रीना अभी उसकी तारीफों के पुल ही बाँध ही रही थी की शैली के मोबाइल की घंटी बज उठी, यह दीपू का ही फोन था, शैली नृत्य करने लगी, खुशी में उसकी आवाज काँप रही थी... उसने काल रिसीव करते ही कहा-
- दीपू....ओह दीपू ... कम से कम मोबाईल तो चालू रखना चाहिए, तुम्हें मालूम है मैं कितना तड़प रही थी... तुम अपना pataa भी बताकर नहीं गए। मैं पागलों की तरह तुमको गलियों में ढूंढ रही थी....
दीपू- मैंने कहा था ना की रात को मुलाक़ात करेंगे, मैं फोन को चालू करना ही भूल गया था... अच्छा सुनो, हम लोग सुबह यहाँ से निकल रहे हैं... तैयार हो जानाऐसा ना हो की ट्रेन निकल जाए और तुम सोती रह जाओ, खाना खाकर चुपचाप सो जाओ, अब सुबह ही मुलाक़ात करते हैं...
शैली- अगर तुम कहो तो मैं रात भर जागती रहूँ...टेक केयर दीपू, हम सुबह बोरीवली पर मुलाक़ात करेंगे...
अगले दिन उन दोनों की मुलाक़ात हुयी... ट्रेन सही समय पर थी... शैली ने अब अपने मन में पक्का निर्णय कर लिया था की वह कभी भी जिस्मफरोशी नहीं करेगी, शराब को कभी हाथ नहीं लगायेगी, नशे की दुनिया से पूरी तरह मुक्ति पा लेगी,, अब वह सिर्फ़ दीपू पर ध्यान देगी, अच्छे कार्यों पर ध्यान देगी... उसने कई बार अपने ग्राहकों के साथ ट्रेन या प्लेन में यात्रा की थी, बड़े लोग जब मौज मस्ती करना चाहते तो उसे मनचाही फीस देकर दूसरे शहरों में अपने साथ ले जाया करते थे, कभी सेक्रेटरी बनाकर तो कभी पत्नी बनाकर, मगर यह यात्रा उसके लिए बहुत महत्व रखती थी... रास्ते भर उन्होंने खूब इंजॉय किया , साथ में खाना खाते थे, जोक सुनाते थे और मस्ती के किसी भी पल को मिस नहीं करते थे... दोनों खुश थे... उनका स्टेशन आया तो शैली ने अपने गाँव के लिए कार किराए पर ले ली .... लगभग तीन घंटे के सफर के बाद वे दोनों शैली के गाँव पहुच गए ... शहर के नजदीक होने के बावजूद यह अविकसित गाँव था, शैली ने यहीं जम लिया था ... दीपू कहने लगा-
-तो यहीं पर पढ़ी लिखीं आप ? यहीं पर वो राजेश रहता था ? किस तरफ़ घर था उसका ?
शैली- वो रही हवेली... यह गाँव की सबसे आलिशान और बड़ी हवेली है... मुझे उसने यहीं पर अपनी हवस का शिकार बनाया और यहीं पर उसने मुझे नशे के दल दल में फंसाया... वे लोग यहीं पर ब्लू फ़िल्म बनाते थे, यहीं पर शोषण किया जाता था...
दीपू- तुमने कत्ल भी भी तो यहीं किया था ?कैसे किया मगर ? राजेश के मर्डर की पूरी बात अभी तक तुमने नहीं बताई ? पुलिस कहती है की आत्महत्या थी और तुम कहती हो ह्त्या ?
शैली- मैंने उसको धीमा जहर देना शुरू कर दिया था, एक दिन उसे प्यार में लेकर जरूरत से ज्यादा शराब पिलादी, उस वक्त मैं इस हवेली में उसके साथ अकेली थी... वह तड़पने लगा, मुझे लगता था की वह जल्दी ही मर जाएगा मगर वह सख्त जान था... शराब में मिलाकर मैं उसे एक महीने तक धीमा जहर देती रही...फ़िर भी वह जिन्दा रहा, जब वह सुबह तक भी नहीं मरा तो मैंने तकिया से उसका गला दबा दिया... उसके बाद मैं रोने लगी, उसे डाक्टर के पास ले गयी , अगर वह जीवित अवस्था में डाक्टर के पास आता तो मेरा नाम ले सकता था ...
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