Friday, September 2, 2011



नई दिल्ली ,देश में महंगाई बढ़ती जा रही है. गुरूवार को जो आँकड़े आए उसके मुताबिक महंगाई दर दस फीसदी के पार जा चुकी है.

इसका असर मंडियों में भी दिखाई दे रहा है. सब्जियों के दाम आसमान पर हैं. ये हाल बिहार से लेकर गुजरात तक का है.

महंगाई के कारण आम आदमी का बजट तो बिगड़ ही चुका है सब्जी उगाने वाला किसान भी परेशान है क्योंकि उनकी शिकायत है कि फायदा सारा बिचौलिए उठा ले जाते हैं.

पेट्रोलियम पदार्थो सहित रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं की ऊंची कीमतों के चलते महंगाई की मार झेल रहे आम आदमी को फिलहाल राहत की उम्मीद नहीं है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी चेताया है कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए मुश्किल भरे दिन अभी जाने वाले नहीं।

आरबीआई द्वारा हाल ही में जारी की गई 2010-11 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि महंगाई उच्च स्तर पर बनी रहेगी। मार्च 2012 तक इसके 7 फीसदी पर आने का अनुमान है। इसका मतलब है कि तब तक आम आदमी को महंगाई की मार झेलनी पड़ेगी। अपनी सालाना रिपोर्ट में इसका जिक्र करते हुए बैंक ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और कमोडिटी कीमतों में कमी आने के बावजूद उच्च महंगाई दर बरकरार है, जो देश की विकास दर को प्रभावित कर सकती है।

उधर, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएमईएसी) पहले ही साफ कर चुकी है कि अक्टूबर तक डब्ल्यूपीआई (थोक मूल्य सूचकांक) की दर नौ फीसदी के उच्च स्तर पर रहने का अनुमान है। परिषद के अध्यक्ष सी रंगराजन का कहना है कि महंगाई से राहत के लिए आम आदमी को अभी और इंतजार करना पड़ेगा। वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही (जनवरी 12 से मार्च 12) में गिरावट का रुख बनेगा।

ब्याज दरों की मार
जानकारों के मुताबिक विगत दिनों एसबीआई सहित कुछ अन्य बैंकों द्वारा बढ़ाई गई दरों के कारण आम आदमी पर महंगाई का गहरा प्रभाव पड़ेगा। इससे जहां इन बैंकों के कर्जदारों को अधिक ईएमआई चुकानी होगी, वहीं उनके आवास तथा वाहन ऋण की अवधि भी बढ़ सकती है।

विकसित देश भी त्रस्त
विकासशील देशों के साथ-साथ ब्रिटेन जैसे विकसित देश भी महंगाई से त्रस्त हैं। ब्रिटेन में कपड़े, खाद्य वस्तुएं और पेट्रोल डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इससे लोगों का बजट गड़बड़ा रहा है। महंगाई ब्रिटिश मीडिया में लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि वे महंगाई के लिए भारत और चीन में बढ़ती खपत को मुख्य कारण मान रहे हैं। यहां महंगाई बढ़ने के पीछे ये कारण हैं-

> पेट्रोल-डीजल की कीमतें लगातार बढ़ना।
> कम दर पर सुलभ ऋण (लोगों के पास खर्च करने के लिए बड़ी मात्रा में पैसा आ जाता है)।
> बायोफ्यूल का ज्यादा उत्पादन। इससे बड़ी मात्रा में उत्पादित खाद्यान्न लोगों तक नहीं पहुंच पाता है, ये गाड़ियों में बायोफ्यूल बनकर जल जाता है।
> अनेक देशों द्वारा खाद्य वस्तुओं के निर्यात पर रोक लगाना। खाद्य वस्तुओं की जमाखोरी।

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