
मेरठ। कविता चौधरी हत्याकांड में गाजियाबाद में सीबीआई की विशेष अदालत ने पांच आरोपियों में तीन को दोषी मानते हुए सजा सुना दी है। इनमें दो दोषियों रविन्द्र और सुल्तान को उम्रकैद की सजा तथा योगेश को तीन साल की सजा दी है। अदालत ने कल अशोक को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।
कौन थी कविता रानी, क्या थी इसकी कहानी
कविता मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में प्रवक्ता थीं। उनका घर बुलंदशहर स्थित घंसुरपुर गांव में है। 23 अक्टूबर 2006 के दिवाली के अवकाश के बाद कविता घर से वापस आईं, लेकिन हॉस्टल नहीं पहुंची। 31 अक्टूबर को उनके घरवालों ने उसके लापता होने की खबर बुलंदशहर कोतवाली में दर्ज कराई। बुलंदशहर पुलिस ने ये मामला कुछ दिन बाद मेरठ पुलिस को सौंप दिया।
हॉस्टल के कमरे से कविता के कुछ पुराने खत, एक डायरी और धमकी भरे कागज बरामद हुए थे। डायरी मे कुछ राजनेताओं के नाम और नंबर थे। जिसके बाद मेरठ पुलिस ने रवींद्र प्रधान, सुलतान, योगेश, अशोक को गिरप्तार कर लिया था। इस मामले में कुछ राजनेताओं के नाम उछले जिससे की पूरे यूपी में हडकंप मच गया ।
पूछताछ से पता चला कि रविंन्द्र प्रधान जबरदस्ती कविता से शादी करना चाहता था और कविता को उसने काफी धमकाया भी था। दोनों ही नेताओं की अश्लील सीडी बना कर उन्हें ब्लैकंमेल किया करते थे। इस मामले में सबसे पहला नाम उस समय यूपी के मंत्री रहे मेहराजुद्दीन का आया था। इनकी अश्लील सीडी तैयार कर 35 लाख रुपये वसूला गया था। इसी रकम के बंटवारे को लेकर कविता की हत्या कर दी गई।
मर्डर के बाद कविता की लाश नहीं मिल पाई। इस मामले में फरार रविंन्द्र प्रधान को पुलिस ने गिरप्तार किया। मई 2008 में मामले की सुनवाई के ही दौरान उसकी गाजियाबाद जेल में मौत हो गई।
No comments:
Post a Comment