सलीम मुस्करा गया, समझते देर नहीं लगी की फरहा भी छोटी चीज नहीं है ... खूब खेली खाई है... जब वह कंडोम खुलेआम तौर पर मांगा सकती है तो ऐसे ही तो नहीं ले रही... सलीम का मूड फ्रेश हो गया... वह स्कूल चला गया, उसकी इच्छा तो नहीं हो रही थी लेकिन फ़िर सोचा की अभी से ही अगर वह बेताबी दिखाने लगेगा तो फरहा उसका ग़लत फायदा उठाने लगेगी... प्यार का मामला है, एक दो दिन में तो सुलझेगा नहीं... यह तो बरसों तक चलने वाला है... मोहब्बत करने को लोग कर लेते हैं, मगर निभाने में मुश्किल होती है, सलीम ने तो फरहा के साथ हमेशा के लिए रिश्ता निभाने का मन बना लिया था... सलीम का स्कूल में बिल्कुल मन नहीं लग रहा था... उसने ब्लैक बोर्ड पर पूरे दिन का काम एक बार ही में ही लिख दिया और बच्चों से उसे देख देखकर लिखने का बोलकर फरहा के ख्यालों में गुमहो गया॥ उसकी golaaiyon के बारे में सोचने lagaa... उसके सुर्ख -रसीले होठों के बारे में सोचने लगा... गोलाइयां तो इतनी सख्त थीं की उन्हें चूमने का जी चाह रहा था ...लेकिन जल्दबाजी की वजह से वह कुछ ज्यादा नहीं कर पाया... उसे मालूम था की एड्स नाम का राक्षस किसी का भी जीवन बरबाद कर सकता है और यह बीमारी किसीको भी लग सकती है... कोई ज्यादा सुंदर है तो इसका मतलब यह नहीं की उसको एड्स नहीं हो सकता... उसके एक साथी टीचर ने मौका पाकर एक खूबसूरत बार गर्ल के साथ सम्बन्ध बना लिए थे , एक बार के सम्बन्ध के कारण ही उसके साथी को यह बीमारी लग गयी और फ़िर उसक मरकर ही फंड कटा... पूरा परिवार तबाह हो गया... समाज में जो बदनामी हुई वह अलग... इसलिए वह किसी प्रकार का चांस नहीं लेना चाहता था... जब कभी वह कई महीनो तक गाँव नहीं जा पाटा था तो किसी तरह से अपनी जिस्मानी प्यास को बुझाने का जुगाड़ ढूंढता रहता था... मगर वह अच्छी क्वालिटी का कंडोम इस्तेमाल करने के बाद ही शारीरिक सम्बन्ध बनाता था, घर जाने से पहले उसने सबसे मंहगे कंडोम का पैकेट खरीदा , काजू कतरी ख़रीदी और अपने फ्लेट पर आ गया... उसने खूब टाक- झाँक की मगर उसे फरहा का कहीं पता नहीं चला... उसके घर पर टाला लटका हुआ था... वहाँ पर वाचमैन भी मौजूद नहीं था... सलीम को बहुत चिंता सताने लगी... मन में तरह -तरह की आशंकाएं सताने लगी...वह बाथरूम में घुस गया, खूब अच्छी तरह से नहाया और घर से निकलने ही वाला था की उसको में गेट से फरहा आती दिखाई दी... उसके साथ उसके नाना नानी भी थे, सलीम की जान में जान आयी, वरना वह तो बेचैन ही हो गया था... अब वह फरहा का इम्तिहान लेने के इरादे से चुपचाप वहीं बैठ गया उअर एक शेरी शायरी की किताब पढने लगा... वह यह जानना चाहता था की फरहा कितनी देर में उसके पास आती है और आती भी है की नहीं... उसे ज्यादा देर इन्तजार नहीं करना पडा, खिलखिलाती हुयी फरहा उसके कमरे में आ गयी.... सलीम ने बिना मौका गँवाए फरहा को अपने आगोश में भर लिया... अब वह उसके होठों को चूम रहा था, फरहा को इससे कोई आपत्ति नहीं थी वह तो और भी बढ़ चढ़करइस प्रणय क्रीडा में हिस्सा ले रही थी... उसने अपने आपको सलीम की गिरफ्त से छुडा लिया और बेहद नखरे के साथ पूछने लगी-
- कहिये जनाब, कैसा रहा दिन ? याद आयी मेरी ? मुझे मालूम था सब ... समझे ?
फरहा - क्या - यही की दिन भर चैन से नहीं रह पाओगे तुम... हर पल मेरी याद सताएगी, हर घड़ी तुम मेरे बारे में सोचते रहोगे ...
सलीम- अच्छा... ज्योतिषी हो क्या ? या जादू मंतर चलाना जानती हो ? कैसे जाना ये सब ?
फरहा- मेरी सहेली ने बताया था ... कह रही थी की जब किसीको किसी से प्यार हो जाए तो ऐसा ही हाल हो जाता है...रात की नींद और दिन का चैन हराम हो जता है, खाना -पीना कुछ अच्छा नहीं लगता... बस हर समय महबूब की याद सताती रहती है... जीना हराम हो जाता है... प्यार करने वालों की दुनिया ही बदल जाती है... उसने कहा था की जिसको यह प्रेम का रोग लगा वह बेकार हो जाता है...
सलीम- ओह... तुम तो कह रही थीं की हमारी दोस्ती की बात को किसी से मत कहना और अब ख़ुद ही अपनी सहेली को सब कुछ बता दिया...
फरहा- मैंने किसी को नहीं बताया , मेरी सहेली को जब एक लड़के से इश्क हुआ तो उसने ये बातें बताई थीं... सहेली हिन्दू थी और उसका प्रेमी मुस्लिम था इसी कारण वे कभी एक नहीं हो पाये, धर्म और समाज के ठेकेदारों ने उन दो चाहने वालों पर बहुत जुल्म किए... तभी मेरी सहेली मुझे अपने अनुभव सुनाया करती थी...
सलीम- ओह,,, फ़िर क्या हुआ तुम्हारे सहेली का ? क्या उसकी कहीं दूसरी जगह शादी कर दी गयी ?
फरहा- हाँ , उसकी शादी एक ऐसे पागल से कर दी गयी की अब वह जिन्दगी भर खून के आंसू रोटी रहेगी...
सलीम- बहुत बुरा हुआ उसके साथ... मैं इसीलिए कभी किसी लड़की से मोहब्बत न कर सका... डरता था की कहीं कुछ ऐसी ही अनहोनी ना हो जाए...
फरहा- दरो मत , मैं हूँ ना तुम्हारे साथ... मेरी और तुम्हारे दोस्ती को किसीकी नजर नहीं लग सकती...मैं अकेली ही सबसे टकरा जाउंगी...
सलीम- कहाँ चली गयी थीं तुम ? मैं बहुत बेचैन हो रहा था, मेरी नजरें बार-बार तुम्हें खोज रही थीं... और हाँ, जैसा तुम्हारी सहेली ने कहा था , मेरे साथ भी बिल्कुल वही हुआ... दिन भर स्कूल में मेरा मन नहीं लगासोचता था की जादू से तुम वहाँ चली आओ तो कितना अच्छा हो... मगर इस जहाँ में जादू -वादू कुछ नहीं है... मैंने बड़ी मुश्किल से दिन बिताया ... तुम कहो न , तुम्हारे साथ क्या हुआ ? क्या तुम्हें भी आयी मेरी याद ?
फरहा- तुम निरे बुद्धू हो ......
Sunday, July 26, 2009
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