राजेश- आज से तुम अकेली नहीं हो... मेरा नाम जुड़ रहा है तुम्हारे साथ... आज से तुम भी उतनी ही ताकतवर बन जाओगी जितने की हम हैं... और अगर फ़िर भी किसीने तुम्हारा अपमान किया तो उसकी खैर नहीं ... बिना मौत मारा जाएगा... लाश भी नहीं मिल पाएगी उसकी...
शैली- मुझे खून खराबे से बहुत डर लगता है, अगर गलती से कभी किसी चीएंती पर भी पैर रख गया तो दिल बेचैन हो जाता है... मैं शांतिपूर्वक जीना चाहती हूँ... अब मैं चलती हूँ... मुझे छोड़ दीजिये...
राजेश- बड़ी भोली हो तुम... जाना ही जरूरी है तो जाओ मगर देख लेना तुम्हारे सर पर ह्त्या का पाप चढ़ जाएगा...क्या तुम्हें अच्छा लगेगा ये ?
शैली- आपको इस पूरे गाँव में मैं ही दिखाई देती हूँ क्या ? मुझसे से सुंदर सैकडों लड़कियां हैं... उनसे बात क्यों नहीं करते ... तुमसे कौन मना करेगा ?आप चाहें तो मैं इस काम में आपकी मदद कर सकती हूँ... मेरी क्लास में पढने वाली प्रेरणा को जानते हो, जिसकी आँखें कंजी हैं... कितनी सुंदर है वो....वह हमेशा तुम्हारे बारे में ही बात करती रहती है... वह मरती है तुम पर... उसे अगर मैं तुम्हारी सहमती के बारे में बतादूँ तो वह खुश हो जायेगी... उसको समर्पित होने में भी कोई गुरेज नहीं है... वह प्यार की बातें खुलेआम करती है... उसको बिल्कुल भी झिझक नहीं होती... वह गोरी भी है... उसके घरवाले संपन्न परिवार के हैं... शहर रहते हैं....उनका रिश्ता जमेगा तुमसे...
राजेश- मेरे एक दोस्त ने तुम्हें जबसे देखा है , वह कह रहा था की शैली हूर की परी दिखती है... यह रवि नाम का दोस्त मुंबई से आया है... उसकी पारखी नजरों में जब तुम चढ़ गईं तो मैंने सोचा की मैं तुम जैसे हीरे की परख यहाँ रहते हुए भी नहीं कर पाया और रवि ने मुंबई से आकर यहाँ पर एक नजर में ही करली... तभी से मैं तुम्हें आते -जाते रोजाना निहारता रहता हूँ... तुम्हारे इश्क में मैं बहुत गहराई तक डूब गया हूँ... दीवाना हो गया हूँ तुम्हारा... इस समय तुम जवानी की दहलीज पर कदम रख रही हो... मोहब्बत करने का यही सुनहरा समय... इसके बाद कुछ हाथ नहीं लगेगा... जितनी मौज मस्ती ले सको उतना ही अच्छा है... शादी होने के एकाध साल के बाद ही औरत को बच्चा हो जाता है और फ़िर उसका ध्यान बंट जाता है... जवानी का असली आनंद लेने का यही सच्चा समय है... इस जवानी का वैसे भी अचार तो डाला नहीं जाता ... आज ये वक्त तुम्हें मिल रहा है, कल शायद मिले या ना मिले... इस दुनिया में सही लोग मिलना भी तो एक समस्या ही है...
शैली- आप मुझे छोड़ दीजिये .... मैं परेशान हो रही हूँ... ऐसा लगता है जैसे मैं अन्दर से टूट रही हूँ... टूट फ़ुट सी होने लगी है... मुझ पर नशा जैसा हावी हो रहा है...
राजेश- यह प्यार का नशा है... इसकी आगोश में तुम्हें खूब आनंद मिलेगा... अब तुम ख़ुद कहोगी की मुझे प्यार दो... अब ये समझलो की तुम्हें भी मुझसे मोहब्बत हो गयी है....
शैली- मैं बैठना चाहती हूँ, मेरे पैरों से जमीन निकली जा रही है... ज़रा भी जान नहीं है क़दमों में ...
राजेश - कुछ ही देर बाद तुम अपने अन्दर अथाह शक्ति का अनुभव करोगी... लो यह शरबत पीलो... यह जादुई शरबत है, इसको एक बार में ही ख़त्म करना है... फ़िर एक मिनिट बाद बताना कैसा लग रहा है ?
शैली शरबत का गिलास लेकर पलंग पर बैठ गयी, एक ही बार में गिलास खाली किया और फ़िर राजेश की तरफ़ आंखों में आंखें डालकर देखने लगी... राजेश उसके करीब आकर बैठा और उसके रसीले होठों को चूमने लगा...
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