनी भी हुई। राजबाला के भतीजे समीर चौधरी का कहना है कि जब तक केस हिस्ट्री और डिस्चार्ज स्लिप नहीं मिलता है, शव नहीं ले जाएंगे।
बीजेपी महिला मोर्चा की नेता और राजबाला की करीबी शिखा राय भी अस्पताल में मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि यदि राजबाला की बीमारी की वजह और इसके लिए किए गए इलाज का पूरा ब्यौरा नहीं मिलता है तो उनके परिजन अस्पताल के बाहर धरना देंगे। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक केंद्र सरकार की ओर से ऐसा कोई निर्देश नहीं आता है तब तक वो परिजनों को केस हिस्ट्री और डिस्चार्ज स्लिप नहीं देंगे।
यह मामला सरकार खासकर केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम के लिए नई मुसीबत खड़ी कर सकता है। दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत काम करती है। योग गुरु बाबा रामेदव ने राजबाला की मौत के लिए सीधे तौर पर चिदंबरम को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी 6 जून को केंद्रीय गृह मंत्रालय, दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार से इस मामले पर रिपोर्ट मांगी थी, जिसका जवाब देना सरकार और पुलिस के लिए आसान नहीं माना जा रहा है। राजबाला की मौत के बाद आयोग अपने तेवर और सख्त कर सकता है।
योग गुरु बाबा रामदेव ने राजबाला के परिवार की हिम्मत की तारीफ़ करते हुए कहा "मेरा धर्म है कि मैं उनकी अंत्येष्टि में शामिल होऊं। मैं उनके परिवार के लगातार संपर्क में हूं।" राजबाला की मौत को बाबा रामदेव ने लोकतंत्र में एक असाधारण घटना बताते हुए लोगों से अपील की है कि ज्यादा से ज्यादा लोग राजबाला की अंत्येष्टि में शामिल हों।
वहीं, राजबाला की बेटी ने इस पूरे मामले में दिल्ली पुलिस और सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। राजबाला की बेटी ने दिल्ली पुलिस की उस दलील को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि राजाबाला को भगदड़ में चोट लगी थी, जिसकी वजह से उनकी मौत हुई थी। राजबाला की बेटी ने कहा कि उन्हें लाठियों से चोट लगी थी।
गौरतलब है कि 4 जून की रात रामलीला मैदान में बाबा रामदेव के अनशन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई में राजबाला गंभीर रूप से घायल हो गई थी। इस घटना के बाद उन्हें पहले एलएनजेपी अस्पताल और फिर जीबी पंत में भर्ती कराया गया। 5 जून को ही उनकी रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन किया गया था।
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