तुमसे मुलाक़ात क्या हुयी , मेरी तो जिन्दगी ही बदल गयी... अगर उस रात हम दोनों ट्रेन में नहीं मिलते तो बड़ा गज़ब हो जाता... फ़िर ये सुंदर पल कैसे नसीब होते, मैं कैसे जानता इस सौन्दर्य को, इस सुख को....
शैली - तुम सम्पूर्ण मर्द हो... एक ऐसा मर्द जिसके पास हर चीज उपलब्ध है... प्यार भी, अच्छा व्यवहार भी और यहाँ तक कि ताकत भी... कामदेव कि तरह हो तुम... मेरी भी जिन्दगी सफल हो गयी है...
दीपू- जिस स्वर्ग का अक्सर जिक्र किया जाता है वह इससे बढ़कर हरगिज नहीं हो सकता... मैं दावे के साथ कह सकती हूँ... मैंने जितनी तकलीफ उठाई है आज उतना सुख भी मिल गया...
दीपू- तुम्हारे पास दोस्तों और ग्राहकों कि क्या कमी हो सकती है, तुम तो जब भी जिससे चाहो, बिस्तर का सुख वसूल सकती हो... परेशानी तो मेरी है... मैंने आज तक कभी किसी लड़की को छुआ तक नहीं है... मैंने इससे पहले सहवास के आनंद को महसूस ही नहीं किया था, यही कारण है कि मैं इससे अज्ञान- था ... मगर तुम तो-------
शैली- यार दोस्त और ग्राहक सब बेकार थे दीपू, तुम जैसा फौलादी बदन तो बहुत लोगों का है , लेकिन तुम जैसा स्टेमिना वे कहाँ से लायेंगे... तुम जैसा तूफ़ान कहाँ से लेकर आयेंगे... तुम गज़ब के उस्ताद हो... तुमने मेरा तन -मन संतुष्ट कर दिया है... औरत उसी मर्द कि इज्जत करती है जो उसे बिस्तर पर सम्पूर्ण सुख दे सकता है... और जो ऐसा नहीं कर पाते वे हमेशा औरत के गुलाम बनकर रहते हैं... वे कभी भी सम्मान के पात्र नहीं बन पाते... मैं अपने अनुभव कि बात कह रही हूँ... मेरे पास कुछ ऐसे ग्राहक भी आते हैं जो करोरपति तो होते हैं, अच्छी खासी फीस भी देते हैं मगर मुझे ज़रा भी संतुष्ट नहीं कर पाते, इसी वजह से मैं उनको उलटा सीधा बोलती रहती हूँ और वे हँसते रहते हैं... वे हमेशा मेरी सामने एक याचक कि भूमिका में होते हैं...
दीपू- अगर वे तुम्हें संतुष्ट नहीं कर पाते तो क्यों आते हैं तुम्हारे पास...
शैली- भले ही वे किसी औरत को सम्पूर्ण सुख नहीं दे सकते मगर इच्छाएं तो उनकी भी प्रबल होती हैं... वे भी चाहते हैं कि जवान और सुंदर महिला के साथ सम्बन्ध बनाए जाएँ... वे जितना कुछ कर सकते हैं उतना करने कि कोशिश करते हैं और मन बहलने पर चले जाते हैं... हम जैसी काल गर्ल तो झेल लेती हैं ऐसे लोगों को , लेकिन इनकी पत्नी ऐसा नहीं कर पातीं... जबबिस्तर पर महिला पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो पाती तो वह चिडचिडी हो जाती है, हाथ पैरों में दर्द होने लगता है... नींद नहीं आती ... और भी कई परेशानियां होने लगती हैं... और जब पूरी संतुष्टि मिल जाए तो खुशियाँ ही खुशियाँ कदम चूमती रहती है... हर काम अच्छे से होता रहता है... इसलिए मुझे यह सोने के लिए शराब का सहारा लेना पड़ता है, बिना पिए नींद ही नहीं आती...
दीपू- मैंने भी तुमसे ही सब कुछ सीखा है... मेरी गुरु हो तुम...
शैली- ठीक है , गुरु ही सही... अभी तक खुच ख़ास नहीं सिखाया अब सिखाउंगी तुम्हें...जो इस वक्त तुम कह रहे हो उसको याद रखना ... यह शराब और शबाब का नशा बहुत खतरनाक होता है ... जब तक चढ़ा होता है तब तक खूब मजा देता है... जुबान भी सब कुछ बोल जाती है... बाद में जब होश आता है तब पता चलता है... अगर मैं तुम्हें ये बात कभी याद दिलाऊँ तो याद रखोगे ? तभी मांगूंगी तुमसे गुरु दक्षिणा ...
दीपू- पहली बात तो ये की मेरे पास कुछ है नहीं ... और अगर कुछ है भी तो यह तुम्हारा ही है... फ़िर भी मैं इस बात को याद रखूँगा...
शैली- काश , हम लोग पहले मिले होते...
दीपू- जब जो होना होता है , तभी होता है....
दीपू उसके कामुक बदन की मालिश करने लगा.... यह साधारण नहीं कुछ ख़ास मालिस थी...
Thursday, June 11, 2009
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment