Saturday, June 27, 2009

तड़प, भाग-77

क्या इन लोगों ने तुम्हें भी जबरदस्ती जिस्म्फरोसी के इस दलदल में फंसाया है ?
शैली- मैं अकेली नहीं हूँ, मुझ जैसी न जाने कितनी बेगुनाह लड़कियां इस गिरोह के चंगुल में हैं.... यह एक ऐसा चक्र है जिसे न तो महाभारत काल का अर्जुन तोड़ सकता है और न ही आज के समय का... इस गिरोह की जड़ें इतनी गहरी हैं की आज तक अगर किसी लड़की ने भावनाओं में बहकर किसी ग्राहक को अपनी आपबीती मेरी तरह बतादी तो अगले कुछ दिनों में उसकी लाश रेल की पटरीपर पडी हुई मिलती है...
अधिकारी - इसका मतलब वे हत्यारे भी हैं ? उन्हें कत्ल करने से भी गुरेज नहीं है?
शैली- बिल्कुल नहीं... अगर आप भी उनके रास्ते में आए तो आपकी भी खैर नहीं है...
अधिकारी -ये लड़कियों को फंसाते कैसे हैं ? तरीका तो कुछ होगा ?
शैली- बहुत आसान है, प्यार के जाल में उलझा लेते हैं, रोजगार के जाल में उलझा लेते हैं...मंहगाई और बेरोजगारी के चलते कितनी ही लड़कियां तो अपने आप जिस्म की नुमाइश करने या बेचने के लिए तैयार हो जाती हैं...मेरे साथ गाँव में जालसाजी की गयी ... गाँव के एक प्रभाव शाली ठाकुर के बेटे ने मेरे साथ प्यार का नाटक किया और फ़िर मुझे इस गिरोह तक पंहुचा दिया... यह सब इतनी आसानिऊ, इतने प्यार और करीने से किया गया की मुझे कुछ पता ही नहीं चल पाया...उसका नाम राजेश था... वह मेरे नाजुक बदन को हासिल करना चाहता था, उसके मन में वासना थी मगर उसने इस पर प्यार का कलर चढ़ा रखा था, मेरे भी कदम बहक गए, राजेश जब चाहता मुझे अपने शयन कक्ष में बुला लेता और मेरे साथ रंगरेलियां मनाता .... मैं ख़ुद भी उसकी दीवानी हो चुकी थी, मैं नहीं जानती थी की जिस आनंद और सुकून की बार राजेश करता था वह सब छलावा था... उसमे रत्ती भर सच्चाई भी नहीं थी....-पहले तो वह ख़ुद ही मेरे जिस्म को हासिल करता था इसके बाद वह अपने यार दोस्तों को भी बुलाने लगा या फ़िर वह मुझे वह उन दोस्तों के पास भेजा करता था...मुझे बताया जाता की यह जो कुछ भी हो रहा है.... यह मौज मस्ती है, यहप्यार है और यही असली जिन्दगी है... इस तिलिस्म में आकर मैं बुरी तरह फंस गयी... यहाँ तक मुझे नशे की लत लगा दी गयी, जब तलब होती तो मैं ख़ुद ही राजेश की हवेली की तरफ़ बढ़ने लगती थी... इसके बाद वे मेरा जमकर फायदा उठाते... वे शहर से दौलतमंद और दिलफेंक ग्राहक बुलाकर रखते थे, मुझे उनके हवाले करके वे अपने बड़े -बड़े काम निकालते रहते थे, खूब दौलत कमाते रहते थे...
अधिकारी- ये सब बातें उस समय तुम्हारी समझ में नहीं आयीं थीं क्या ? तब अगर एक बार भी सोचा होता तो यह नौबत नहीं आती...
शैली- कैसे सोचती ? मुझे हर समय नशे में रखा जाता था... आसपास के गाँव की भी कई लडकियां थीं... वे हमें कोई ऐसी नशीली चीज खिलाते थे की उसे खाते ही हमारी भावनाएं बेकाबू हो जाया करती थीं... उसे खाते ही लगता था की एक नहीं कम से कम दो मर्द एक साथ हमसे जिस्मानी सम्बन्ध बनाएं , और जब वे थक जाएँ तो फ़िर दूओसरे दो लोग आकर मजा दे... दिलोदिमाग में इतना सेक्स भर दिया गया था... तन में आग लगने लगती थी... फ़िर राजेश अपने ग्राहकों से उस आग को बुझाया करता था... उसके यहाँ पर रोजाना नई नई लड़कियां आती ही रहती थीं,, राजेश उन हसीनों के साथ में शुरुआत में ही सम्बन्ध बनाता था इसके बाद वह नई नई कलियों का रस चूसता था... सभी लड़कियां इस चक्कर में रहती की राजेश सिर्फ़ उन्हींसे प्रेम करता है... असलियत यह थी की वह किसी से भी प्यार नहीं करता था... एक नंबर का शराबी बन चुका था और शराब -शबाब में ही उसका ज्यादातर समय बीता करता था...उस समय बुरे भले की समझ हमें नहीं थी... उस वक्त भी मेरे पास बड़े बड़े अफसर आया करते थे, ऐसा कोई बड़ा अधिकारी नहीं था जिसने मेरे पैर नहीं दबाए हों... राजेश का परिवार दिनोदिन मालामाल होता जा रहा था... वह खा पीकर गुब्बारे की तरह फूल गया था...










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