वह दीपू को फ़िर से सारी कहानी बता रही थी, पुलिस अधिकारी के साथ हुई वार्ता भी सुना रही थी...शैली पूरी ईमानदारी के साथ उसको अपने साथ घटी घटना सुना रही थी... शैली की इस अदा से दीपू भी खुश था मगर इस वक्त वह अपने आपको धर्म संकट में फंसा हुआ पा रहा था... उसे लगता था जैसे की वह एक सच्ची और अच्छी महिला के साथ अन्याय कर रहा है... उसकी आत्मा उसको ही धिक्कार रही थी... शैली भी पशोपेश में थी... उसे यह महसूस हो रहा था जैसे की दीपू उसमे दिलचस्पी लेकर उस पर कृतार्थ कर रहा है... इससे पहले उसे जितने भी ग्राहक मिलते थे वह उसके जिस्म और जवानी से ही मतलब रखा करते थे... उन्हें इससे कुछ लेना देना नहीं होता था की शैली की जिन्दगी में तकलीफें क्या हैं ? जब दीपू ने उसकी परेशानियों को ध्यान से सुना , समझा और गंभीएर्तापूर्वक उस विचार करने लगा तब शैली को उसके अन्दर अपना प्रेमी नजर आने लगा... वह मन ही मन दीपू को अपना सब कुछ समझने लगी... उसने कहा भी -
-तुम ऐसे क्यों हो दीपू...अनसुलझे रहस्य जैसे ...कभी शहद से भी मीठे तो कभी इमली जैसे खट्टे ... आम लोगों से बिल्कुल अलग, भीड़ से भिन्न.... मैंने अभी तक ऐसा कोई नहीं देखा....
दीपू- पता नहीं शैली... बस मैं ऐसा ही हूँ... नहीं जानता क्यों ? तुम्हें देखने, मिलने और तुम्हारे साथ सम्बन्ध बनाने के बाद तो मैं और भी दीवाना जैसा हो चुका हूँ, पागलों जैसी हरकत करने लगा हूँ....
शैली- तुम जैसे भी हो मुझे प्यारे हो, मेरी आंखों के तारे हो...मुझे किसी बदलाव की जरूरत नहीं है...ऐसे ही सुंदर लगते हो... मेरे लिए तुम अनमोल रतन हो... मेरे जीवन के हीरा हो....
दीपू- जब तुम हंसती हो तो फूल झाड़ते मन में सितारे जगमगाने लगते हैं...
शैली- और जब तुम बात करती हो तो दिल के तार सितार की तरह झंकृत होने लगते हैं... मन में मधुर संगीत सा बजने लगता है... दिल प्रफुल्ल हो जाता है... चारों र्तारफ खुशियाँ बिखर जाती हैं... मेरे पास तो इन्हें समेटने का वक्त भी नहीं है... इतना ज्यादा प्यार तो कोई किसी पत्नी को भी नहीं करता होगा...
दीपू- और तुमने जो प्रेम दिया है वह महत्वपूर्ण है... मेरे जीवन को एक नई दिशा मिली है...
शैली- ओह दीपू , तुम मेरे जीने का सहारा हो, मेरा आसरा हो... तुम्ही वो परी हो जिसने मेरे भावहीन जीवन में एक नई क्रान्ति जगादी , जिसने मुझे जीने की राह सिखादी... आई लव यूं दीपू... इस प्यार को कभी कम मत करना...
दीपू- हरगिज नहीं... ऐसा कभी नहीं होगा, हम अपने प्यार की रक्षा के लिए प्राणों की बाजी लगा देंगे....
शैली- और अपना वचन तो नहीं भुला दोगे ?
दीपू- मैं अपने वायदे को निभाने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हूँ....
भावनाओं का यह तूफ़ान इतना ताकतवर था की वे दोनों एक दूसरे में समाने लगे... अब जुबान खामोश हो गयी... साँसें तेज होने लगीं... दीपू ने शैली के होठों का रस चूसना शुरू कर दिया... वह कसमसाने लगी... दीपू उसके घुटनों को मोड़कर आख़िरी जंग का प्रयास करने लगा... शैली ने कोई विरोध नहीं किया... दीपू की आदत थी की पहले वह उसे पूरी तरह तैयार करता था, उसके ख़ास अंगों को सहलाता था... यौवन द्वार पर उँगलियों से छेड़छाड़ करता था... इससे शैली के जिस्म में काम वासनाएं उभर आती थीं ... वह बेचैन होने लगती थी... जब दीपू को यह यकीन हो जाता की शैली सहवास के लिए तैयार है तो वह हमला कर दिया करता था... फ़िर वे दोनों साथ साथ संतुष्ट हुआ करते थे... जब कोई जोड़ा एक साथ परम सुख को प्राप्त करता है तो इसका मतलब यह होता है की सुख देने वाला पुरूष सच्चा मर्द है ...
Friday, July 3, 2009
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