इसी कारण वे चुपचाप रहने लगे... मोहल्ले में भी खुसर -फुसर होने लगी थी... हांलाकि मामला राजेश से जुडा था...इस वजह से कोई कुछ कहने की हिम्मत नहीं करता था... अगर कोई आम आदमी का मला होता तो लोग मेरा भी जीना हराम कर देते... गाँव की ज्यादातर लड़कियां तथा सुंदर औरतें राजेश के खानदान से सम्बन्ध रखती थीं, यह बात सबको मालूम थी ... फ़िर कौन क्या कहता ... असल में वहाँ कुछ ऐसा माहोल बना था की राजेश के परिवार से kareebee रिश्ता बनाना गर्व की बात समझी जाती थी... हर महिला चाहती थी की उसका घनिष्ठ सम्बन्ध बने ... मेरा रिश्ता अपने आप बन गया था... ख़ुद राजेश ने ही तो मेरे सामने प्रस्ताव रखा था और अच्छी तरह सोच विचारने के बाद मैंने हाँ करदी थी... अगली शाम आयी तो मेरे पास फ़िर राजेश का बुलावा आया... मेरा मन तो नहीं था लेकिन मैं ख़ास हवेली में चली गयी ... वहाँ रोजी मौजूद थी... वह अकेली शराब पी रही थी... मेरे पहुचते ही उसने गिलास मेरी तरफ़ बढ़ा दिया... मैं बोली-
- शुक्रिया... मैं तो कल से ही परशान हूँ, सर में बहुत दर्द हो रहा है... चक्कर से आ रहे हैं...
रोजी- कोई दिक्कत नहीं होगी... इसे पीलो... यह उतारे की है... हलक से नीचे उतारते ही सारी तकलीफें ख़त्म हो जायेंगी... बिल्कुल फ्रेश हो जाओगी... मेरी तरह...
शैली- रवि नहीं दिख रहे ? कहीं बाहर गए हुए हैं क्या ?
रोजी- वाह ... तुम पर भी चढ़ ही गया ना रवि का जादू ... मैंने कहा था न... दरअसल वह है ही गज़ब का इंसान ... जो लड़की एक रात उसके साथ गुजार लेती है, फ़िर वह हमेशा के लिए उसकी दीवानी हो जाती है... मुझे रोजाना एक मर्द की जरूरत पड़ती है, मैं उसका इंतजाम भी करती हूँ लेकिन रवि की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता...
शैली- हैरत है .... तुम रोजाना मरदों को कैसे बर्दाश्त कर लेती हो ? मेरी हालत तो एक दिन में ही खस्ता हो गयी...
रोजी- भले ही मुझे रोटी मत दो मगर मर्द तो हर हालत में चाहए ही... मुझे इसकी आदत लग चुकी है...
शैली- लेकिन इसका सुरक्षित इंतजाम अकिसे होता है ? किसीको मालूम पड़ गया तो ?
रोजी- अरे किसको पता चल सकता है, सब कुछ योजनाबद्ध तरीके से होता है... रवि के बारे में पूछ रही थीं ना... आज वह तुम्हारे पडौस के गाँव में आमंत्रित है... वहाँ पर किसी ख़ास हसीना को लाया गया है... बाहर से आई है ... उसको हीरो इन बन्ना है... जो इस तरह की हसीनाएं आती हैं उनका बॉडी टेस्ट रवि ही लेता है, बाद में उसकी तकदीर बन जाती है... उसको फिल्मों में कम मिल जाता है...
शैली- अच्छा , बुरा मत मानना फ़िर तुम्हारी किस्मत अभी तक क्यों नहीं बदली ?
रोजी- तुम्हें क्या पता की नहीं बदली ? मेरी भी एक फ़िल्म रिलीज होने वाली है... फ़िर देखना , हर तरफ मैं ही मैं रहूंगी... चौराहों पर मेरे बड़े-बड़े पोस्टर दिखाई देंगे...
शैली- ये तो बहुत अच्छी बात है... मैं भी देखूंगी आपकी फ़िल्म....कब तक आने की संभावना है ?
रोजी- साल के अंत तक उम्मीद है, तुम भी तो सुंदर दिखती हो, जवान हो फिल्मों में कोशिश क्यों नहीं कर लेतीं...?
शैली-- मुझे कौन काम देगा ?
रोजी- रवि किस दिन काम आएगा ? इसको बोलो न...
Friday, June 5, 2009
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