Wednesday, July 8, 2009

तड़प,भाग-87

इसे पीओ जरूर मगर लत मत पाल लेना, एक बार जो शराब का आशिक हो जाता है फ़िर वह मरते दम तक इसका दामन नहीं छोड़ पाता..... ....... यह सबसे बड़ी दीवानगी है, धीमा जहर है... पहले आदमी शौक में पीटा है , फ़िर मस्ती के लिए और फ़िर यह जीने की जरूरत बन जाती है... इसके बिना रहा ही नहीं जाता ... सच कहूं तो यह आदमी को कमजोर बना देती है... अंत में एक दिन यह अपने ही साथ ले जाती है... बड़ी कमबख्त चीज है... मैं जानती हूँ की यह ग़लत है फ़िर भी इसके बिना जिया नहीं जाता... यह मजबूरी है...

दीपू- तुम फ़िक्र मत करो, मैं इसका गुलाम नहीं बन पाऊंगा... तुम्हारा गुलाम बन्ने के बाद फ़िर किसीका गुलाम बन्ने की हिम्मत ही कहाँ बचती है...एक पैग बनाओ... हम तुम मिल जुलकर पियेंगे...

शैली- ये पैमाना तो कुछ भी नहीं, तुम्हारे लिए अगर मयखाना भी खाली करना पड़े तो गम नहीं है... जितनी चाहे पीओ, जमकर जियो... मैं मोहब्बत की कद्रदान हूँ, सही ग़लत की जानकारी जरूर दूंगी मगर फैसला आपके ऊपर ही छोडूंगी... हर हालत में तुम्हारे विचारों का सम्मान किया जाएगा...

दीपू- मुझे सिर्फ़ तुम्हारा प्यार चाहिए, मैं मोहब्बत का पुजारी हूँ , सिर्फ़ तुम्हारी मोहब्बत का... मुझे अब प्यार के सिवाय कुछ नहीं सूझ रहा है... अब तो दिल में तुम ही तुम हो... दिमाग में भी तुम ही तुम हो... आत्मा में भी बस चुकी हो... मुझे तुम्हारे अलावा कुछ अच्छा नहीं लगेगा ...

शैली- अब आगे का क्या प्लान बनाया है ? मैं टूर बुक करादूं या तुम कराने वाले हो ?

दीपू- हम पहले तुम्हारे गाँव जायेंगे, उस हिसाब से टूर तय करना है... वहाँ से फ़िर हर जगह घूमेंगे, मैं अभी टिकिट बुक कर देता हूँ... तुम्हारे गाँव के बाद हम लोग फ़िर अपने गाँव चलेंगे... तुम्हें अपने घरवालों से मिलवाऊंगा... सच कहता हूँ, सब लोग तुमसे मिलकर बहुत खुश होंगे... फूले नहीं समायेंगे... तुम्हारी चाँद जैसी सूरत देखकर कोई भी मोहित हो सकता है... मेरे गाँव में हंगामा मच जाएगा...

शैली- मुझे लगता है की मेरे गाँव में भी तुम जैसा खूबसूरत लड़का अब तक कोई नहीं आएगा... जितनी जल्दी कर सको, करो... अब हमें देर नहीं करनी है... शुभ काम में देरी नहीं करनी चाहिए...

शैली ने जैसे ही ये बातें कहीं , दीपू ने उसको अपनी बांहों में भर लिया... वे दोनों प्यार के सागर में डूबने के लिए बेचैन होने लगे... दीपू का विशेष अंग दहाड़ने लगा... शैली उससे प्यार का उत्तेजना को और बढ़ाने लगी... उसे जब भी शैली का विशेष स्पर्श मिलता था, वह तभी काले सौंप की तरह फुंकार मारने लगता था... दीपू नियमित रूप से सेक्स पावर बढ़ाने की दवाएं लिया करता था... इसी कारण वह जबरदस्त ताकतवर बन चुका था... शैली को बिस्तर पर ऐसे आनंद देता था जैसे ख़ुद कामदेव सुख पहुचा रहा हो...दीपू भी शैली के मखमली बदन को पाकर खुश था... जब कोई वैश्या सिर्फ़ पैसे के लिए बदन सौंपती है तो वह अलग बात होती है और जहाँ प्यार का मामला हो उसका नजरिया ही बदल जाता है...शैली यहाँ दीपू से मोहब्बत करने लगी थी इसी कारण उसका प्यार समर्पण में बदल चुका था...

अब वह दीपू को पत्नी की तरह शारीरिक सुख प्रदान कर रही थी... दीपू को ऐसा एहसास हो रहा था जैसे की स्वर्ग में आ गया हो... वह इस आनंद को ऐसे ल्लोत रहा था जैसे ज़रा भी चूका तो फ़िर कभी नहीं मिल पायेगा...

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