Friday, June 12, 2009

तड़प, भाग-61

एक ऐसी मालिस जिसकी शैली को सख्त जरूरत थी मगर कभी कोई कर नहीं पाया था... शैली को पूछना पडा-
- मुझे तुम पर शक हो रहा है, दिल को लगता है जैसे तुम झूठ बोल रहे हो ...
दीपू- अचानक ? एकाएक संदेह होने लगा... इससे पहले तो तुमने कभी कुछ नहीं कहा था...अब अचानक मन में यह सवाल क्यों आया? थोड़ी देर पहले तक तो मैं तुम्हारी नजर में दुनिया का सबसे सच्चा और अच्छा इंसान था...
शैली- वो तो अब भी हो, उसकी कोई दिक्कत नहीं, बात ये है की जिस तरीके से तुम्हारे हाथ थिरक रहे हैं उससे लगता है तुम बहुत बड़े जादूगर हो, खेले खाए खिलाड़ी हो... अनाडी बिल्कुल नहीं... बताओ न अब तक कितनी हसीनों के साथ मुंह काला किया है ? मेरा मतलब कितनी कलियों को खिलाकर फूल बनाया है... या फ़िर कितने खिले हुए फूलों के रस का आनंद लिया है ?
दीपू- एक ही कली है, उसे फूल समझो या फ़िर पूरा गुलशन ... और उसका नाम है -शैली....
शैली- बात को घुमा रहे हो तुम...मैनें बहुत सीधा सवाल किया था , तुमने बेहद उलझा हुआ जवाब दिया है...
दीपू - तुम ही तुम हो मन मन्दिर में... तुम्हारे अलावा कोई नहीं... ऐसा नहीं है की रोमांस करने की मेरी इच्छा नहीं होती है, बल्कि मैं बेहद कामुक व्यक्ति हूँ, मगर मुझे कभी चांस ही नहीं मिल पाया ... तुमने पहला मौका दिया तो मैंने चौका लगा दिया... ये चौके छक्के तुम्हें पसंद भी आ रहे हैं... और कुछ मेरी जान ?
दीपू- नहीं , और कुछ नहीं पूछूंगी... अब मुझे इस बात का ज्ञान हो गया है की तुम सच बोलने वाले नहीं हो... इसीलिए मैं अब मालिस का आनंद लेना पसंद करुँगी... आज भले ही मत बताओ मगर कभी न कभी तो यह राज खुलेगा ही... दुनिया में ऐसी कोई बात नहीं जिसे छिपाया जा सके...
दीपू- क्या तुम सचमुच शक कर रही हो मुझ पर ? मैं नहीं चाहता की ऐसा हो... मैं हरबात पारदर्शी रखना चाहता हूँ... तुम जब चाहो आजमा लेना मैं झूठा आदमी नहीं हूँ.... अगर ऐसा होता तो आज यहाँ नहीं होता... अगर होता तो इतने प्यार और सम्मान के साथ नहीं होता ... आप समझ रही हैं न ...
शैली- जहाँ देखूं तुम ही तुम नजर आते हो, कुछ सोचती हूँ तो ख्यालों में भी तुम ही तुम दीखते हो... तुम्हारे सिवाय नजर को कुछ पसंद ही नहीं आता... मेरे हर अंग में तुम समा चुके हो...
दीपू- सच कहती हो... तभी तो हमारी बात पर ऐतबार नहीं किया जाता , हमें मूर्ख समझा जाता है...
शैली- प्रेमी तो वैसे भी मूर्ख ही होते हैं... एकदम निठल्ले... दीवाना इसीलिए कहा जाता है , समझे.....
दीपू- अगर मेरे सम्बन्ध किसी दूसरी लड़की के साथ होते तो मैं तुम्हें जरूर बताता , जब तुमने मुझे अपनी जिन्दगी की हर कहानी बतादी तो मैं कैसे छिपा सकता हूँ... तुमने तो यहाँ तक बता दिया की जब तुम्हारे पहले प्रेमी ने तुम्हें धोखा दिया तो तुमने उसको मौत के घाट उतार दिया... इतने अन्दर की बात कोई अपने करीबी को ही बता सकता है... कत्ल की बात करना कोई खाने का काम नहीं है...
शैली- राजेश के कत्ल की बात को तुम कुछ ज्यादा ही महत्त्व नहीं दे रहे हो ?
दीपू- हाँ, क्योंकि यह असाधारण बात है... मेरे कहनेका मतलब ये है की तुम जैसी दयालु लड़की किसी चीटी तक को नहीं मार सकती तो इंसान को ख़त्म करने की बात किसीकी गले से कैसे उतरेगी... शराब पीकर ह्त्या की बात कर देना अलग बात है और वास्तब में ऐसी घटना की अंजाम देना बिल्कुल अलग बात है...
शैली- तो फ़िर ठीक है , राजेश का कत्ल मैंने नहीं तुमने किया होगा... ठीक है... मुझे कोई परवाह नही इस बात से...
दीपू- लेकिन राजेश की स्वभाविक मौत हुई थी...पुलिस रिकोर्ड यही कहता है...
शैली- तुम्हें ये सब कैसे मालूम ?
दीपू- तुम्हीने तो बताया ....

No comments: