धमाके तो होने ही थे, अगर आग से पैट्रोल को स्पर्श कर दिया जाए तो क्या होता है , वही हाल उसका हुआ ... दीपू ने जैसे ही शैली को गोलाइयों से अपने होठ स्पर्श किए, उसके समूचे बदन में सनसनी सी दौड़ गयी... वह बुरी तरह बेचैन होने लगी... दीपू का यह ख़ास अंदाज उसको खूब भाया, वह चुप होकर इस सुख को उठाने की कोशिश करने लगी... ख़ुद दीपू भी कम खुश नहीं था, उसके मन ही मन लड्डू फ़ुट रहे थे... शैली ने उसे जो कहानी सुनाई उसके मुताबिक वह इतना तो जान ही गया था की गाँव में भी इस तरह के रैकेट सक्रीय हैं जो गरीब और भोली भाली महिलाओं को बहला फुसलाकर उन्हें वैश्यावृत्ति जैसे घ्रणित कार्य में लिप्त कर देते हैं... उन लड़कियों की फ़िर अश्लील फिल्में बनायी जाती हैं और उनको बंधक बनाकर गुलामों की तरह रखा जाता है... हैरत की बात ये है की इस काले कारोबार का संचालन भी रसूखदार लोग कर रहे हैं... राजनीति से जुड़े ऐसे सफेदपोश लोगों पर कोई आसानी से भार्पोसा नहीं करता... अगर किसी ने बगावत करने की कोशिश भी की तो उसकी आवाज दबा दी जाती है या फ़िर हमेशा के लिए बंद करदी जाती है... कोई -कोई शैली जैसी भी निकलती है जो अपना बदला ख़ुद चुका लेती है ,मगर इससे समाज को ज्यादा फायदा नहीं होता... मामला वहीएँ का वहीं दब जाता है, कोई जान ही नहीं पाटा... हाँ एक अपराधी जरूर कम होता है ... लेकिन इससे ज्यादा असर इसलिए भी नहीं पड़ता क्योंकि एक अपराधी मरता है तो कई पैदा हो जाते हैं... बहुत बड़े -बड़े गिरोह होते हैं ...दीपू यही सोच रहा था और शैली के बदन को चूम रहा था... जब वह उसके पूरे जिस्म को चूम चुका तो शैली बोली-
-क्या बात है, बहुत मूड में दिखाई देते हो.... तुमने मुझे भी फ़िर से कामोत्तेजित कर दिया... तुम्हारे पास ऐसे -ऐसे हथकंडे मौजूद हैं जो मुझे पल भर में पागल बना सकते हैं....
दीपू- और तुम ठहरी जादू की परी, तुम्हें देखते ही मैं होश खोने लगता हूँ, मेरा अंग अंग फड़कने लगता है, खासकर यह नाजुक अंग... तुम जीना हराम कर देती हो... तुम्हारे पास वो ताकत मौजूद है जो पलक झपकते ही किसी भी मर्द का शिकार कर सकती है... बिना तीर तलवार के शिकार करने की कला है तुम्हारे पास... मुझे एक शेर याद आ रहा है- हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम , और वो कत्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता...
शैली- मुझे शेर अच्छे लगते हैं, मेरा एक ग्राहक है जो बिजनेसमेन होकर भी शेर लिखने का शौक रखता है, वह ख़ुद भी बहुत अच्छे शेर लिखता है और दूसरे बड़े शायरों के शेर भी सुनाता है...
दीपू- कभी मौका मिले तो मिलवाइए हमसे... कुछ उनका सुनेंगे कुछ अपना कहेंगे...
शैली- बहुत जल्द मुलाक़ात होगी क्योंकि यहाँ का किराया चुकाने के लिए मैं उन्हींको बुलाने वाली हूँ ...
दीपू- सिर्फ़ किराए के लिए तो मत ही बुलाइएगा... यहाँ मेरी सैटिंग है सब हो जाएगा...
शैली- मेरे जीवन के काले पन्ने जब मुझे याद आते हैं तो दिल बैठने लगता है ... जब मुझे राजेश का दोस्त रवि पहली बार मुम्बई लेकर आए तो उनकी एक दोस्त रोजी भी साथ थी... यह तो बाद में पता चला की रोजी उसी गिरोह की सदस्य थी, नौकरी के नाम पर , फ़िल्म या टीवी के नाम पर बहकाकर वे खूबसूरत लड़कियों को मुम्बई लाते थे, फ़िर जो जैसी होती थी उसे उस तरह का काम दे दिया जाता था, अगर कोई कम खूबसूरत है तो उसको कोठे पर बेच दिया जाता था, कोई खूबसूरत होती तो उसको कालगर्ल बना दिया जाता... जो बेहद खूबसूरत होती तो उसको वे अपने साथ रखा करते थे... उन लोगों के जो ख़ास मेहमान आते उनके सामने परोसा करते थे... नग्न फ़िल्म बनाना भी उनका पेशा था...
Wednesday, June 24, 2009
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