Tuesday, July 14, 2009

तड़प, भाग-93

राजेश- शर्म...ये क्या कह रही हो... इस मिलन के मौसम में अगर इस तरह की बात करोगी तो कैसे बात बनेगे... हम जैसे दीवानों का क्या होगा ? क्या तुम नहीं चाहती की हम भी कुछ दिनों इस जिन्दगी का लाभ उठाएं...

शैली- मेरा जी घबरा रहा है ? मैं मोहब्बत के चक्कर में नहीं पड़ना चाहती... जब पढाई पूरी हो जायेगी तब सोचेंगे ...

दीपू- किसीकी जान पर बन आयी है और तुम ना जाने कौन सी दुनिया में हो... मौज मस्ती की यही तो उम्र है... यह मानव जन्म बार-बार मिलता है क्या ? कितने पुन्य करने के बाद यह जिस्म मिला है ... इसको ऐसे ही बरबाद करने से क्या मिलेगा ? प्यार के रंग में रंग जाओ... आओ मेरे गले से लग जाओ ...

मैं सोच में पड़ गयी ...इसीका फायदा उठाते हुए राजेश ने मुझे अपनी बांहों में कास लिया... मैं थर-थर काँपने लगी... यह पहला अवसर था जब किसी मर्द ने मेरे बदन को स्पर्श किया था... मैं बेहद असमंजस में थी... राजेश के होठों पर मुस्कान तैर रही थी... मुझे अपनी मजबूत बांहों में कैद करने के बाद वह मेरी आंखों में झाँककर देखने लगा... मैं शर्म से लाल हो गयी... मेरे सीने की धड़कनें भी बढ़ती ही जा रही थीं... आहिस्ता -आहिस्ता वह मेरे बिल्कुल करीब आने लगा, मुझे अजीब सा लगने लगा... उसने जब मेरे गाल पर चुम्बन लिया तो मैंने अपनी आँखें बंद करलीं... फ़िर मैंने महसूस किया की मेरे होठों पर तपिश हो रही थी... राजेश मेरे होठों को चूम रहा था... मैं कसमसाने लगी... जिस्म के अन्दर आग जैसी लगने लगी थी... मैं बेचैन होने लगी ... उसने मुझे इतनी जोर से पकड़ रखा था की मैं ज़रा भी इधर -उधर नहीं हो सकती थी... फ़िर मैंने राजेश के हाथ का स्पर्श अपने सीने के इर्द गिर्द महसूस किया... दिल में अजीब अजीब से भाव आ रहे थे , एक अनजानी सी खुशी दिल पर दस्तक दे रहे थी... कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था... एक बार विचार आया की राजेश की हवेली से भाग जाऊं और फ़िर कभी इस तरफ़ कदम न रखूँ, मगर हिम्मत नहीं जुटा पायी... राजेश की मार्मिक अपील ने मेरे कदम रोक दिए थे... वह कह रहा था-
-आज अगर तुम नहीं मानतीं तो मैं कबका मर गया होता... आज मैंने यह सोच लिया था की तुमने मेरी मोहब्बत अगर ठुक्रादी तो मैं जिन्दा नहीं रहूँगा... आत्महत्या नहीं करता अपने आप गुजर जाता...
शैली- इतना चाहते हो मुझे ? मेरे बिना रह ही नहीं सकते , जी भी नहीं सकते ? ऐसी क्या बात है मुझमे ? क्यों मुझे इतना चाहने लगे ? तुम तो ठाकुर बिरादरी के सम्मानित परिवार से ताल्लुक रखते हो , ऐसी कौन सी लड़की है जो तुम्हें नहीं चाहेगी ? मैं तो कुरूप हूँ, मुझसे भी सुंदर-सुंदर लड़कियां हैं... उनमे से किसीको बुला लीजिये...
राजेश - तुम ठीक कहती हो कोई इनकार नहीं करेगी मगर जब मेरा दिल ही हाँ नहीं कर रहा तो मैं क्या करुँ...मेरे दिल में तो तुम्हारी सूरत बस चुकी है.... अब यह तस्बीर जीएवन भर रहेगी... कोई इसको यहाँ से हटा नहीं सकता...
शैली- मुझे बहुत डर लगता है ....
राजेश- फ़िर तुमने बच्चों जैसी बात करनी शुरू करदी ... इस दहशत को प्यार में क्यों नहीं बदल देतीं....
शैली-। कैसे होगा ये सब , मैं नहीं जानती... तुम्हारा तो कुछ नहीं बिगडेगा , अगर किसीने देख लिया तो लेने के देने पड़ सकते हैं... मैं कहीं की नहीं रहूंगी...
राजेश- किसकी हिम्मत है जो तुम्हारी तरफ़ आंख उठाकर भी देख जाए...


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