अभी थोड़े देर पहले ही तो तुमने कहा था की तुमने राजेश को इस अंदाज से मारा की वह किसीको ह्त्या जैसी न लगे... बस मैं समझ गया की पुलिस रिकार्ड में स्वभाविक मौत ही लिखी है... मैं जानता हूँ की किसी भी काम में तुम्हें असफलता हाथ नहीं लगती... जीत तुम्हारी ही होगी... यह मेरे अन्दर का विश्वाश है...भरोसा हो गया है तुम पर... प्यार का प्याला पीकर मस्ती में आ गया हूँ, मस्त हो गया हूँ....
शैली- तुम्हारी तुम जानो मैं तो बस इतना ही जानता हूँ की मुझे तुमसे मोहब्बत है , और उम्र भर यह इसी तरह रहेगी... अगर दम भी निकला तो लबों पर तुम्हारा ही नाम होगा... आंखों में तुम्हारी ही सूरत रहेगी.............
दीपू- मेरी प्यारी दोस्त ... कितनी अच्छी हो तुम... अब मैं तुम्हें जिस्मानी सुख देता हूँ साथ में तुम अपने अतीत की दास्ताँ भी सुनाती जाओ.... पूरी बात सुनूंगा तो मुझे भी समझ में आएगा की तुम्हारी बेहतरी के लिए मैं और क्या कर सकता हूँ... मैं भले ही कुछ न सही लेकिन जैसा भी हूँ तुम्हारा अपना हूँ...
जब शैली को लगा की दीपू कुछ कमजोर पड़ रहा है तो उसने उसे गर्म करना शुरू कर दिया... उसके ख़ास अंग को सहलाने के बाद शैली ने दीपू के होठों से अपने होठ सटादिए... एक बार फ़िर कामोत्तेजना की आग सुलगने लगी... यह आग बेहद खतरनाक थी... दीपू का तन मन झुलसने लगा... वह शैली के घुटनों को मोड़कर एडजस्ट करने लगा... शैली अपने यौवन द्वार को छिपाने का असफल प्रयास करने लगी... दीपू के लिए यह सब बहुत असहनीय था... जब उसे लगा की सीधी उंगली से घी नहीं निकलेगा तो उसने अपने घुटनों का सहयोग लेना शुरू कर दिया... इस बार हार गयी शैली... उसने रास्ता आसान कर दिया... दीपू ने देर करना उचित नहीं समझा... उसने आक्रमण कर दिया... इस हमले में शैली को अपार संतुष्टि मिली... उसने तड़पकर कहा-
और जोर से प्रहार करो मेरी जान... अब आया है आनंद... इससे पहले तो कभी इतना जोर नहीं लगाया था... मुझे तभी मजा आता है जब हमला पूरी ताकत से किया जाता है...
-मैं ठहरा गुलाम ...जो आदेश मिलेगा उसका पालन करूँगा... जैसे भी हो सकेगा, तुम्हें संतुष्ट करने की कोशिश करूँगा... मैंने अब से आगे तुमको हर तरह से संतुष्ट करने की ठानी है...
शैली- तुम्हारी बातें बहुत मीठी लगती हैं, शहद से भी मीठी... कैसे कर लेते हो इतनी प्यारी बातें ?
दीपू- मैं स्ट्रगलर हूँ, मुझे काम की तलाश है ,अगर मैं अच्छे से बात न करुँ तो मैं फ़िल्म स्टार कैसे बनूँगा ?
शैली- सूना है फ़िल्म में काम करने वाले लोग जल्दी शादी नहीं करते क्योंकि शादी के बाद उनकी डिमांड कम हो जाती है , ये सच है या ग़लत ?
दीपू- ग़लत.... वे शादी तो बहुत पहले ही कर लेते हैं मगर उसको लीक नहीं करते... लोगों तक शादी की ख़बर को पहुचने नहीं देते, देरी से ख़बर करते हैं... वैसे कितने ही लोग अब भी ऐसे हैं जिनकी शादी हो चुकी है मगर सुपर स्टार बने बैठे हैं... मेरे ख़याल से ये बातें अब इतनी मायने नहीं रखतीं...
शैली- ठीक है इसका मतलब हम अपनी शादी की खबर को आम कर सकते हैं, हमारी शादी की बात तुम्हारे स्टार बन्ने में रोडा नहीं बनेगी...
दीपू -मेरा मजाक तो नहीं उड़ा रही हो तुम ?
शैली- कैसी बात करते हो यार , समझो मैं अब तुम्हें किसी भी कीमत पर फिल में काम दिलवाकर रहूंगी... भले ही कम बजट की फ़िल्म हो... बड़े बैनर की गारंटी मैं नहीं लेती... छोटे बजट की फ़िल्म में कोई दिक्कत नहीं होगी...
दीपू- बड़ा एहसान होगा ... अपना सपना सच होते देखूंगा तो दिल खुश हो जाएगा...
शैली- तुम फ़िक्र मत करो, मैं तुम्हारे लिए एक नयी फ़िल्म लांच कर सकती हूँ...
Saturday, June 13, 2009
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