Sunday, June 14, 2009

तड़प, भाग-63

चाहे जितना पैसा खर्च हो जाए मुझे गम नहीं , अपने प्यार के लिए इतना सब मैं कर सकती हूँ....
दीपू- बड़ा एहसान होगा मुझ पर... अगर ऐसा नहीं भी करती हो तब भी ये क्या कम है की तुमने इतना कहने की हिम्मत दिखाई है... एक बार अगर मुझे चांस मिला तो हिला दूंगा फ़िल्म इंडस्ट्री को, दिखा दूंगा की हम में भी है दम...हम भी नहीं हैं किसीसे कम... एक्टिंग से लेकर डांसिंग, स्वीमिंग, घुड़सवारी , कराते सहित सभी का ज्ञान हासिल कर चुका हूँ मैं... जो चाहिए वो मौजूद है... यहाँ तक की थियेटर भी कई सालों से लगातार करता चला आ रहा हूँ...अच्छा खासा अनुभव है मुझे ...
शैली- गज़ब का आत्मविश्वाश भी तो है तुम्हारे पास... एक दिन तुम आसमान पर सितारे की तरह चमकोगे, दुनिया में तुम्हारे नाम की धूम रहेगी...ये मेरे मन की आवाज है...
दीपू- मुझे अपने नसीब पर इतना भरोसा नहीं है...डर सा लगा रहता है... बहुत ठोकरें खाई हैं, शायद इसीलिए ... देने वाले ने सबको सब कुछ दिया है, बस मेरे लिए ही गर्दिस के साए हैं, मुफलिसी है....
शैली- निराशा ठीक नहीं होती, यह हमको कमजोर कर देती है... मन में हमेशा आशाओं के दीप जलाए रखने चाहिए... सबसे कठिन दौर में मैं भी ऐसा ही करती हूँ... मैं कभी अपना धैर्य नहीं छोड़ती...
दीपू बिना मन से बात कर रहा था... उसे सिर्फ़ राजेश के कत्ल की बातों में दिलचस्पी होती थी... पुलिस ने राजेश की मौत को स्वाभाविक बताया था मगर जब उसका पिता सांसद बन गया तो उसने राजेश की फाइल फ़िर से खुलवा ली थी, उसकी उच्च स्तरीय जांच चल रही थी... शैली भी अब संभल -संभलकर बोलने लगी थी... उसने शैली की गोलाइयों को जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया और फ़िर आक्रमण भी तेज कर दिया... शैली की कामुक आवाज पहले से भी ज्यादा कामुक होने लगीं... ऐसे क्षणों में शैली उत्तेजक होकर बेहद अश्लील बातें करने लगती थी... वह जोर -जोर से हमले करने का खुलेआम आमंत्रण देने लगती थी... इससे दीपू भी उत्साहित होकर काम करता था... उसकी ताकत से प्रभावित होकर शैली उसकी तारीफों के पुल बाँधने लगी-
- तुम मेरे कामदेव हो... खुश कर दिया यार... जो मांगोगे मिलेगा... इतनी खुश हूँ मैं आज...
दीपू- यही पुरस्कार है मेरा... प्यार से बड़ा दुनिया में और क्या ईनाम होता है ? मुझे सदा तुम्हारा यही प्यार चाहिए... कितना खुशनसीब हूँ मैं.... अबसे पहले हमेशा कुदरत को कोस ता रहता था... अब दिया है तो छप्पड़ फाड़कर... इतना प्यार करने वाली प्रेमिका इस जहाँ में शायद ही किसीके पास होगी....
शैली- अगर कहोगे तो अब मैं धंधे को भी छोड़ सकती हूँ, हमेशा -हमेशा के लिए ... कोई दूसरा काम भी तो किया जा सकता है... पैसा तो अपने पास है ही...