Thursday, July 2, 2009

तड़प, भाग-81

वह पुलिस अधिकारी शैली के बारे में सोच रहा था और दीपू शैली के बारे में विचार कर रहा था...आख़िर शैली को पूछना पड़ा-
-ये तुम क्या सोच रही हो , उस पुलिस अदिकारी को तो तुमने इतना सब कह दिया हमें इतने विस्तार से नहीं बताया...हम भी यह जान्ने के इच्छुक हैं की किस तरह उन कमीने लोगों ने तुमको गुमराह किया...
शैली- आपकी शिकायत पहले भी दूर कर चुकी हूँ और अब फ़िर से दूर किए देती हूँ,मैं तुम्हें सब कुछ साफ़ साफ़ और अक्षरशः बताये देती हूँ....दीपू ने बिना मकसद भले ही यह सवाल उछाल दिया था लेकिन उसका दिमाग बड़ी तेजी से सक्रीय हो ने लगा... आंखों में हैरत के भाव गर्दिस करने लगे... फूल से भी नाजुक दिखने वाली शैली ऐसा कैसे कर सकती थी , यह रहस्य उसकी समझ से परे थी... उसका सिरबुरी तरह दुःख आहा था... कानों में बम से फ़ुट रहे थे... वह उदास हो गया और भगवान् से प्रार्थना करने लगा की अपने इस बार के मिशन में वह पास न होने पाये... इस बार वह अपनी ही असफलता की दुआ कर रहा था... मन ही मन वह ना जाने वह ना जाने क्या-क्या सोचने लगा... सोचते-सोचे उसको इस बात का भी पूरा ध्यान था की शैली को इसकी ज़रा भी भनक नहीं लगनी चाहिए... तभी तो उसने शैली की गोलाइयों पर दवाब बनाकर उसे अपनी बांहों में भर लिया... इस प्रयास में उसका चेहरा पीछे की तरफ़ हो गया था...वह शैली की नंगी पीठ पर हाथ फिराने लगा... बेहद चिकनी त्वचा थी शैली की... उसे सहलाते समय शैली गर्म होती चली जा रही थी... खामोशी तोड़ते हुए दीपू कहने लगा-- एक कमजोर लड़की किसी ताकतवरमर्द को कैसे ठिकाने लगा सकती है, वो भी अकेली ?शैली- जब जान पर बन आती है तो कोई भी इंसान अपनी जान बचाने के एवज में किसी दूसरे की जान बड़े आराम से ले सकता है... मेरे साथ भी यही हुआ.... जब मुझे लगा की वह मुझे मौत से भी बड़ी सजा दे चुका है और इससे भी संतुष्ट नहीं, मुझे इससे भी बड़ी सजा देने का प्रयास कर रहा है तो मैंने उसे फिनिस कर दिया... तुम मगर इतने हैरत में क्यों हो ?तुम्हारा कोई रिश्तेदार था क्या वो ?दीपू- नहीं, सवाल ही नहीं उठता .... ऐसे गुनाहगारों और इंसानियत के दुश्मनों से मेरा दूर -दूर तक कोई रिश्ता नहीं हो सकता... हम समाज , धर्म और क़ानून को मान्न्ने वाले शांतिप्रिय नागरिक हैं... पूरे हिन्दुस्तान में आज तक हमारे पूरे खानदान के ख़िलाफ़ देश में कहीं भी कोई मामला दर्ज नहीं है...शैली- हमारा भी रिकोर्ड पहले ऐसा ही था लेकिन अब इसका क्या करें ... अगर मैं तुम पर रिवाल्वर तान दूँ तो क्या करोगे तुम ? अपना बचाव भी नहीं करोगे ?दीपू- जाहिर सी बात है करूंगा ही,, भले ही उसको चोट नहीं पहुचाऊं मगर रक्षा तो करनी ही होगी...शैली- ये बात अब कह रहे हो, शांत वातावरण में ? मगर जब कोई पूरी ताकत से आप पर हमला करता है तो उसे पूरी शक्ति से ही झेला जा सकता है ... उसमे कोई दुर्घटना भी हो सकती है...दीपू- हाँ, मगर मैं विस्तृत जानकारी चाहूँगा... कैसे हुआ ये सब ? इसकी नौबत कैसे आयी ?शैली- मैं बता रही थी की राजेश , रवि और रोजा ने साजिस के तहत मुझे हवेली में बुलाया था... रात भर उन लोगों ने बारी -बारी से मेरे सहवास किया, नशे की हालत में मुझे कोई ध्यान ही नहीं था, मैं तो बस आनंद पाने के लालच में उनके आदेशों का पालन करती जा रही थी...दीपू- ऐसे असामाजिक लोगों को फांसी का प्रावधन होना चाहिए , जो किसीके जज्बातों से खेलते हैं...शैली- तुम्हें अपने पास पाकर आ ज मेरा मन बहुत हल्का हो गया है, अगर तुम्हारा प्यार मेरे साथ रहा तो इस बोझिल जिन्दगी को आराम से काटा जा सकता है

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