Friday, June 26, 2009

तड़प, भाग-76

शैली- आप क्या कर लेंगे उनका ? क्या बिगाड़ लेंगे ? उन्हें जो करना है वह किसी और पुलिस अधिकारी से करवा लेंगे... उनके पास किस चीज की कमी है, उनके पास एक से बढ़कर हसीनाएं हैं, दौलत है ... वे सब कुछ कर सकते हैं...बहुत लंबे हाथ हैं उनके... शायद क़ानून से भी बड़े... तभी तो आज तक कोई लड़की बगावत करने की हिम्मत भी नहीं कर पाई... वे लोग सिर्फ़ जिस्म फरोशी का धंधा ही नहीं करते इसके अलावा भी बहुत कुछ गैरकानूनी कार्य करते हैं... मगर कौन पकडेगा उन लोगों को... मैं भी क्यों कह रही हूँ, क्या होगा कहकर ? कौन सुनेगा और क्या करेगा सुनकर ?
अधिकारी- तुम दरी हुयी हो, इसलिए इस तरह की कमजोर बात कर रही हो, मैं इस राज्य का बहुत बड़ा पुलिस अफसर हूँ, शायद तुम टीवी न्यूज नहीं देख पाती, अखबार में समाचार नहीं पढ़ पातीं, तभी ऐसी बातें कर रही हो...
शैली- ठीक है आप कोशिश करके देखिये मगर ऐसा न हो की इस चक्कर में मुझे जान से भी हाथ धोना पड़े...
पुलिस का अधिकारी शैली की विवशता को अच्छी तरह से समझ रहा था, तभी तो उसे खूब हंसी आ रही थी... एक आईपीएस पुलिस अफसर को वह मामूली हवलदार समझ रही होगी... शैली का गदराया जिस्म उसकी बांहों में था , शराब का कम और शैली की जवानी का नशा उस पर ज्यादा चढ़ रहा था...शैली के होठों का रसपान करने के बाद वह कहने बोला-
-किसी मिस वर्ड का बदन भी इतना सुंदर और कातिल नहीं होगा जितना की तुम्हारा... इसे मेंटेन करके कैसे रखती हो, तुम पर हाजारों जीवन कुर्बान करने का दिल करता है...
शैली- आप जैसे जवान मर्द के साथ हम बिस्तर होने के लिए तो हमारे यहाँ की हर लड़की मचलती है... मेरा सौभाग्य है जो तुम इतना चाहते हो, वरना तो आप पर मर मिटने वाली लड़कियां यहाँ कम नहीं है...
अधिकारी- नहीं, जिनका जिक्र तुम कर रही हो वे मेरे लिए बेकरार नहीं होतीं बल्कि मेरी शौहरत और दौलत पर फ़िदा होती हैं... उन्हें मालूम है की मैं कौन हूँ, इसलिए मेरे साथ रिश्ता कायम करना चाहती है... मगर हमारा अपना भी तो टेस्ट है... हम तुम जैसी किसी खास हसीना पर ही अपना दिल लुटा सकते हैं, सच तो ये है की दिल के साथ साथ जान भी लुटाना चाहते हैं...
शैली- मुझे इतना प्यार भी मत करो साहब की संभाल हीपाऊँ...मेरा दिल इतना बड़ा नहीं है... सचमुच, मैं इतनी ज्यादा खुशी बर्दाश्त नहीं कर पाउंगी....
पुलिस अधिकारी खुश हो गया... वह शैली का दिल जीतने में कामयाब हो चुका था... शैली की गोलाइयां उसकी साँसों के साथ -साथ ऊपर नीचे हो रही थीं... पुलिस अधिकारी उनको चूमने लगा... शैली की कामोत्तेजना भड़कने लगीं, उसके अंग अंग से चिन्गारोयाँ फूटने लगीं... वह अपनी जीभ का स्पर्श कर शैली को और भी ज्यादा उत्तेजित कर रहा था... शैली अपनी पलकों को बंद करने लगी, वह इन क्षणों को स्म्रतियों में कैद कर लेना चाहती थी...पुलिस अधिकारी उसके घुटनों को मोड़कर धीरे धीरे सहला रहा था... इसके बाद वह शैली के यौवन द्वार को सहलाने लगा... वासना की चिंगारियां और जोर से भड़कने लगीं... वह अपनी सुध बुध खोने लगी... दिल में इच्छाएं जाग्रत होने लगीं की अब वह उस पर आक्रमण करदे ... और समय तो वह भी खूब जल्दबाजी में होता था, आते ही शैली पर भूखे भेदिये की तरह टूट पड़ता था ... मगर इस बार वह भी हुस्न के जलवे देखने मगन था... शैली उसको स्वर्ग की ऐसी सैर करा रही थी की वह खुदको दुनिया का सबसे सुखी इंसान समझ रहा था- शैली गर्म- गर्म आहें भर रही थी... वह कहने लगा -
-तुम्हारी हर अदा जानलेवा है, जो मजा आज तुमने दिया मुझे कभी नहीं मिला...
शैली- जीवन भर तुम्हें इसी तरह का सुख देती रहूंगी...
अधिकारी- और मैं भी हर सुख देने की कोशिश करूँगा...

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