Saturday, July 25, 2009

दिलफेंक पडोसन , भाग-3

फरहा- मैं तो समझती थी की टीचर हो तो सीधे सादे होंगे लेकिन तो एक नंबर के चालू इंसान निकले, सब कुछ कह भी दिया और पता भी नहीं चला... सफाई भी साथ- साथ दे डाली... अच्छा आइडिया है... निभेगी तुम्हारे साथ... दोस्ती पक्की, मिलाओ हाथ... मुझे बदनाम करने की कोशिश मत करना , तुम लोग के पेट में कोई बात पचती नहीं है, अपने किसी न किसी साथी को प्यार या दोस्ती के बारे में बता डालते हो...
सलीम- इतना पागल नही हूँ मैं... अपनी ख़ास बात कभी किसी को नहीं बताऊंगा , जितना तुम आदेश डौगी मेरे कदम भी उतने ही बढ़ेंगे... मैं आगे बढ़ने के लिए हर बार तुम्हारी इजाजत लूँगा...तुम्हारी इजाजत के बिना तो किस भी नहीं करूँगा और कहोगी तो सेक्स से भी पीछे नहीं हटूंगा...
- चुप करो बेशर्म... पहली ही मुलाक़ात में इस तरह की बात करते हो... मुझे शर्म आती है...
सलीम- शर्म तो महिलाओं का जेवर होती है ....मैं पाक साफ़ और सच कहने वालोने में से हूँ... लाग लपेट की बात करना मुझे अच्छा नहीं लगता... मैं हमेशा तुमसे दोस्ती निभाने की कोशिश करूँगा... और अगर तुम इससे आगे बढ़ने की कोशिश करो तो स्वागत है... यकीन मानो मैं हर तरह से निभाने की कोशिश करूँगा.... मुझें तुम्हारे साथ करीबी रिश्ता बनाने में खुशी का नुभव होगा, गर्व का अनुभव होगा... तुम बेहद खूबसूरत और सलीके से जीवन जीने वाली दिखाई देती हो... आज शाम को मैं जल्दी लौट आऊंगा... आप कहो तो...........
फरहा- ठीक है, फ़िर तुम दोस्ती के लायक नहीं हो... मुझे तुम निहायत ही बदतमीज नजर आते हो... दिखने में जितने शरीफ हो , वास्तब में उतने ही खतरनाक हो, फ्लर्ट हो...
सलीम- मैंने सिर्फ़ ये कहा है की जो करूँगा तुम्हारी इच्छा से करूँगा, मैंने जबरदस्ती कुछ करने की इच्छा जाहिर नहीं की है... मैं जानता हूँ की तुम्हें भी इसकी जरूरत ही है, इस जवानी का बोझ इतनी आसानी से नहीं उठाया जा सकता... एक मर्द साथी की भी जरूरत पड़ती है... मैंहसीं हूँ , जवान हूँ, तुम्हारे नाना -नानी को भी अच्छा लगता हूँ...तुम्हारा दिल भी तो आ गया है मुझ पर...तुम्हारी आंखों की चमक बता रही है की तुम भी मुझे चाहने लगी हो...नहीं तो अपने हाथों से बिरियानी खिलाने अकेली नहीं आतीं... अपनी नानी के हाथों भी इसे भेज सकती थीं यार फ़िर दूर से ही बिरियानी पक्दाकर जा सकरी थीं... मगर तुम्हें khus ख़ास chaahiye, tumhaare पास jawani है और मेरे पासमर्दानगी है... हम दोनों इनका जमकर लुत्फ़ उठा सकते हैं... लेकिन यह सब आपके ऊपर निर्भर है... मैं पहले ही सफाई दे चुका हूँ की मैं और लोगों की तरह नहीं हूँ... मैं तो प्यार का रही हूँ, मौज मस्ती लेने और देने दोनों में यकीन रखता हूँ... तुमने पुछा था न की पत्नी के बिना कैसे गुजर हो जाती है , तो अब आप समझीं, इसका राज ये है... तुम जैसी हसीना पत्नी की कमी महसूस ही नहीं होने देतीं... अब मैं चलूँ... अगर कहो तो आते समय कंडोम लेता आऊँ , नहीं तो फ़िर कहीं और जुगाड़ देखूं ?
फरहा खूब जोर से हंसी.... सलीम इतना तेज हो सकता है , उसने इसकी कल्पना भी नहीं की थ, वह तो सोच रही थी की अभी दोस्ती होगी, फ़िर प्यार और तब कहीं जाकर उस असली सुख का नंबर आएगा जिसे पाने के लिए वह तरस रही थी... उसीकी एक सहेली ने उसे जिस्मानी सुख के बारे में बताया था... उसकी सहेली की शादी हो चुकी थी, जब वह राजी -खुशी के लिए फोन करती तो वह फरहा को बिस्तर सुख के बारे में डिटेल में बताती थी... इससे फरहा के शरीर में झुरझुरी सी दौड़ जाती थी, वह भी सोचती की काश, उसे भी कोई बिस्तर पर ऐसा ही सुख दे पाटा... इसी तलाश को पूरी करने की आस में वह नाना -नानी के पास चली आयी थी... यहाँ उसे सलीम मिल गया और इस तरह की बातें होने लगीं... सलीम द्वारा कंडोम के बारे में पूछने पर उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया, सलीम ने अपनी baanhen failadeen , वह unme समा gaee.... सलीम उसके dhehre पर chumbanon की baucchaar करने लगा...

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