मैं अबला क्या करती ? चुपचाप सहन कर लिया करती थी... मरे जेहन में ठाकुर खानदान की बहुत इज्जत थी, मैं तो उन्हें देवता की तरह मानती थी, राजेश को अपना पति मान चुकी थी... जिस तरह तुमने भरोसा दिया है , उसी तरह राजेश में भी मुझसे शादी का वादा किया था, इसी वादेके दम पर वह मेरा कुंवारा बदन हासिल करने कामयाब हुआ था , वरना मैं किसी भी हालत में अपने जिस्म को नहीं छूने देती... चाहे जान ही क्यों ना चली जाती... वो तो मुझे बाद में ज्ञान हुआ की यह सब मुझे फंसाने की साजिस भर थी... मैं बहुत शर्मीली और लड़कों से झिझकने वाली लड़की थी... स्कूल में किसी लड़के की हिम्मत नहीं थी जो मुझे लाइन मारने की कोशिश कर सके... और लड़कियों के कहीं न कहीं चक्कर थे मगर मैं सबसे अछूती थी... मुझे प्यार- व्यार , इश्क-विश्क का चक्कर बुरा लगता था... बड़ी चिढ होती थी इन चीजों से... अगर किसीने भूले से भी कोई फब्ती कस्दी तो उसकी खैर नहीं थी...
दीपू- हैरत है इसके बावजूद भी तुम जिस्म्फरोसी का अड्डा चलाने वालों के चंगुल में फंस गयीं
शैली- हां, ये हैरत तो ख़ुद मुझे भी होती है... कभी सोचती हूँ तो अपने आपको दुनिया की सबसे बेवकूफ मानती हूँ...मुझे अच्छी तरह से याद है जब राजेश मेरे सामने गिडगिडा रहा था, मेरी तारीफ के पुलिंदे बाँध रहा था और साथ ही मुझसे समर्पण करने के लिए याचना कर रहा था... वह याचक मेरी जवानी का बेशकीमती हीरा लूटने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार था... वह कसम खा रहा था , नए -नए उदाहरण दे रहा था... कह राह था-
- तुम हुस्न की मलिका हो, हूर परी हो... मेरे जीने की तमन्ना हो, मेरी आरजू हो... मेरे जीने का मकसद हो... मेरा दिल ऐसे तोड़कर ना जाओ , मैं बहुत भावुक इंसान हूँ,...इस दुनिया में तुम जैसे लोग देखती हो मैं उन सबसे अलग हूँ... मैं बेहद samvedan sheel ... अगर मुझे तुम्हारा प्यार नहीं मिला तो मैं किसी ही हद से गुजर जाऊँगा... अगर मुझे जिन्दगी से रत्ती भर भी मोह है तो वह सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारे लिए है... अब तुम स्वीकार करो या फ़िर ठुकरादो, मुझे कोई गम नहीं है...
मैं राजेश की भावुक बातों में बह गयी... वह मुझे अपनी बांहों में लेने के लिए बेताब हो रहा था, साथ ही वह उत्तेजक बातें करके मुझे भी बहका रहा था... मेरी तारीफ़ करते हुए वह कह रहा था-
- तुम्हारी ये जो गोलाइयां हैं ये मुझे रातों को सोने नहीं देतीं... मन में आग लगा देती हैं... तुमने कभी देखा है इन्हें गौर से, अगर स्वर्ग से साक्षात परी भी उतर कर आ जाए तो भी वह तुमसे मुकाबला नहीं कर सकती... तुम वो चीज हो... पटाखा हो, बम हो... आओ न मेरी बांहों में आकर मुझे प्यार करने का अवसर दो...
शैली- ऐसा करना पाप है, मैं ऐसा नहीं कर सकती... कोई देख लेगा तो क्या होगा ? मुझे डर लगता है... आज मुझे घर जाने दीजिये, हम लोग बाद में मिलते हैं.... मेरा मन बहुत घबरा रहा है
राजेश - मैं तुम्हें दिल से अपनी जीवनसंगिनी मान चुका हूँ... फ़िर भी तुम डर रही हो, झिझक रही हो... जानती हो दुनिया में सबसे पवित्र रिश्ता कौन सा होता है ? प्यार का ... मैं तुमसे बेहिसाब प्यार करता हूँ... मेरी आंखों में झाँककर देखो यहाँ तुम्हें प्यार ही प्यार दिखाई देगा...
शैली- मेरा दिल जोर -जोर से धड़क रहा है, मैं चलती हूँ... मुझे ऐसी बातों से शर्म आती है.
Monday, July 13, 2009
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