दीपू- ओह्ह्ह्ह्छ... यह जानकर दुःख हुआ ? जब तुम्हें पहली बार मुंबई लाया गया तो कहाँ रखा था ?
शैली- मीरा रोड के एक फ्लेट में रखा था... उस छोटे से फ्लेट में हम दस लड़कियां रहती थीं... उन सभीको जानवरों की तरह घुसाया गया था... हम सभीको नशे में धुत रखा जाता था... टीवी पर अश्लील फिल्में चलाई जाती थीं... फ़िर रवि के गिरोह का कोई व्यक्ति आता था, उसके साथ ग्राहक होते थे ... हम सबको दिखाया जाता... ग्राहक हममें से किसी एक को पसंद करता था ... उससे तुंरत फीस जमा कराली जाती थी और हममें से उस पसंद की लड़की को उस ग्राहक के साथ भेज दिया जाता था...
दीपू- वे ग्राहक कहाँ लेकर जाते थे ? किसी लोज में या कहीं और ?
शैली- कहीं भी जहाँ ग्राहक की इच्छा होती थी , कोई होटल लेकर जाता था तो कोई पर्सनल अपने घर लेकर जाता था... कोई शहर से बाहर भी ले जाया करता था मगर ऐसी स्थिति में गिरोह का कोई बन्दा साथ रहता था...
दीपू- यानी वहाँ से भागने की कोई गुंजाइश नहीं थी ?
शैली- जिसने भी कोशिश की उसका बुरा हाल किया गया, मार दिया गया या फ़िर तेजाब से चेहरा बिगड़वा दिया गया, यह सब इतने सुनियोजित तरीके से होता था की पुलिसउसे ह्त्या या हमला सिद्ध ही नहीं कर पाती थी...
दीपू- ओह... इतने खतरनाक लोग थे ? ऐसे लोग देश की जड़ों को दीमक की तरह चाट रहे हैं...
शैली- तुम सोच नहीं पाओगे इतने डेंजर लोग हैं ये ... अब भी मौजूद हैं .... अभी इनका रैकेट ख़त्म थोड़े ही हुआ है...
दीपू- फ़िर तुम उनके चंगुल से कैसे निकल पाईं ? तुम्हें नहीं रोका उन्होंने ?
शैली- राजेश का जो दोस्त था रवि....
दीपू- हाँ, जिसे तुमने ख़त्म कर डाला ... उसीका दोस्त न ?
शैली- जी , बिल्कुल वही .... जिसने मेरी जिन्दगी बरबाद करदी और जिसे मैंने मार डाला ....
दीपू-तुम रवि के बारे में कुछ बता रही थीं....
शैली- हाँ, रवि के पास यूँ तो सैकडों हसीनाएं थीं मगर उसका दिल मुझ पर आ गया था... हांलाकि उसने कई बार अपनी आंखों के सामने ही मुझे दूसरे लोगों के सामने परोसा था ... इसके बावजूद वह मेरे तन और अदाओं का दीवाना बना रहा ... मुझे ढाल बनाकर उसने खूब नोट कमाए...अपने सभी वीआईपी ग्राहकों के पास भी वह मुझे ही भेजता था...एक पुलिस अधिकारी अक्सर मुझे अपने बिस्तर की शोभा बनाता था... उसकी दो बीवी थीं इसके बावजूद मेरे बिना उसका मन नहीं भरता था...वह मेरी जवानी का ऐसा दीवाना हुआ की मुझसे पर्सनल बातें शेयर करने लगा... वह मुझ पर इस कदर आशिक था की मुझे अपनी रखैल बनाने के लिए भी राजी था लेकिन मैं इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी... मुझे किसीकी गुलामी पसंद नहीं... मैंने साफ़ इनकार कर दिया... एक दिन उसने मुझे एक लोज में बुलाया ... वह नशे में धुत था... मुझसे कहने लगा-
- तुम बहुत सुंदर हो शैली...तुमसे मिले बिना दिल को चैन नहीं मिलता... बेचैनी सी रहती है... लगता है जैसे कुछ छूट गया है...और जब तुम बांहों में होती हो तो चारों तरफ़ फूल खिलने लगते हैं...
शैली- सच ? मुझे लगता है सब मर्द ऐसे ही डायलोग बोलते रहते हैं... मतलब निकल गयुआ तो सब भूल जाओगे... यहाँ से जाते ही कभी भी याद नहीं किया होगा...
अधिकारी - ये क्या कह दिया तुमने ? क्या अभी तक मुझे नहीं पहचाना ? क्या मैं तुम्हें ऐसा लगता हूँ... इसका अर्थ ये हुआ की अब तक तुम मेरी मोहब्बत को समझ ही नहीं पाई हो... मैं जान छिड़कता हूँ तुम पर... जब कभी भी तुम्हारे सेठ का फोन गया होगा मैंने हमेशा उसकी मदद की होगी... कोई लड़की पकडी जाती है उसे कोर्ट तक नहीं पहुचने देता ... छुड़वा देता हूँ...
Thursday, June 25, 2009
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